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“वैश्विक युद्ध की विभीषिका के बीच भारत की विकास-गति अविराम…’, जेवर एयरपोर्ट उद्घाटन पर प्रधानमंत्री का चेतावनी भरा उद्बोधन”

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Dainik India News

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“वैश्विक युद्ध की विभीषिका के बीच भारत की विकास-गति अविराम…’, जेवर एयरपोर्ट उद्घाटन पर प्रधानमंत्री का चेतावनी भरा उद्बोधन”

नोएडा/जेवर, विशेष संवाददाता दैनिक इंडिया न्यूज़: उत्तर प्रदेश की धरा पर अवस्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन का क्षण केवल एक अधोसंरचनात्मक उपलब्धि नहीं, अपितु एक उदीयमान राष्ट्र की आकांक्षाओं का विराट उद्घोष बनकर उभरा, जब देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ओजस्वी संबोधन में वैश्विक परिदृश्य की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में प्रज्वलित युद्ध की ज्वालाएं अब समस्त विश्व को अपने दुष्प्रभावों से आच्छादित कर रही हैं—खाद्य संकट, ऊर्जा आपूर्ति में अवरोध और आर्थिक अस्थिरता जैसे बहुआयामी संकट मानव सभ्यता के समक्ष चुनौती बनकर खड़े हैं… और इसी भयावह पृष्ठभूमि में उन्होंने जो चेतावनी दी, वही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे निर्णायक बिंदु बनकर उभरती है—आखिर क्यों प्रधानमंत्री ने अफवाहों को राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा अदृश्य खतरा बताया?


प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत, जो व्यापक स्तर पर कच्चे तेल का आयातक है, वह इस वैश्विक उथल-पुथल से अछूता नहीं रह सकता, किंतु सरकार की दूरदर्शी नीतियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि इस संकट का दंश आम नागरिक, कृषक वर्ग एवं वंचित समुदायों तक न्यूनतम रूप में पहुंचे। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे असत्यापित सूचनाओं के मायाजाल से स्वयं को दूर रखें, क्योंकि डिजिटल युग में फैली अफवाहें किसी भी संकट को विकराल रूप प्रदान कर सकती हैं।

अपने उद्बोधन के प्रारंभ में प्रधानमंत्री ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री एवं अन्य गणमान्य जनों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह दिवस “नवभारत की उड्डयन गाथा” का स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने स्मरण कराया कि जिस परियोजना का कभी शिलान्यास उन्होंने किया था, आज उसी का उद्घाटन करना एक संकल्प से सिद्धि तक की यात्रा का सजीव उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तीव्रगामी विकास की परिकल्पना को मूर्त रूप लेते हुए बताया कि सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई, नमो भारत ट्रेन, मेरठ मेट्रो विस्तार तथा अब यह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट—ये सभी परियोजनाएं “डबल इंजन सरकार” की कार्यदक्षता और संकल्पशक्ति का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट भविष्य में ऐसी क्षमता अर्जित करेगा कि प्रत्येक दो मिनट में एक विमान का उड्डयन संभव होगा—जो इसकी भव्यता और रणनीतिक महत्त्व का परिचायक है।

उन्होंने दादरी को देश के दो प्रमुख फ्रेट कॉरिडोर का संगम बताते हुए कहा कि अब उत्तर भारत की औद्योगिक और कृषि उत्पादकता को बंगाल एवं गुजरात के समुद्री तटों से अभूतपूर्व कनेक्टिविटी प्राप्त हुई है। यह बहु-माध्यमीय संपर्क व्यवस्था किसानों और उद्योगों के लिए समृद्धि के नवीन द्वार उद्घाटित करेगी, जिससे स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे।

प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिस नोएडा को कभी “लूट का एटीएम” बना दिया गया था, वही आज उत्तर प्रदेश के आर्थिक पुनर्जागरण का केंद्रबिंदु बन चुका है। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2003 में स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात भी यह परियोजना वर्षों तक उपेक्षा का शिकार रही, किंतु 2014 के उपरांत केंद्र और राज्य में समन्वित नेतृत्व के कारण इसे अभूतपूर्व गति प्राप्त हुई और आज यह साकार स्वरूप में देश के समक्ष है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह परियोजना “डबल इंजन की तीव्रगति” का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जो प्रदेश को निवेश, रोजगार और औद्योगिक प्रगति के नए शिखरों तक ले जाएगी। वहीं केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इसे एक उभरते “एरोट्रोपोलिस” के रूप में विकसित करने की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र शीघ्र ही वैश्विक व्यापार, लॉजिस्टिक्स और उच्च कौशल आधारित रोजगार का प्रमुख केंद्र बनेगा।

प्रधानमंत्री ने आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा और बुलंदशहर सहित अनेक शहरों के लिए इसे विकास का उत्प्रेरक बताते हुए कहा कि यह एयरपोर्ट न केवल विमानों की उड़ान का माध्यम बनेगा, बल्कि “विकसित भारत” की आकांक्षाओं को भी पंख प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के उपरांत राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष ने मुंबई से प्रख्यात फिल्म निर्माता बोनी कपूर को उत्तर प्रदेश आगमन पर हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए प्रदेश सरकार एवं उपमुख्यमंत्री सहित “डबल इंजन” व्यवस्था के समस्त मंत्रिमंडल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस तीव्रता से राष्ट्र निर्माण के कार्य अग्रसर हैं, वह दिवस दूर नहीं जब भारत पुनः “विश्व गुरु” के रूप में अपनी गौरवशाली प्रतिष्ठा स्थापित करेगा।

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