10% वृद्धि जन आक्रोश के बाद वापस ली, सरचार्ज के नए रास्ते से वही लूट? ऊर्जा विभाग में डबल गेम!
ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा बनाम UPPCL चेयरमैन आशीष गोयल – पब्लिक के लिए नाटक, अंदर से पूरी मिलीभगत
अविजित आनंद दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के साथ दोहरा खेल चल रहा है। गर्मी में जनता पहले से परेशान है। UPPCL ने जून के बिल में 10% FPPAS ईंधन अधिभार थोपने का आदेश जारी किया। विरोध के बाद अस्थायी राहत दी गई, लेकिन अब UPERC ने UPPCL प्रबंध निदेशक को फिर नोटिस जारी कर 19 जून तक जवाब मांगा है। राहत का नाटक जारी है, लेकिन असल बोझ जनता पर डाला जा रहा है।
मंत्री का पत्र – ध्यान भटकाने का हथियार?
मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने FPPAS पर नाराजगी जताते हुए पत्र लिखा। लेकिन सवाल है — अगर जनता की इतनी चिंता है तो संघर्ष समिति के समझौते लागू क्यों नहीं? अभियंताओं की सीटों पर बड़का बाबू का कब्जा कब तक?
दो बड़का बाबुओं की साठ-गांठ — दिखाने को नूरा कुश्ती
एक पूर्व बड़का बाबू (समय से पहले रिटायर होकर मंत्री बने) और दूसरा वर्तमान बड़का बाबू। बाहर मतभेद का ड्रामा, अंदर पूरी मिलीभगत।
आशीष गोयल का दोहरा खेल
गोयल हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए दो पद संभाल रहे हैं — UPPCL चेयरमैन और अपर मुख्य सचिव ऊर्जा। मंत्री की मर्जी के बिना यह कैसे संभव? साफ है — मंत्री का वरदहस्त गोयल पर है।
मंत्री की चुप्पी अमेरिकी ब्लैकलिस्टेड कंपनी के प्राइवेटाइजेशन टेंडर पर मंत्री ने विरोध क्यों नहीं किया?
भवानी सिंह खंगारौत का हश्र
छंटनी का विरोध करने वाले भवानी सिंह खंगारौत को मध्यांचल MD पद से ट्रांसफर कर अपनी चहेती रिया केजरीवाल को बिठा दिया गया। समझौता आज तक लागू नहीं हुआ।
मंत्री की प्राइवेटाइजेशन की वकालत
मंत्री जी ने खुद प्राइवेटाइजेशन को अच्छा बताया और उसकी वकालत की है। इसी आधार पर साफ है कि आशीष गोयल और मंत्री जी दोनों मिलकर जनता को बेवकूफ बना रहे हैं।
गोयल की साजिश: जनता को त्राहि-त्राहि कराकर प्राइवेटाइजेशन थोपना
गोयल जब से चेयरमैन बने, प्राइवेटाइजेशन तेज। 25,000 संविदा कर्मियों को हटा दिया। विद्युत व्यवस्था चरमरा गई, दुर्घटनाएं बढ़ीं (30 मौतें)। जनता तंग होकर खुद बोलेगी — “प्राइवेट कर दो”।
जनता पर दोहरा बोझ
FPPAS का पुराना बोझ
25,000 बेरोजगार + बढ़ती मौतें
समझौते लागू न करना
गर्मी में जानबूझकर तंग करना
जनता का सवाल
समझौते लागू क्यों नहीं?
गोयल को दो पद क्यों?
ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर चुप्पी क्यों?
भवानी सिंह का ट्रांसफर, रिया केजरीवाल का क्यों?
25,000 कर्मी हटाकर व्यवस्था क्यों बिगाड़ी?
प्राइवेटाइजेशन की वकालत क्यों?
जनता सतर्क हो! प्राइवेटाइजेशन की इस साजिश को पहचानें और असली जवाबदेही मांगें। 2027 चुनाव नजदीक हैं — जनता का नुकसान मत होने दें।