पौधों की सुरक्षा से लेकर नदियों में प्रदूषण रोकने तक पर्यावरणीय दायित्वों की समीक्षा, मूर्ति विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाबों के उपयोग और सीवेज शोधन की कार्ययोजना बनाने के निर्देश
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।अस्पतालों से निकलने वाले जैव-चिकित्सकीय कचरे के संग्रहण, परिवहन और निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्य विकास अधिकारी ध्रुव खाड़िया ने जनपद के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों से प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले बायोमेडिकल कचरे का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब प्रशासन यह जानकारी जुटाएगा कि किस अस्पताल से कितना कचरा निकल रहा है, उसका संग्रहण और निस्तारण किस प्रकार किया जा रहा है तथा इसके लिए अधिकृत एजेंसियों के साथ आवश्यक अनुबंध किए गए हैं या नहीं। निर्देशों का उद्देश्य केवल अभिलेख जुटाना नहीं, बल्कि निर्धारित मानकों के अनुपालन की निगरानी को प्रभावी बनाना है।
विकास भवन सभागार में आयोजित जिला गंगा समिति, जिला वृक्षारोपण समिति, आर्द्रभूमि समिति एवं जिला पर्यावरण समिति की मासिक बैठक में सीडीओ ने स्पष्ट किया कि जैव-चिकित्सकीय कचरे के निस्तारण में नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को सभी संबंधित अस्पतालों से दैनिक विवरण संकलित करने तथा कचरे की मात्रा, उसके निस्तारण की प्रक्रिया और अधिकृत एजेंसियों के साथ अनुबंध की स्थिति का ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा गया। निर्धारित मानकों और नियमों का अनुपालन नहीं करने वाले अस्पतालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की निगरानी का यह दायरा केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बैठक में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े दूसरे महत्त्वपूर्ण विषय भी उठे।
वृक्षारोपण की समीक्षा करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने पौधे लगाने के बाद उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। विभिन्न विभागों के माध्यम से लगाए गए पौधों का अंतरविभागीय सत्यापन तत्परता और निष्पक्षता के साथ करने के निर्देश दिए गए। यदि कोई पौधा सूख जाता है अथवा किसी कारणवश नष्ट हो जाता है, तो संबंधित विभाग वन विभाग से नया पौधा प्राप्त कर उसी स्थान पर पुनः रोपण सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभागीय सत्यापन के बाद मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय की ओर से औचक निरीक्षण किया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य वृक्षारोपण को केवल लक्ष्यपूर्ति तक सीमित रखने के बजाय पौधों के संरक्षण और उनके जीवित रहने की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
आगामी धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर नदियों और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने पर भी जोर दिया गया। सीडीओ ने निर्देश दिया कि मूर्ति विसर्जन के दौरान प्रतिमाओं को सीधे नदियों में प्रवाहित न किया जाए। इसके स्थान पर निर्धारित कृत्रिम तालाबों अथवा अन्य चिह्नित विसर्जन स्थलों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ जलस्रोतों की स्वच्छता भी बनी रहे। इसके साथ ही जनपद के ग्रामों और कस्बों में स्वच्छता व्यवस्था सुधारने तथा नदियों में गिरने वाले नालों के दूषित जल का शोधन करने के लिए जल निगम (शहरी) और नगर पालिका को संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
सीवेज के शोधन की दिशा में आवश्यक आधारभूत व्यवस्था विकसित करने के लिए संबंधित विभागों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण की दिशा में कार्रवाई करने तथा माह के अंत तक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। इस पहल का उद्देश्य नालों के माध्यम से नदियों तक पहुँचने वाले दूषित जल के प्रभाव को कम करना और स्थानीय स्तर पर स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने जिला गंगा समिति की मासिक बैठकों को जनस्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बताते हुए नामित विभागाध्यक्षों को स्वयं उपस्थित रहने के निर्देश दिए। बिना उचित कारण अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बैठक में डीएफओ पी.के. पांडेय, उपायुक्त श्रम रोजगार राजीव कुमार, जिला पंचायती राज अधिकारी किरन वर्मा, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और जिला गंगा समिति के सदस्य उपस्थित रहे।