फैजुल्लागंज, मामा कॉलोनी और दाऊदनगर में संकटग्रस्त परिवारों तक भोजन, पेयजल और जरूरी सामान पहुँचा रहे स्वयंसेवक; क्षेत्र प्रचारक अनिल जी विभाग प्रचारक अनिल जी ने लिया राहत कार्यों का जायजा

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ। गोमती की बाढ़ ने जब लखनऊ की कई बस्तियों में जनजीवन की गति थाम दी, तब जलभराव से घिरे परिवारों की कठिनाइयों के बीच सेवा का संकल्प लेकर स्वयंसेवक उनके सहारे बने। फैजुल्लागंज, मामा कॉलोनी और दाऊदनगर में पिछले छह दिनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सेवा भारती का राहत अभियान निरंतर चल रहा है। जहाँ पानी ने आवागमन को कठिन बनाया, वहाँ नावों के सहारे जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुँचाने का प्रयास जारी है। संकट की इस घड़ी में राहत सामग्री का हर पैकेट उन परिवारों के लिए केवल भोजन नहीं, बल्कि इस भरोसे का संदेश भी है कि कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं।
इस अभियान के अंतर्गत बाढ़ प्रभावित परिवारों को हजारों भोजन पैकेट, पेयजल की बोतलें और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। सुबह और शाम राहत वितरण के माध्यम से जरूरतमंदों तक सहायता पहुँचाई जा रही है। जलभराव के बीच दैनिक आवश्यकताओं की व्यवस्था करना जिन परिवारों के लिए चुनौती बन गया है, उन तक पहुँचने के लिए स्वयंसेवक लगातार प्रयासरत हैं। इन परिस्थितियों में सेवा का वास्तविक अर्थ केवल सहायता बाँटना नहीं, बल्कि पीड़ितों की आवश्यकता को समझना और कठिनाइयों के बीच उनके साथ खड़े रहना है।
राहत अभियान की प्रगति जानने और वितरण व्यवस्था का जायजा लेने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनिल जी क्षेत्र प्रचारक पूर्वी उत्तर प्रदेश अवध प्रांत से विभाग प्रचारक श्री अनिल जी, प्रांत सेवा प्रमुख श्री देवेंद्र जी तथा सेवा भारती के कोषाध्यक्ष श्री मंशाबक्श सिंह जी प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचे। उन्होंने स्वयंसेवकों से राहत कार्यों की जानकारी ली और जरूरतमंद परिवारों के बीच सामग्री वितरण का अवलोकन किया। इस दौरान अभियान के माध्यम से प्रभावित बस्तियों तक सहायता पहुँचाने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित रहा।
बाढ़ का पानी उतरने के साथ परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन संकट की घड़ी में मिला सहारा प्रभावित परिवारों की स्मृतियों में लंबे समय तक बना रहता है। जलभराव के बीच नावों के सहारे पहुँचती राहत सामग्री और जरूरतमंदों तक सहायता पहुँचाने में जुटे स्वयंसेवकों का प्रयास इसी मानवीय संवेदना को रेखांकित करता है। आपदा के बीच सेवा का सबसे बड़ा संदेश यही है कि जब किसी परिवार के सामने कठिनाइयाँ दीवार बनकर खड़ी हों, तब किसी का सहारा बनना ही मानवता का सबसे सार्थक परिचय है।