मानवता के देवदूतों को राष्ट्र का वंदन: राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर लखनऊ के प्रख्यात चिकित्सकों का हुआ गरिमामय सम्मान



दैनिक इंडिया न्यूज़,01 जुलाई 2026 लखनऊ।
राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस के पावन अवसर पर राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने चिकित्सा-जगत के उन विभूतियों का अभिनंदन किया, जिनके ज्ञान, सेवा, संवेदना और समर्पण ने असंख्य जीवनों में नवचेतना का संचार किया है।

अंगवस्त्र एवं पुष्प अर्पित कर सम्मानित करते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सक केवल रोगों का उपचार नहीं करते, बल्कि आशा, विश्वास और जीवन का पुनर्सृजन करते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में वैद्य को "धरती पर ईश्वर का प्रतिनिधि" माना गया है।


उन्होंने राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस की इस वर्ष की भावना को आत्मसात करते हुए कहा कि आज का दिवस उन सभी चिकित्सकों के प्रति राष्ट्र की सामूहिक कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत सुखों से ऊपर उठकर मानवता की सेवा को जीवन का सर्वोच्च व्रत बनाया है। चिकित्सा केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, करुणा और लोकमंगल का सर्वोच्च साधन है। समाज जितना अपने चिकित्सकों का सम्मान करेगा, उतना ही स्वस्थ, समृद्ध और संवेदनशील राष्ट्र का निर्माण होगा।



सम्मान समारोह में मेजर जनरल अमित देवगन (कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ), डॉ. सी. एम. सिंह (निदेशक, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान), डॉ. विक्रम, डॉ. अरविंद कुमार सिंह, डॉ. समरेन्द्र नारायण, डॉ. अनित परिहार, डॉ. गौरव चौधरी, डॉ. अखिल शर्मा, डॉ. संगीता अग्रवाल, डॉ. अतुल अग्रवाल (वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट), डॉ. संगीता मल्होत्रा, डॉ. पुनीत मल्होत्रा (वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट), डॉ. बी. पी. सिंह (वरिष्ठ श्वास एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ), डॉ. अभिषेक शुक्ल, डॉ. संजय निरंजन (वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ), डॉ. निधि निरंजन, डॉ. कनव (दंत चिकित्सक), डॉ. संजीव मिश्र (वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ), डॉ. अभिषेक तोमर, डॉ. शोभित कक्कड़ (वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ) तथा डॉ. रंजीत कुमार दीक्षित (बीआरडी चिकित्सालय, महानगर, लखनऊ) सहित अनेक प्रतिष्ठित चिकित्सकों को सम्मानित किया गया।


इस अवसर पर जितेन्द्र प्रताप सिंह ने संस्कृत का प्रसिद्ध वाक्य उद्धृत करते हुए कहा— "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।" अर्थात स्वस्थ शरीर ही समस्त कर्तव्यों और धर्मपालन का प्रथम साधन है। उन्होंने कहा कि जब चिकित्सक किसी रोगी को स्वस्थ करता है, तब वह केवल एक व्यक्ति का उपचार नहीं करता, बल्कि उसके परिवार, समाज और राष्ट्र की संभावनाओं को भी सुरक्षित करता है। इसलिए चिकित्सकों का सम्मान वस्तुतः मानवता, राष्ट्रधर्म और सेवा-संस्कृति का सम्मान है।







कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत भावपूर्ण रहा। सम्मानित चिकित्सकों ने इस अभिनव पहल के लिए राष्ट्रीय सनातन महासंघ एवं उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज से प्राप्त सम्मान उन्हें और अधिक समर्पण, संवेदनशीलता तथा सेवा-भाव के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। उपस्थित लोगों ने भी इस आयोजन को चिकित्सा-जगत के प्रति समाज की कृतज्ञता का अनुपम उदाहरण बताया।

राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर आयोजित यह सम्मान समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार, विज्ञान और मानवीय संवेदना के अद्वितीय समन्वय का प्रेरक संदेश बनकर उभरा। यह आयोजन इस विश्वास को और सुदृढ़ करता है कि जब समाज अपने चिकित्सकों का सम्मान करता है, तब राष्ट्र का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और उज्ज्वल बनता है।