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प्लास्टिक उद्योग को नई दिशा: लखनऊ में AIPMA की गोष्ठी में विकसित भारत के लक्ष्य पर मंथन

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प्लास्टिक उद्योग को नई दिशा: लखनऊ में AIPMA की गोष्ठी में विकसित भारत के लक्ष्य पर मंथन

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया उद्घाटन; निर्यात में प्लास्टिक उत्पादों की हिस्सेदारी 1 से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने के लक्ष्य पर जोर, एमएसएमई योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान

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दैनिक इंडिया न्यूज़, 13 अगस्त 2026, लखनऊ।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देश के प्रमुख प्लास्टिक उद्योगपतियों और क्षेत्र के विशेषज्ञों की उपस्थिति में अखिल भारतीय प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA) की गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना के साथ उद्घाटन सत्र का आरंभ किया। आयोजन में प्लास्टिक उद्योग की वर्तमान उपयोगिता, तकनीकी विकास, निर्यात की संभावनाओं, एमएसएमई क्षेत्र की नीतियों तथा विकसित भारत के लक्ष्य में उद्योग की भूमिका पर व्यापक विमर्श हुआ।

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उद्घाटन अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कृत भारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संपर्क प्रमुख जितेन्द्र प्रताप सिंह, भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय की संयुक्त सचिव मर्सी इपाओ तथा AIPMA के अध्यक्ष सुनील शाह, चेयरमैन अरविंद मेहता और सेमिनार चेयरमैन मनीष ढेठिया सहित उद्योग जगत के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समारोह में प्लास्टिक क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं और उसके औद्योगिक विस्तार से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

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इसी औद्योगिक विमर्श की पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश के बदलते विकास परिदृश्य का उल्लेख भी स्वाभाविक रूप से सामने आया। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, एक्सप्रेसवे, हवाई संपर्क, औद्योगिक निवेश और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में हुए विस्तार ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दी है। राज्य सरकार के 2026-27 के बजट दस्तावेज के अनुसार प्रदेश में अब 81 मेडिकल कॉलेज हैं, जबकि चिकित्सा शिक्षा में MBBS और PG सीटों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दूसरी ओर पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मार्ग प्रदेश के विभिन्न अंचलों को तीव्र संपर्क से जोड़ते हुए औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए नई जमीन तैयार कर रहे हैं। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रयागराज तक जोड़ने वाली इसी व्यापक कनेक्टिविटी दृष्टि का हिस्सा है।

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इस परिवर्तन की अगली कड़ी उद्योग और निवेश के उस वातावरण में दिखाई देती है, जहां एक्सप्रेसवे अब केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, बाजार और रोजगार को जोड़ने वाली आर्थिक धमनियों के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। ODOP के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक कौशल को बाजार से जोड़ने, GI पहचान के माध्यम से क्षेत्रीय उत्पादों को प्रतिष्ठा देने, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के जरिए रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने और हवाई संपर्क के विस्तार से वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने का प्रयास इसी व्यापक विकास-दृष्टि का हिस्सा है। कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी सरकार अपराध और संगठित अपराध के विरुद्ध कठोर कार्रवाई को निवेश के अनुकूल वातावरण से जोड़ती रही है। इस बदलती औद्योगिक पृष्ठभूमि में प्लास्टिक क्षेत्र का विस्तार केवल एक उद्योग की वृद्धि नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की उभरती विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षमता के साथ जुड़ती हुई एक बड़ी आर्थिक संभावना के रूप में देखा जा सकता है।

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अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्लास्टिक अब केवल किसी एक उद्योग तक सीमित उत्पाद नहीं रह गया है, बल्कि चिकित्सा, पैकेजिंग, कृषि, उपकरण निर्माण सहित मानव जीवन के अनेक क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता निरंतर बढ़ी है। उन्होंने 1966-67 के दौर से लेकर तकनीकी विकास और बदलती मांग के अनुरूप प्लास्टिक बैग एवं अन्य उत्पादों के स्वरूप में आए परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ प्लास्टिक दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाली आवश्यक सामग्रियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

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ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में उद्योग जगत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने प्लास्टिक उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान में कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग एक प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत तक ले जाना भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायक हो सकता है। उद्योग की इस संभावित भूमिका ने गोष्ठी में आगे की रणनीति पर विमर्श का आधार तैयार किया।

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भारत सरकार की संयुक्त सचिव मर्सी इपाओ ने एमएसएमई क्षेत्र से संबंधित केंद्र सरकार की नीतियों और विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे सरकार की योजनाओं और उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाते हुए अपने उद्यमों का विस्तार करें तथा रोजगार, उत्पादन और निर्यात को गति देकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दें।

विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र प्रताप सिंह (अखिल भारतीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय सनातन महासंघ एवं क्षेत्र संपर्क प्रमुख, संस्कृतभारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश) ने देश-विदेश से आए प्रतिभागियों का स्वागत और अभिनंदन किया। उन्होंने लखनऊ की नजाकत, नफासत, अदब और तहजीब के साथ उसकी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से अतिथियों को परिचित कराया। उन्होंने शहर की ऐतिहासिक संरचनाओं, मुगलई खान-पान, प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन का भी संदर्भ दिया तथा प्रतिभागियों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश क्षेत्र के पीएमएटीए अध्यक्ष विमल शुक्ल के निरंतर सहयोग का भी उल्लेख किया गया। आयोजन को सफल बनाने में उनके योगदान को रेखांकित करते हुए उद्योग जगत और विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

AIPMA के अध्यक्ष सुनील शाह ने स्वागत भाषण में अतिथियों और प्रतिभागियों का अभिनंदन किया। चेयरमैन अरविंद मेहता ने सरकार से एसोसिएशन की अपेक्षाओं और उद्योग के समक्ष मौजूद प्रमुख विषयों पर प्रकाश डाला, जबकि सेमिनार चेयरमैन मनीष ढेठिया ने एसोसिएशन की दिशा, नीतियों और भावी कार्ययोजना से जुड़े विषयों को विस्तार से प्रस्तुत किया।

इसके बाद विभिन्न वक्ताओं ने पूर्व निर्धारित विषयों पर अपने विचार रखे। चर्चा में प्लास्टिक उद्योग की वर्तमान स्थिति, भविष्य की संभावनाओं, तकनीकी प्रगति, निर्यात विस्तार और उद्योग के लिए उपलब्ध सरकारी अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने बदलती वैश्विक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप भारतीय प्लास्टिक उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में संभावित कदमों पर भी मंथन किया।

गोष्ठी का उद्घाटन सत्र राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष के साथ संपन्न हुआ। आयोजन ने एक ओर प्लास्टिक उद्योग की आर्थिक उपयोगिता को रेखांकित किया, वहीं दूसरी ओर उद्योग, सरकार और एमएसएमई क्षेत्र के बीच समन्वित प्रयासों के माध्यम से भारत की औद्योगिक क्षमता को नई गति देने की आवश्यकता को भी प्रमुखता से सामने रखा।

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