
राम नाम का सहारा लेकर राजनीति कर रही सपा—योगी आदित्यनाथ
शिक्षक मतदाता संवाद में अखिलेश यादव पर मुख्यमंत्री का तीखा प्रहार; पीडीए, परिवारवाद और पूर्ववर्ती सरकारों की शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल। शिक्षक कल्याण, पेंशन, भर्ती और विद्यालयों के कायाकल्प का भी किया उल्लेख।
दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।
राम मंदिर, पीडीए और परिवारवाद के मुद्दों पर मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि सपा राम नाम का सहारा लेकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है। सोमवार को गोरखपुर में आयोजित शिक्षक मतदाता संवाद में मुख्यमंत्री ने विपक्ष की राजनीति को उसके अतीत के निर्णयों की कसौटी पर परखने की चुनौती दी। उनके संबोधन में शिक्षक हितों की चर्चा के साथ सपा की राजनीतिक विचारधारा, परिवारवाद और पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यशैली पर भी तीखे सवाल उठे।
मुख्यमंत्री ने सपा के पीडीए नारे और परिवारवाद पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के सामाजिक प्रतिनिधित्व संबंधी दावों और उसके राजनीतिक आचरण में विरोधाभास है। राम मंदिर आंदोलन तथा रामभक्तों पर गोली चलाए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने सपा की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उनके इन आरोपों पर सपा का पक्ष कार्यक्रम से संबंधित उपलब्ध विवरण में शामिल नहीं है।
शिक्षा और सपा नदी के दो किनारे—योगी
शिक्षा व्यवस्था पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी और शिक्षा नदी के दो ऐसे किनारे हैं, जो कभी एक नहीं हो सकते। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में नकल, जर्जर विद्यालय भवनों और अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि वर्तमान सरकार ने विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं, भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और शिक्षक कल्याण को प्राथमिकता दी है।
शिक्षक की भूमिका को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए मुख्यमंत्री ने गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, अनुशासन और संस्कार विकसित करने वाला मार्गदर्शक है। इसी क्रम में उन्होंने महर्षि वशिष्ठ, महर्षि संदीपन और आचार्य चाणक्य का उल्लेख करते हुए शिक्षक के सामाजिक महत्व को रेखांकित किया।
गोरखपुर के महंत दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित संवाद का प्रमुख उद्देश्य गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में मतदाताओं से संपर्क करना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री त्रिपाठी लंबे समय से शिक्षक समाज की समस्याओं को विधान परिषद में उठाते रहे हैं। उन्होंने शिक्षक मतदाताओं से 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में उनके समर्थन में मतदान की अपील की।
पेंशन, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानदेय पर सरकार का पक्ष
शिक्षक कल्याण की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सुरक्षा, कैशलेस उपचार और बीमा सुविधाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा की व्यवस्था की गई है। उन्होंने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि का भी हवाला दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि शिक्षा मित्रों का मानदेय पहले तीन हजार रुपये से बढ़ाकर दस हजार और फिर अठारह हजार रुपये किया गया, जबकि अनुदेशकों का मानदेय नौ हजार से बढ़ाकर सत्रह हजार रुपये किए जाने का उल्लेख किया।
विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में भवनों तथा बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर प्रयोगशालाओं और डिजिटल पुस्तकालयों के विस्तार को भी उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
पेंशन व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने नई पेंशन योजना को लेकर पूर्ववर्ती सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 के बाद कर्मचारियों के खाते खोलने और उनमें धनराशि जमा कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया तथा इसके लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई गई। भर्ती प्रक्रिया पर उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों में भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कहा कि नियुक्तियां योग्यता और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है।
पीडीए और परिवारवाद पर सियासी वार
मुख्यमंत्री ने सपा की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी की राजनीति में परिवार और चुनिंदा प्रभावशाली लोगों के हितों को प्रमुखता मिलती रही है। राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में भी उन्होंने पार्टी के निर्णयों पर प्रश्न उठाए। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों के नारों और वास्तविक आचरण के बीच सामंजस्य होना चाहिए।
कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वर्तमान सरकार ने सुरक्षा, निवेश और विकास परियोजनाओं को गति दी है। उन्होंने प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए किए जा रहे कार्यों को भी सरकार की उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया।
शिक्षक प्रतिनिधित्व के लिए ध्रुव त्रिपाठी के समर्थन की अपील
शिक्षक प्रतिनिधित्व की परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री ओम प्रकाश शर्मा, स्वर्गीय श्री पंचानन राय और स्वर्गीय डॉ. वाई.डी. सिंह के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को प्राथमिक विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक प्रभावी ढंग से सदन में उठाया जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी को समर्थन देने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और भाजपा पदाधिकारियों से शिक्षक मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही, कारागार मंत्री श्री दारा सिंह चौहान, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर सिंह, ग्राम विकास राज्य मंत्री श्रीमती विजय लक्ष्मी गौतम, अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री श्री दानिश आजाद अंसारी, सांसद श्री रवि किशन शुक्ल, श्री जगदंबिका पाल और श्री विजय कुमार दुबे सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री अभिजात मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री विनोद राय, विधान परिषद सदस्य एवं प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कामेश्वर सिंह और श्री रमेश सिंह, गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव तथा माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री अवधेश सिंह सहित भाजपा पदाधिकारी और शिक्षक-शिक्षिकाएं भी कार्यक्रम में शामिल हुए।