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सत्ता के शिखर पर पहुंचकर संस्कृति की शरण—डॉ. नीरज सिंह ने जन्मदिवस पर रचा 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का अनुपम अध्याय

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सत्ता के शिखर पर पहुंचकर संस्कृति की शरण—डॉ. नीरज सिंह ने जन्मदिवस पर रचा 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का अनुपम अध्याय

पद और प्रतिष्ठा के बीच वैदिक संस्कार का संदेश; 24 ऋषियों एवं विदुषी ऋषिकाओं के नाम पर सजे यज्ञकुण्डों से सामाजिक समरसता, राष्ट्रकल्याण और लोकमंगल का संकल्प

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दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। राजनीति में पद प्राप्त करना जितना महत्वपूर्ण माना जाता है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण यह होता है कि उस पद के बाद सार्वजनिक जीवन की दिशा किस ओर जाती है। आज जब सत्ता, प्रतिष्ठा और आधुनिक जीवनशैली अक्सर व्यक्ति को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर ले जाती दिखाई देती है, ऐसे समय में भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नीरज सिंह के जन्मदिवस पर आयोजित 24 कुण्डीय सामाजिक समरसता गायत्री महायज्ञ ने एक अलग संदेश प्रस्तुत किया। जन्मदिवस को भव्यता और प्रदर्शन तक सीमित रखने के बजाय उसे वैदिक अनुष्ठान, सेवा, पर्यावरण संरक्षण, गौ-पूजन, रुद्राभिषेक और संत-विप्र सेवा से जोड़ना सार्वजनिक जीवन में संस्कार और उत्तरदायित्व की नई व्याख्या करता दिखाई दिया।

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यह आयोजन केवल अग्निकुण्ड में आहुतियां अर्पित करने तक सीमित नहीं था। गायत्री महायज्ञ भारतीय वैदिक परंपरा में मंत्र, साधना, यज्ञ, आत्मशुद्धि और लोकमंगल की भावना का समन्वित विधान माना जाता है। गायत्री मंत्र को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में प्रज्ञा, सद्बुद्धि और अंतःचेतना के जागरण से जोड़ा गया है। यज्ञ की मूल भावना भी त्याग, समर्पण और व्यापक कल्याण की रही है। ऐसे में जन्मदिवस के अवसर पर सामूहिक गायत्री महायज्ञ का आयोजन व्यक्तिगत उत्सव को सामाजिक और आध्यात्मिक संकल्प में रूपांतरित करने का प्रयास कहा जा सकता है।

इस महायज्ञ की सबसे विशिष्ट विशेषता रही 24 यज्ञकुण्डों का नामकरण। महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास, महर्षि वशिष्ठ, भारद्वाज और विश्वामित्र जैसे महापुरुषों के साथ माता गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा, अपाला और घोषा जैसी विदुषी ऋषिकाओं के नाम यज्ञकुण्डों को प्रदान किए गए। यह नामकरण आयोजन को केवल धार्मिक कर्मकांड से ऊपर उठाकर भारतीय ज्ञान-परंपरा की व्यापकता और सामाजिक समरसता का सांस्कृतिक संदेश देता दिखाई दिया।

यज्ञशाला में ऋषियों और विदुषी ऋषिकाओं को समान श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाना इस तथ्य की ओर भी संकेत करता है कि भारतीय परंपरा में ज्ञान और साधना की धारा अनेक स्वरूपों में प्रवाहित हुई है। सामाजिक समरसता का यह भाव आज के सामाजिक विमर्श में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि जब समाज विभिन्न पहचान और वर्गों के आधार पर संवाद के बजाय विभाजन की ओर बढ़ता है, तब साझा सांस्कृतिक विरासत को सामने रखना एक सकारात्मक पहल हो सकती है।

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अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस दिव्य अनुष्ठान में डॉ. नीरज सिंह ने धर्मपत्नी के साथ मुख्य यजमान के रूप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन किया और पूर्णाहुति अर्पित की। इस अवसर पर राष्ट्रकल्याण, पर्यावरण संवर्धन, सामाजिक समरसता और जनकल्याण का संकल्प लिया गया। यज्ञ की अग्नि में आहुति के साथ संकल्प का यह भाव ही इस आयोजन को उसके वास्तविक अर्थ से जोड़ता है।

जन्मदिवस के अवसर पर सेवा का क्रम यज्ञशाला से पहले ही प्रारंभ हो चुका था। डॉ. नीरज सिंह ने प्रातः ‘गो फॉर गोमती’ टीम के साथ कुड़ियाघाट पर विशेष स्वच्छता अभियान में सहभागिता की। मां गोमती के तट से अपशिष्ट हटाने, घाट एवं आसपास के पार्क की सफाई में स्वयं श्रमदान करने के साथ उन्होंने सफाईकर्मियों का सम्मान किया। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण भी किया गया। इस प्रकार जन्मदिवस की शुरुआत व्यक्तिगत शुभकामनाओं से नहीं, बल्कि नदी, प्रकृति और श्रम के सम्मान से हुई।

इसके बाद आरोग्यधाम केन्द्र, आईआईएम रोड स्थित वेद माता गायत्री ट्रस्ट परिसर में वैदिक विधि-विधान से गौ-पूजन किया गया। भाजपा लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनन्द द्विवेदी एवं कार्यक्रम संयोजक अभिषेक खरे के साथ डॉ. नीरज सिंह ने गौ-पूजन कर गायों को पौष्टिक भोग अर्पित किया। सावन मास के अवसर पर भगवान भोलेनाथ का वैदिक रुद्राभिषेक किया गया और यज्ञ परिसर में तुलसी के पौधों का रोपण हुआ। उपस्थित संतों एवं विप्रजनों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

कार्यक्रम स्थल पर पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी गई। जन्मदिवस के इस आयोजन में आधुनिक राजनीतिक जीवन, भारतीय सांस्कृतिक चेतना, पर्यावरण और सेवा-भाव को एक साथ जोड़ने का प्रयास स्पष्ट दिखाई दिया।

राजनीतिक दृष्टि से भी इस आयोजन का अपना महत्व है। उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां निरंतर तीव्र हो रही हैं और सार्वजनिक जीवन में प्रत्येक बड़े आयोजन के संदेश को राजनीतिक दृष्टि से पढ़ा जाता है। ऐसे वातावरण में डॉ. नीरज सिंह द्वारा जन्मदिवस को यज्ञ और सेवा से जोड़ना यह संदेश देता है कि राजनीतिक पद केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व का दायित्व भी है।

गायत्री महायज्ञ की आध्यात्मिक परंपरा में यज्ञ को देवपूजन, सामूहिक साधना, त्याग और लोकमंगल की भावना से जोड़ा जाता है। यज्ञ में सहभागी व्यक्ति मंत्रोच्चार और आहुति के माध्यम से अपने भीतर अनुशासन, सकारात्मकता और सेवा-संकल्प को मजबूत करने का प्रयास करता है। यज्ञ के वैज्ञानिक प्रभावों को लेकर किए जाने वाले विशिष्ट दावों को प्रमाण-आधारित अध्ययन की कसौटी पर देखना आवश्यक है, लेकिन इसके सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामूहिक संकल्प के महत्व को भारतीय समाज में लंबे समय से स्वीकार किया जाता रहा है।

दरअसल, यज्ञ की वास्तविक सार्थकता केवल अग्नि में डाली गई सामग्री में नहीं, बल्कि उस भावना में निहित होती है जिसके साथ आहुति दी जाती है। ‘इदं न मम’—यह मेरा नहीं है, त्याग और समर्पण की इसी भावना को यज्ञ-परंपरा का मूल संदेश माना जाता है। यदि सार्वजनिक जीवन का व्यक्ति इसी भावना को अपने आचरण से जोड़ता है तो उसका प्रभाव व्यक्तिगत जीवन से आगे समाज तक पहुंच सकता है।

यही इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष भी रहा। जन्मदिवस पर स्वयं के लिए कुछ मांगने के बजाय राष्ट्र, समाज, पर्यावरण और लोककल्याण के लिए संकल्प लेना उस वैचारिक परंपरा को सामने लाता है जिसमें व्यक्तिगत उपलब्धि का उत्सव सामूहिक कल्याण की कामना के साथ मनाया जाता है। डॉ. नीरज सिंह के इस प्रयास को इसी दृष्टि से संस्कृति और सेवा के समन्वय की पहल के रूप में देखा जा सकता है।

महायज्ञ में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रदेश महामंत्री संजय राय, विधायक डॉ. नीरज बोरा, विधायक ओ.पी. श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य अवनीश सिंह पटेल, महानगर महामंत्री टिंकू सोनकर, घनश्याम दास अग्रवाल, प्रवीण सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

गोमती नगर स्थित आवास पर भी एमएलसी मुकेश शर्मा, विधायक डॉ. नीरज बोरा, ओ.पी. श्रीवास्तव, महापौर सुषमा खर्कवाल, प्रवीण गर्ग, शैलेंद्र सिंह शैलू सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारियों, नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर डॉ. नीरज सिंह को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं और उनके दीर्घायु एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राजनीति में किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद से नहीं बनती; उस पद के बाद उसके आचरण, प्राथमिकताओं और समाज के प्रति उसके संदेश से बनती है। डॉ. नीरज सिंह के जन्मदिवस पर 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, गोमती स्वच्छता अभियान, पौधारोपण, गौ-पूजन, रुद्राभिषेक और संत सेवा को एक सूत्र में पिरोना इसी व्यापक दृष्टिकोण का संकेत देता है।

आज के दौर में जब पद और प्रतिष्ठा के साथ जीवनशैली में तीव्र परिवर्तन को आधुनिकता का पर्याय समझ लिया जाता है, तब अपनी सांस्कृतिक जड़ों के साथ सार्वजनिक रूप से खड़े होना अपने आप में एक अलग संदेश देता है। पश्चिम की नकल से आधुनिक बनने के बजाय अपनी परंपरा में निहित श्रेष्ठ मूल्यों को आधुनिक सार्वजनिक जीवन से जोड़ना ही भारतीयता का अधिक सार्थक स्वरूप हो सकता है।

डॉ. नीरज सिंह के जन्मदिवस का यह आयोजन अंततः इसी प्रश्न को समाज के सामने छोड़ता है—राजनीति व्यक्ति को कितना बड़ा बनाती है, यह महत्वपूर्ण है; लेकिन व्यक्ति राजनीति को कितना संस्कारित बनाता है, शायद उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। 24 कुण्डों की अग्नि में दी गई आहुतियों से उठता धुआं भले कुछ समय बाद विलीन हो जाए, लेकिन यदि उसके साथ लिया गया सामाजिक समरसता, सेवा और लोकमंगल का संकल्प जनमानस में स्थायी स्थान बना ले, तो वही किसी भी यज्ञ की सबसे बड़ी पूर्णाहुति होगी।

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