दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ। विकासनगर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में CSIR-CMAP के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक शर्मा द्वारा संचालित ध्यान-योग अभियान का शुभारंभ आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर जन उद्घोष सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं "लखनऊ के योद्धा" के रूप में विख्यात वरिष्ठ अधिवक्ता कुलदीप तिवारी का राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह तथा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप बाजपेई ने पुष्पमालाओं से भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया।

समारोह को संबोधित करते हुए कुलदीप तिवारी ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मजागरण, चरित्र निर्माण और राष्ट्रचेतना का महान विज्ञान है। ध्यान मनुष्य को मानसिक अशांति, तनाव और नकारात्मकता से मुक्त कर आत्मबल, विवेक और आत्मविश्वास प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में योग और ध्यान का विस्तार होता है, वहाँ नैतिकता, अनुशासन, समरसता और राष्ट्रीय चेतना स्वतः विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को युद्ध नहीं, योग का संदेश दिया है। हमारी सनातन परंपरा का मूल आधार आत्मसंयम, साधना और लोककल्याण है। यदि भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करना है तो योग और ध्यान को जन-जन तक पहुँचाना होगा। उन्होंने कहा कि आज विज्ञान भी योग और ध्यान के मानसिक एवं शारीरिक लाभों को स्वीकार कर चुका है, इसलिए आधुनिक विज्ञान और भारतीय अध्यात्म का समन्वय मानवता के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनेगा।
कुलदीप तिवारी ने CSIR-CMAP के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक शर्मा की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज में योग और ध्यान का व्यापक प्रसार समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इससे केवल व्यक्ति का ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र का भी सर्वांगीण विकास संभव है।
राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति का वास्तविक स्वर योग, साधना और आत्मानुशासन है। ऐसे अभियान समाज को नई दिशा देने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेंगे।
डॉ. प्रदीप बाजपेई ने कहा कि ध्यान और योग व्यक्ति की कार्यक्षमता, सकारात्मक सोच तथा मानसिक संतुलन को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने इस जनजागरण अभियान को समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसके व्यापक विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने संकल्प लिया कि योग और ध्यान के इस अभियान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाकर स्वस्थ, संस्कारित, आत्मबल से संपन्न और राष्ट्रनिष्ठ भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दिया जाएगा।