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आत्मनिर्भर भारत का प्रचंड संकल्प: सुधांशु त्रिवेदी

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Dainik India News

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आत्मनिर्भर भारत का प्रचंड संकल्प: सुधांशु त्रिवेदी

अमृतकाल राष्ट्र-निर्माण का निर्णायक महापर्व, विपक्ष ‘भ्रम-शिल्प’ में आकंठ निमग्न

https://youtu.be/wiyp7gCT2qk?si=K_32wn02OG4LdTkP

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी लखनऊ महानगर द्वारा सहकारिता भवन में आयोजित आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत सम्पन्न प्रोफेशनल सम्मेलन में राज्यसभा सांसद तथा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राष्ट्र-निर्माण, स्वावलम्बन, सांस्कृतिक आत्मगौरव और विपक्षी राजनीति के दुराशयपूर्ण भ्रम-प्रसारण पर अत्यंत प्रखर, तर्कसंगत एवं तथ्यसमर्थित उद्बोधन दिया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घोषित अमृतकाल भारत की नवधारित विकास-धारा का निर्णायक महायुग है, जिसमें राष्ट्र को 2047 तक एक पूर्ण विकसित, आत्मनिर्भर, सशक्त और वैश्विक पटल पर अग्रगण्य शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित करना हमारा अविचलित संकल्प है।


त्रिवेदी ने कहा कि गुलामी की मानसिकता का परित्याग, अपनी सांस्कृतिक-विरासत पर अटूट गर्व तथा कर्तव्य-केंद्रित सामूहिकता—ये तीनों तत्व आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला हैं। “जब तक कोई राष्ट्र बाहरी शक्तियों पर आश्रित रहता है, तब तक उसका स्वप्न भी पराधीनता की छाया में कैद रहता है। स्वावलम्बन ही राष्ट्रीय उत्थान का एकमात्र अवलंब है।”

उन्होंने कहा कि चाहे राष्ट्र छोटा हो या विशाल, यदि वह किसी भी आवश्यक वस्तु या प्रौद्योगिकी के लिए बाहरी देशों पर अवलंबित है तो वह सदैव अनिश्चितता एवं दबावों से ग्रस्त रहता है।

अमेरिका के H-1B वीजा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व की महाशक्ति भी भारतीय कौशल पर निर्भर है।
“अमेरिका प्रतिवर्ष जो लगभग एक लाख उच्च-कौशल वीजा जारी करता है, उनमें करीब 70 प्रतिशत भारतीयों को प्राप्त होते हैं। यह इस बात का द्योतक है कि भारतीय प्रतिभा अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित और प्रभावित कर रही है। एक समय कहा जाता था कि विदेशी कंपनियाँ भारत आकर रोजगार छीन लेंगी; परंतु आज अमेरिकी चिंतन यह है कि भारतीय वहां जाकर उनकी नौकरियों में भी प्रतिस्पर्धा में अग्रस्थान प्राप्त कर रहे हैं—यह भारतीय सामर्थ्य का अनुपम उद्घोष है।”

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत रक्षा-स्वावलम्बन में ऐतिहासिक प्रगति कर चुका है। “भारत ने ब्रह्मोस सहित अधिकांश स्वदेशी आयुध और रणनीतिक प्रौद्योगिकी का उपयोग किया, जबकी पाकिस्तान पूर्णतः पराश्रित रहा। यह अंतर केवल तकनीकी क्षमता का नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की प्राणशक्ति का अंतर है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक या सामरिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि ऊर्जा, खाद्यान्न, वैचारिक दृढ़ता और सामाजिक आत्मविश्वास तक विस्तृत है। “जब तक अपने भीतर आत्मविश्वास का उदय न हो, तब तक आत्मनिर्भरता केवल नारा रह जाती है।”

उन्होंने स्मरण कराया कि 1977 तक अखिल भारतीय सेवाओं की परीक्षाएँ अंग्रेज़ी में बाध्यतामूलक थीं।
“अटल जी की सरकार ने इस बाध्यता का उन्मूलन किया तथा मोदी सरकार ने इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा को भी 8–9 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराकर भाषाई दुष्प्राबल्य को समाप्त किया। आज भारतीय भाषा, भारतीय पोशाक और भारतीयता को हीन-दृष्टि से देखे जाने का कालखंड समाप्त हो चुका है।”

उन्होंने कहा कि दीपावली जैसे सांस्कृतिक पर्वों में भी स्वदेशी चेतना का पुनर्जागरण हुआ है।
“ऊर्जा, सेमीकंडक्टर चिप, डिजिटल भुगतान, मेडिकल तकनीक, खाद्यान्न प्रबंधन से लेकर रक्षा तक—भारत तीव्र वेग से आत्मनिर्भरता की ऊर्ध्वगति पर अग्रसर है। यह प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता का प्रत्यक्ष प्रतिफल है।”

अपने उद्बोधन का समापन उन्होंने अत्यंत अर्थगर्भित पंक्तियों से किया—
“गौरवशाली था भूत, भविष्य भी महान है,
यदि आप सँभालें उसे—जो वर्तमान है।”

कार्यक्रम से पूर्व मीडिया को संबोधित करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष पर तीक्ष्ण प्रहार किया और कहा कि
“जब ईवीएम का मिथ्या आरोप ध्वस्त हो गया तो विपक्ष मतदाता सूची पर भ्रम फैलाने लगा। इसका तात्पर्य है कि वे स्वीकार कर चुके हैं कि ईवीएम हैकिंग का आरोप कपटपूर्ण संरचना था। विश्वास रखिए—कुछ समय बाद वे मतदाता सूची वाला आरोप भी स्वयं निराधार घोषित कर देंगे।”

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पिछले दस वर्षों में राष्ट्र की प्रत्येक महत्वपूर्ण व्यवस्था पर संदेह का विषवर्षण किया
“राफेल पर भ्रम, सर्जिकल स्ट्राइक पर भ्रम, बालाकोट एयरस्ट्राइक पर भ्रम, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर नौसैनिक विमानों के विषय में भ्रम, एलआईसी पर अनर्गल आरोप, एसबीआई पर असत्य आरोप, सेबी को गलत सिद्ध करने का प्रयास—परंतु हर बार सत्य विजयी हुआ और विपक्ष की कुचेष्टा ध्वस्त हुई।”

उन्होंने कहा कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री तक ने कोविड वैक्सीन को ‘बीजेपी वैक्सीन’ कहा—यह विज्ञानपरक सच्चाइयों का राजनीतिक अवमूल्यन था।
“राम मंदिर के मुहूर्त पर भी इन्होंने नितांत असत्य और भ्रामक कथन किए, परंतु सत्य अंततः प्रतापी होता है।”

बांग्लादेशी घुसपैठ के विषय पर उन्होंने स्मरण कराया कि “ममता बनर्जी ने 2005 में संसद में 14 मिनट में 22 बार घुसपैठियों का मुद्दा उठाया था और आज वे ही जांच से बचना चाहती हैं। यूपीए शासनकाल में भारी संख्या में घुसपैठिए आए, जिनमें से अनेक ने स्वयं स्वीकार किया कि वे भारत में कई बार मतदान कर चुके हैं।”

उन्होंने कहा—
“एक ओर हम हैं—धर्मध्वजा के संरक्षक,
दूसरी ओर विपक्ष है—घुसपैठियों का संरक्षक।”

दिल्ली में प्रदूषण पर आयोजित कार्यक्रम में नक्सलियों के गुणगान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यही तथाकथित सेकुलरवाद का वास्तविक, विकृत रूप है।

सम्मेलन के अंत में अभियान प्रदेश संयोजक बृज बहादुर, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी तथा कार्यक्रम संयोजक अभिषेक खरे ने सुधांशु त्रिवेदी को आत्मनिर्भर भारत स्मृति-चिन्ह प्रदान किया।
मीडिया प्रभारी प्रवीण गर्ग ने बताया कि ‘आत्मनिर्भर भारत ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में मनोनीत
डॉ. संदीप गुप्ता,मणिपाल पब्लिक कॉलेज की प्राचार्य स्मिता सिंह,और डॉ. अभिषेक बंसल को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में व्यापारी नेता संदीप बंसल, महामंत्री राम अवतार कनौजिया, घनश्याम अग्रवाल, टिंकू सोनकर, आर.के. चारी, के.के. मिश्रा, मयंक बाजपाई, दीपा मिश्रा सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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