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डिफॉल्टर आवंटियों को बड़ी राहत : उत्तर प्रदेश में ‘एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस)–2026’ को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति

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Dainik India News

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बिना दण्ड ब्याज के मिलेगा बकाया चुकाने का अवसर, तीन माह तक कर सकेंगे आवेदन


दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।प्रदेश में आवासीय एवं वाणिज्यिक सम्पत्तियों से जुड़े हजारों डिफॉल्टर आवंटियों को राहत प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, विकास प्राधिकरणों तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस)–2026 लागू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। यह निर्णय उन आवंटियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो किसी कारणवश बकाया धनराशि का समय पर भुगतान नहीं कर सके और अब डिफॉल्टर की श्रेणी में आ गए हैं।


सरकार का मानना है कि वर्षों से लंबित बकाया राशि और उससे उत्पन्न प्रशासनिक जटिलताओं को समाप्त करने के लिए यह योजना एक व्यवहारिक और मानवीय समाधान सिद्ध होगी। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने आवास एवं विकास परिषद, विभिन्न विकास प्राधिकरणों तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के अधीन आवंटित सम्पत्तियों के डिफॉल्टरों को एक अवसर प्रदान करते हुए बकाया निस्तारण का मार्ग प्रशस्त किया है।
मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत इस योजना के अंतर्गत एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान यह किया गया है कि ओटीएस योजना सभी प्रकार की सम्पत्तियों पर समान रूप से लागू होगी। अर्थात् चाहे वह आवासीय भूखण्ड हो, वाणिज्यिक सम्पत्ति हो अथवा अन्य किसी श्रेणी की संपत्ति—सभी प्रकार के डिफॉल्टर आवंटी इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इतना ही नहीं, जिन प्रकरणों में मानचित्र स्वीकृति के सापेक्ष बकाया धनराशि लंबित है, उन मामलों को भी इस योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया गया है।


योजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसके अंतर्गत डिफॉल्टर आवंटियों को आर्थिक राहत प्रदान करते हुए दण्ड ब्याज (पेनल इंटरेस्ट) को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। अर्थात् आवंटियों से केवल साधारण ब्याज ही लिया जाएगा। इससे उन नागरिकों को विशेष राहत मिलेगी, जिन पर लंबे समय से बढ़ते हुए दण्ड ब्याज के कारण बकाया राशि अत्यधिक हो गई थी और भुगतान करना लगभग असंभव प्रतीत होने लगा था।
योजना के क्रियान्वयन की समयसीमा भी स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है, जिससे आवंटियों को सुव्यवस्थित ढंग से आवेदन करने का अवसर मिल सके। ओटीएस योजना के अंतर्गत आवेदन करने के लिए तीन माह की अवधि निर्धारित की गई है। इसके पश्चात प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं निस्तारण भी अगले तीन माह की निर्धारित अवधि में किया जाएगा, ताकि आवेदकों को अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े।


राज्य सरकार का यह भी मानना है कि इस योजना से केवल आवंटियों को राहत ही नहीं मिलेगी, बल्कि विभिन्न प्राधिकरणों और परिषदों की वित्तीय स्थिति भी सुदृढ़ होगी। वर्षों से लंबित बकाया धनराशि की वसूली होने से विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और नगरीय विकास से जुड़े अनेक कार्यों को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।


मंत्रिपरिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि योजना के क्रियान्वयन के दौरान भविष्य में किसी प्रकार के संशोधन अथवा परिमार्जन की आवश्यकता अनुभव होती है, तो इस संबंध में निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को अधिकृत किया गया है। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया गया है कि योजना को परिस्थितियों के अनुरूप लचीले और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।


विशेषज्ञों का मत है कि एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस)–2026 प्रदेश के नगरीय विकास तंत्र में एक नई आशा का संचार करेगी। इससे जहां एक ओर डिफॉल्टर आवंटियों को आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर प्राधिकरणों को लंबित राजस्व प्राप्त होगा। परिणामस्वरूप, विकास कार्यों की गति तेज होगी और प्रदेश के नगरीय अधोसंरचना विकास को एक नई दिशा प्राप्त होगी।

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