"यह केवल एक प्रतिमा की वापसी नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और सनातन आस्था की पुनर्प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक क्षण है" — कुलदीप तिवारी

दैनिक इंडिया न्यूज़ नई दिल्ली।भारतीय सांस्कृतिक चेतना के इतिहास में एक संभावित स्वर्णिम अध्याय जुड़ने की दिशा में अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में पुनः प्रतिष्ठापित की जाने वाली माता वाग्देवी (माँ सरस्वती) की मूल प्रतिमा को लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूज़ियम से भारत वापस लाने की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुँचती दिखाई दे रही है। केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल द्वारा दिए गए संकेतों के अनुसार प्रतिमा का आवश्यक विधिक प्रमाणीकरण (Legal Verification) पूर्ण हो चुका है। इस प्रक्रिया ने पुनः यह स्थापित किया है कि ब्रिटिश म्यूज़ियम में संरक्षित प्रतिमा वही मूल वाग्देवी प्रतिमा है, जिसका ऐतिहासिक संबंध भोजशाला से रहा है।
इस बहुचर्चित प्रकरण के प्रमुख याचिकाकर्ता तथा जन उद्घोष सेवा संस्थान के संस्थापक कुलदीप तिवारी ने बताया कि भारत सरकार अब प्रतिमा की स्वदेश-वापसी के लिए आवश्यक विधिक, कूटनीतिक एवं प्रशासनिक औपचारिकताओं को तीव्र गति से आगे बढ़ा रही है। उनके अनुसार विधिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के बाद इस ऐतिहासिक धरोहर की भारत वापसी की संभावना पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सशक्त हुई है। यह समाचार देशभर के श्रद्धालुओं, इतिहासकारों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के पक्षधर नागरिकों के लिए गहन उत्साह का विषय बन गया है।
कुलदीप तिवारी ने कहा कि भोजशाला की मूल वाग्देवी प्रतिमा की स्वदेश-वापसी केवल एक पुरातात्त्विक उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता, सनातन परंपरा और ऐतिहासिक न्याय की पुनर्प्रतिष्ठा का प्रतीक बनेगी। उन्होंने कहा कि दशकों से चल रहे संघर्ष, विधिक प्रयासों और जन-आंदोलन का उद्देश्य यही रहा है कि माँ वाग्देवी पुनः अपनी मूल भूमि पर विराजमान हों। अब परिस्थितियाँ इस ऐतिहासिक आकांक्षा की पूर्ति की दिशा में अनुकूल होती प्रतीत हो रही हैं।
उधर, सर्वोच्च न्यायालय में भोजशाला प्रकरण पर बुधवार को प्रस्तावित सुनवाई न्यायालय की अन्य संवैधानिक वादों में व्यस्तता के कारण संपन्न नहीं हो सकी। कुलदीप तिवारी स्वयं सर्वोच्च न्यायालय में उपस्थित रहे और उन्होंने बताया कि प्रकरण के गुरुवार को पुनः सूचीबद्ध होने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगामी सुनवाई के दौरान भी न्यायालय में उपस्थित रहकर संपूर्ण कार्यवाही पर सतत दृष्टि बनाए रखेंगे।
कुलदीप तिवारी ने विश्वास व्यक्त किया कि एक ओर न्यायिक प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर है, वहीं दूसरी ओर माता वाग्देवी की मूल प्रतिमा की भारत वापसी के प्रयासों में आई गति भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और ऐतिहासिक न्याय की दिशा में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रतिमा की वापसी का प्रश्न नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, सांस्कृतिक स्मृति और सनातन आस्था के गौरव की पुनर्प्रतिष्ठा का विषय है।