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प्रभुपाद महाराज ने स्वतंत्रता दिवस में दिया संदेश – गीता और रामायण से जुड़े बिना राष्ट्र की सुरक्षा अधूरी

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Dainik India News

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प्रभुपाद महाराज ने स्वतंत्रता दिवस में दिया संदेश – गीता और रामायण से जुड़े बिना राष्ट्र की सुरक्षा अधूरी

लखनऊ के महानगर ई-पार्क में स्वतंत्रता दिवस पर विशेष प्रभात फेरी

गीता का श्लोक सुनाकर बलिदान और कर्तव्य को बताया राष्ट्र रक्षा की नींव

दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ के महानगर विस्तार स्थित ई-पार्क में आयोजित प्रभात फेरी में ISKCON मंदिर के प्रमुख प्रभुपाद अपरिमेय श्याम दास महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस प्रभात फेरी में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिज्ञ और नागरिक शामिल हुए।

प्रभुपाद महाराज ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि “आज जब पड़ोसी देश जैसे बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति चिंता का विषय है, तब हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को गीता, रामायण और महाभारत जैसे शास्त्रों से जोड़ना होगा। यह केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और चरित्र निर्माण की आधारशिला हैं।”

उन्होंने इस दौरान भगवद्गीता के 2वें अध्याय का एक श्लोक सुनाया, जो उपस्थित जनसमूह को राष्ट्रधर्म और बलिदान की ओर प्रेरित कर गया—

"हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं, जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः॥" (गीता 2.37)

अर्थात – यदि रणभूमि में मारे जाओगे तो स्वर्ग को प्राप्त करोगे और यदि विजयी हुए तो पृथ्वी का राज्य भोगोगे। इसलिए हे अर्जुन! निश्चय करके युद्ध के लिए खड़े हो जाओ।

प्रभुपाद महाराज ने कहा कि इस श्लोक का संदेश हमें यह सिखाता है कि राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष करना ही सबसे बड़ा कर्तव्य है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे गीता को केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि विद्वान आचार्यों से उसका वास्तविक ज्ञान प्राप्त करें।

गीता से जुड़े बिना अधूरी है राष्ट्रभक्ति

प्रभात फेरी में उपस्थित नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रभुपाद महाराज के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि गीता, रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ हमारे जीवन को दिशा देते हैं। इन्हें विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल करना समय की मांग है।

समाज में फैला देशभक्ति का उत्साह

प्रभात फेरी के दौरान “भारत माता की जय” और “हर घर गीता” जैसे नारे गूंजे। उपस्थित लोगों ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि जब गीता का संदेश समाज में गूंजेगा, तभी सच्ची आज़ादी का अर्थ पूरा होगा।

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