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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की समीक्षा

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Dainik India News

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की समीक्षा
  1. मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों पर की चर्चा
  2. मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित शिक्षा सुधारों और योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया
  3. कृषि शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं की घोषणा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज अपने सरकारी आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में बेसिक, माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक, व्यावसायिक, कृषि और चिकित्सा शिक्षा विभागों की प्रगति पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ज्ञान, कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा पर विशेष ध्यान देती है। युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और करिकुलम तैयार करते समय इन पहलुओं को केंद्र में रखा जाना चाहिए। इस नीति का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए गुणवत्तापूर्ण, सार्वभौमिक और रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करना है। उत्तर प्रदेश इस नीति को लागू करने में अग्रणी राज्य रहा है, और पिछले तीन वर्षों में इसके माध्यम से सकल नामांकन दर में वृद्धि तथा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।

प्रदेश ने "एक मण्डल-एक विश्वविद्यालय" के लक्ष्य को पूरा कर लिया है और अब "एक जनपद-एक विश्वविद्यालय" की दिशा में बढ़ रहा है। वर्तमान में उच्च शिक्षण संस्थानों में सकल नामांकन दर लगभग 25 प्रतिशत है, जिसे अगले 10 वर्षों में 50 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के तहत स्नातक और डिप्लोमा उत्तीर्ण युवाओं को औद्योगिक संस्थानों में अप्रेंटिसशिप की सुविधा दी जा रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में 53 हजार से अधिक युवाओं ने इस योजना से लाभ उठाया है और इस वर्ष अब तक 11 हजार अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से लगभग 2800 युवा अप्रेंटिसशिप कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में राहुल सांकृत्यायन के नाम पर शोध पीठ की स्थापना की भी घोषणा की, जो युवाओं के लिए शोध और अध्ययन का उचित मंच प्रदान करेगी।

इसके अतिरिक्त, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) प्लेटफॉर्म पर सभी छात्रों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा और छात्रों के क्रेडिट हस्तांतरण इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रबंधित किए जाएंगे। इस प्लेटफॉर्म के बारे में छात्रों को जागरूक करने की आवश्यकता है।

कृषि शिक्षा, शोध और अनुसंधान में अपार अवसर हैं। प्रदेश के चार कृषि विश्वविद्यालयों में इन्क्यूबेशन सेंटर और सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। कृषि शिक्षण संस्थानों के विनियमन के लिए उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) जैसी संस्था की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान देने की बात की और 88,000 आंगनबाड़ी केन्द्रों को 'बाल वाटिका' के रूप में नए स्वरूप देने की दिशा में काम करने की सलाह दी। कक्षा 1 और 2 में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू कर दिया गया है और नए बच्चों को स्कूल से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय और मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों के निर्माण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की बात की। इन विद्यालयों को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुसज्जित किया जाएगा।

माध्यमिक विद्यालयों में पाठ्यक्रम के भार को कम करने, स्थानीय भाषाओं में पाठ्यक्रम तैयार करने और बहुभाषी शिक्षा पर जोर देने की आवश्यकता की बात भी की गई।

समग्र शिक्षा और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक प्रशिक्षण की सुविधा जल्द उपलब्ध कराई जाएगी, और नए ट्रेड के निर्धारण पर ध्यान दिया जाएगा।

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