ब्रेकिंग न्यूज़
*“आत्मप्रवंचना के शिकार बनते लोग: आग से अधिक भयावह वह झूठ, जो भीतर जल रहा है”* | संदिग्ध परिस्थितियों में कमरे में फंदे से लटका मिला किशोर का शव, क्षेत्र में सनसनी | रक्षामंत्री के नेतृत्व में लखनऊ विकास की रफ्तार को मिली नई ऊर्जा, राष्ट्रीय सनातन महासंघ ने जताया आभार | कलश यात्रा: श्रद्धा का ज्वार, जिसने नगर-हृदय को बना दिया एक जीवंत तीर्थ | “स्मृतियों की साधना और संकल्प का संगम”: इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गूंजा ‘स्मृति नाद’ | ऋषि-परंपरा का अखंड प्रवाह : महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि के प्रवचनों में राष्ट्रधर्म का दिव्य आलोक* | वित्तीय वर्ष 2026–27 के प्रारंभिक माह में लोहिया नगर बना जन-सेवा का प्रखर केंद्र, पार्षद राकेश मिश्रा के नेतृत्व में भव्य स्वास्थ्य महाअभियान का आयोजन | निषाद राज जयंती पर गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश, मंत्री ए.के. शर्मा ने केवट–राम प्रसंग से जोड़ी सांस्कृतिक चेतना | *“आत्मप्रवंचना के शिकार बनते लोग: आग से अधिक भयावह वह झूठ, जो भीतर जल रहा है”* | संदिग्ध परिस्थितियों में कमरे में फंदे से लटका मिला किशोर का शव, क्षेत्र में सनसनी | रक्षामंत्री के नेतृत्व में लखनऊ विकास की रफ्तार को मिली नई ऊर्जा, राष्ट्रीय सनातन महासंघ ने जताया आभार | कलश यात्रा: श्रद्धा का ज्वार, जिसने नगर-हृदय को बना दिया एक जीवंत तीर्थ | “स्मृतियों की साधना और संकल्प का संगम”: इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गूंजा ‘स्मृति नाद’ | ऋषि-परंपरा का अखंड प्रवाह : महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि के प्रवचनों में राष्ट्रधर्म का दिव्य आलोक* | वित्तीय वर्ष 2026–27 के प्रारंभिक माह में लोहिया नगर बना जन-सेवा का प्रखर केंद्र, पार्षद राकेश मिश्रा के नेतृत्व में भव्य स्वास्थ्य महाअभियान का आयोजन | निषाद राज जयंती पर गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश, मंत्री ए.के. शर्मा ने केवट–राम प्रसंग से जोड़ी सांस्कृतिक चेतना |
उत्तर प्रदेश सरकार English

“वायुपुत्र की दिव्य वंदना से आलोकित हुआ राष्ट्र: हनुमान भक्ति के महासागर में डूबा जन-जन”

D

Dainik India News

7 views
“वायुपुत्र की दिव्य वंदना से आलोकित हुआ राष्ट्र: हनुमान भक्ति के महासागर में डूबा जन-जन”

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।अत्यंत पावन, आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत और भक्तिभाव की अद्वितीय तरंगों से स्पंदित श्री हनुमान जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने प्रभु श्री हनुमान के श्रीचरणों में उपस्थित होकर दिव्य दर्शन प्राप्त किए। इस अलौकिक क्षण में उन्होंने संकटमोचन, महाबली, अजर-अमर, अष्टसिद्धि-नवनिधि के अधिपति प्रभु हनुमान की अनंत, अनिर्वचनीय एवं अद्भुत महिमा का उत्कट श्रद्धा एवं भाव-विभोर हृदय से गुणगान करते हुए सम्पूर्ण राष्ट्र को मंगलमयी शुभकामनाएँ अर्पित कीं। उनका वक्तव्य केवल शब्दों का संप्रेषण नहीं, बल्कि आस्था की वह प्रज्वलित ज्वाला था, जिसने जनमानस को भक्ति के दिव्य आलोक से अभिसिंचित कर दिया।


अपने ओजस्वी उद्बोधन में उन्होंने कहा कि प्रभु हनुमान केवल पराक्रम और बल के प्रतीक नहीं, बल्कि निष्काम भक्ति, अखंड निष्ठा और अद्वितीय सेवा-भाव के सर्वोच्च प्रतिमान हैं। उनका स्मरण मात्र ही जीवन के घोरतम अंधकार को भी प्रकाशमान कर देता है। उन्होंने रेखांकित किया कि हनुमान जी की उपासना साधक को उस आध्यात्मिक ऊँचाई तक ले जाती है, जहाँ भय, संशय और निराशा स्वतः विलुप्त हो जाते हैं और आत्मबल का दिव्य संचार होता है।
जितेंद्र प्रताप सिंह ने आगे कहा कि प्रभु हनुमान की महिमा अनंत है—वे वीरता के परम शिखर, ज्ञान के अथाह सागर और विनम्रता के सजीव स्वरूप हैं। उनके चरणों में समर्पण ही जीवन की वास्तविक सफलता का मार्ग है। आज के इस दिग्भ्रमित और अशांत युग में, जब मानव मन अनेक प्रकार की व्याधियों और तनावों से ग्रस्त है, तब हनुमान भक्ति एक दिव्य कवच के रूप में साधक की रक्षा करती है। यह भक्ति न केवल मानसिक शांति प्रदान करती है, बल्कि धर्म, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर दृढ़ता से अग्रसर होने की प्रेरणा भी देती है।
उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से आह्वान किया कि वे प्रभु हनुमान के आदर्शों को आत्मसात करें—साहस को जीवन का आधार बनाएं, सेवा को अपना धर्म समझें और विनम्रता को अपना आभूषण। उनका यह संदेश केवल एक औपचारिक शुभकामना नहीं, बल्कि राष्ट्र के आध्यात्मिक उत्थान का उद्घोष है, जो जन-जन के अंतर्मन में भक्ति, ऊर्जा और नवचेतना का संचार कर रहा है।

फोटो गैलरी

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!