ब्रेकिंग न्यूज़
भोजशाला विवाद निर्णायक मोड़ पर, सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत न मिलने पर हिंदू पक्ष उत्साहित | भोजशाला में बड़ी विजय की ओर हिंदू पक्ष, सुप्रीम कोर्ट के रुख से मुस्लिम पक्ष में बढ़ी बेचैनी | मुख्यमंत्री डैशबोर्ड समीक्षा बैठक में सीडीओ सख्त, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनपद की रैंकिंग सुधारने के दिए निर्देश | होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया का जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने किया औचक निरीक्षण, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर दिया विशेष जोर | महाशिवरात्रि : अद्वैत-तत्त्व की परम महानिशा — अभयानंद सरस्वती | भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का सूत्रपात, बाल संस्कारशाला अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान | गुरुसत्ता के प्रति अहर्निश निष्ठा : ब्रह्मविद्या, ऋतंभरा प्रज्ञा और विवेक का सनातन रहस्य - अभयानंद सरस्वती | 'केवल वृक्ष मत लगाइए, वृक्षपालक बनिए' : जितेंद्र प्रताप सिंह | भोजशाला विवाद निर्णायक मोड़ पर, सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत न मिलने पर हिंदू पक्ष उत्साहित | भोजशाला में बड़ी विजय की ओर हिंदू पक्ष, सुप्रीम कोर्ट के रुख से मुस्लिम पक्ष में बढ़ी बेचैनी | मुख्यमंत्री डैशबोर्ड समीक्षा बैठक में सीडीओ सख्त, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनपद की रैंकिंग सुधारने के दिए निर्देश | होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया का जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने किया औचक निरीक्षण, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर दिया विशेष जोर | महाशिवरात्रि : अद्वैत-तत्त्व की परम महानिशा — अभयानंद सरस्वती | भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का सूत्रपात, बाल संस्कारशाला अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान | गुरुसत्ता के प्रति अहर्निश निष्ठा : ब्रह्मविद्या, ऋतंभरा प्रज्ञा और विवेक का सनातन रहस्य - अभयानंद सरस्वती | 'केवल वृक्ष मत लगाइए, वृक्षपालक बनिए' : जितेंद्र प्रताप सिंह |
हाइलाइट न्यूज़
पांच साल बाद लौट आईं ‘मृत’ मां-बेटी: एक OTP ने खोला राज भावुक कर गया सीएम के भावों का संवाद मानसिक स्वास्थ्य: शिक्षा व्यवस्था की अनिवार्य आवश्यकता UP tops in financing the units under PM Employment Generation Plan विद्युत विभाग के विजिलेंस टीम ने घरों में लगी कटिया को पकड़ा बाइक चोरी का मुकदमा दर्ज पीएम की विकसित भारत संकल्प यात्रा की गाड़ी पहुंची महानगर, लाभार्थियों से की चर्चा चंद्रशेखर आजाद ने गयासुद्दीन हैदर कैनाल नाले पर अवैध कब्जे हटाने का विरोध किया पांच साल बाद लौट आईं ‘मृत’ मां-बेटी: एक OTP ने खोला राज भावुक कर गया सीएम के भावों का संवाद मानसिक स्वास्थ्य: शिक्षा व्यवस्था की अनिवार्य आवश्यकता UP tops in financing the units under PM Employment Generation Plan विद्युत विभाग के विजिलेंस टीम ने घरों में लगी कटिया को पकड़ा बाइक चोरी का मुकदमा दर्ज पीएम की विकसित भारत संकल्प यात्रा की गाड़ी पहुंची महानगर, लाभार्थियों से की चर्चा चंद्रशेखर आजाद ने गयासुद्दीन हैदर कैनाल नाले पर अवैध कब्जे हटाने का विरोध किया
उत्तर प्रदेश सरकार English

समग्र एवं सर्वोत्तम स्वास्थ्य का विज्ञान

D

Dainik India News

31 views
समग्र एवं सर्वोत्तम स्वास्थ्य का विज्ञान

स्वास्थ्य — शरीर से आगे चेतना तक

श्याम उपाध्याय दैनिक इंडिया न्यूज़ 30 DEC 2025 लखनऊ।स्वास्थ्य को यदि केवल रोग-मुक्ति की स्थिति मान लिया जाए, तो यह जीवन की विराट संभावना का संकुचन होगा। वास्तविक स्वास्थ्य वह अवस्था है, जहाँ शरीर की जैविक प्रक्रियाएँ, मन की भावनात्मक लय और विचारों की दिशा—तीनों एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि सहयोग में कार्यरत हों। यही समग्र स्वास्थ्य का प्रथम सूत्र है—जीवन को खंडों में नहीं, एक अखंड प्रवाह के रूप में देखना।


आधुनिक चिकित्सा-विज्ञान ने दीर्घकाल तक शरीर को एक यांत्रिक संरचना के रूप में देखा—जहाँ रोग का अर्थ था किसी अंग की विफलता और उपचार का अर्थ उस विफलता की मरम्मत। किंतु आज न्यूरोसाइंस, हार्मोनल रिसर्च और इम्यूनोलॉजी यह स्वीकार करने लगी हैं कि शरीर की अधिकांश विकृतियाँ मानसिक असंतुलन और विचार-प्रवृत्तियों से जन्म लेती हैं। तनाव, भय, असुरक्षा और अतृप्त महत्वाकांक्षा—ये सभी शरीर में ऐसे रासायनिक परिवर्तनों को जन्म देते हैं, जो दीर्घकाल में रोग का रूप धारण कर लेते हैं।


यहीं से सर्वोत्तम स्वास्थ्य की अवधारणा उभरती है। यह केवल रोग से उबरने की स्थिति नहीं, बल्कि उस अवस्था का नाम है जहाँ शरीर अपनी प्राकृतिक बुद्धि के अनुसार स्वयं को संतुलित रखने में सक्षम हो जाता है। जब मनुष्य अपने विचारों को अनुशासित करता है, तो उसका तंत्रिका तंत्र शांत होता है; जब श्वास लयबद्ध होती है, तो मस्तिष्क की अराजकता समाप्त होने लगती है; और जब आहार विवेकपूर्ण होता है, तो कोशिकाएँ अपने कार्य में दक्ष हो जाती हैं।


Holistic Life Mentor की भूमिका यहीं से प्रारंभ होती है—जहाँ व्यक्ति को यह सिखाया जाता है कि स्वास्थ्य कोई बाहरी उत्पाद नहीं, बल्कि आंतरिक व्यवस्था है। जीवन की अव्यवस्था ही रोग का मूल है। अनियमित दिनचर्या, असंतुलित भोजन और अविचारित चिंतन—ये तीनों मिलकर शरीर को उस बिंदु तक ले जाते हैं, जहाँ चिकित्सा केवल अस्थायी समाधान रह जाती है।
यह समझना आवश्यक है कि स्वास्थ्य का वास्तविक संकट शरीर में नहीं, जीवन-दृष्टि में होता है। जब मनुष्य अपने जीवन में मर्यादा खो देता है, तब शरीर उसका मूल्य चुकाता है। समग्र स्वास्थ्य का प्रथम पाठ यही है—स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और सुसंस्कृत विचार एक-दूसरे से पृथक नहीं हैं।


यही बोध इस स्तंभ का आधार है। क्योंकि जब तक स्वास्थ्य को चेतना से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक उपचार अधूरा ही रहेगा।

फोटो गैलरी

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!