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समर्पण दिवस: दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में भारत की दिशा-डॉ महेंद्र सिंह

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Dainik India News

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समर्पण दिवस: दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में भारत की दिशा-डॉ महेंद्र सिंह

एकात्म मानववाद और अंत्योदय की प्रेरणा

प्रधानमंत्री की नीतियों में दीनदयाल जी की विचारधारा-डॉ महेंद्र

दैनिक इंडिया न्यूज़ ,भोपाल ।इंदौर महानगर में आयोजित समर्पण दिवस कार्यक्रम में श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर मध्य प्रदेश भाजपा के प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने उनके विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एकात्म मानववाद और अंत्योदय की जो संकल्पना दी थी, वह आज भी प्रासंगिक है।

डॉ. महेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने हमेशा भारत को आत्मनिर्भर, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और समाज के अंतिम व्यक्ति तक संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करने वाला राष्ट्र बनाने का सपना देखा था। उन्होंने भारतीय जनसंघ के विचारों को आधार बनाकर राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और भारत को पश्चिमी विचारधाराओं से मुक्त कर एक स्वदेशी दृष्टिकोण से विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

दीनदयाल जी का एकात्म मानववाद सिद्धांत राष्ट्र और समाज की समग्र उन्नति पर केंद्रित था। उनका मानना था कि विकास केवल आर्थिक आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग की सहभागिता से ही संभव हो सकता है। उन्होंने ग्राम विकास, स्वदेशी उद्योगों, शिक्षा में भारतीय मूल्यों के समावेश और सामाजिक समरसता को मुख्य आधार बनाया। अंत्योदय का विचार उनकी विचारधारा का मूल था—जिसका अर्थ है समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना। यह वही सोच है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" के मंत्र के रूप में आगे बढ़ा रही है।

डॉ. महेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विचारधारा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी नीतियां दीनदयाल उपाध्याय के दृष्टिकोण को आधुनिक भारत में साकार कर रही हैं। उन्होंने उज्ज्वला योजना, जन धन योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया, जो अंत्योदय के सिद्धांत पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प ‘विकसित भारत’ केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक आत्मनिर्भर, सांस्कृतिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से समरस राष्ट्र की संकल्पना को साकार करने का प्रयास है, जो कि दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का मूल था।

डॉ. महेंद्र सिंह ने समर्पण दिवस पर उपस्थित जनता से आह्वान किया कि वे दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को अपने जीवन में उतारें और देश को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, दीनदयाल जी के सपनों को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अपने भाषण का समापन इस संदेश के साथ किया कि दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांत केवल एक विचार नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की नींव हैं, और इन्हें आत्मसात करके ही हम सशक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।

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