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स्वच्छता को रौंदती इंटरसिटी प्राइवेट बसें: वॉशरूम सुविधा के नाम पर झांसा, हाईवे को बना रहीं सीवेज लाइन

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Dainik India News

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स्वच्छता को रौंदती इंटरसिटी प्राइवेट बसें: वॉशरूम सुविधा के नाम पर झांसा, हाईवे को बना रहीं सीवेज लाइन

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ भारत अभियान की साख को उत्तर प्रदेश में इंटरसिटी प्राइवेट बसों की लापरवाही गंभीर रूप से चोट पहुंचा रही है। दैनिक इंडिया न्यूज़ की पड़ताल में सामने आया है कि कई निजी बस ऑपरेटर वॉशरूम सुविधा का दावा कर यात्रियों से अधिक किराया वसूलते हैं, लेकिन व्यवहार में यह सुविधा या तो काम नहीं करती या यात्रियों को प्रयोग नहीं करने दिया जाता।

शिकायतों में सामने आया कि यदि कोई पैसेंजर बीमार है और शहर के भीतर वॉशरूम का उपयोग करना चाहता है, तो उसे यह कहकर रोका जाता है कि "शहर सीमा के भीतर वॉशरूम प्रयोग की अनुमति नहीं है।" यह न केवल अमानवीय है, बल्कि सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए घातक है।

और सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कई बसों के वॉशरूम से निकलने वाला मल-मूत्र सीधे सड़कों पर गिरता है, जिससे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों की सफाई व्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। यह पर्यावरण मानकों और स्वच्छता नियमों का खुला उल्लंघन है।

अब सवाल उठता है कि ऐसी बसों को आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र कैसे जारी किया जा रहा है? क्या पासिंग अधिकारी यह नहीं देखते कि बस में लगे वॉशरूम का डिस्चार्ज सिस्टम पर्यावरण-अनुकूल है या नहीं?

इस लापरवाही के लिए न सिर्फ बस मालिक, बल्कि पासिंग अथॉरिटी भी समान रूप से दोषी हैं।
जब एक ओर केंद्र सरकार स्वच्छ भारत के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर परिवहन विभाग की उदासीनता हाईवे को सीवेज डंपिंग ज़ोन बना रही है।

ड्राइविंग स्टाफ का दुर्व्यवहार और तेज स्टीरियो की समस्या:
इंटरसिटी बस के ड्राइविंग स्टाफ द्वारा यात्रियों के आराम की अनदेखी करते हुए स्टीरियो को अत्यधिक तेज़ वॉल्यूम पर बजाया जा रहा था, जिससे कई यात्रियों की नींद और मानसिक शांति बाधित हो रही थी। जब कुछ यात्रियों ने आवाज़ कम करने का विनम्र अनुरोध किया, तो चालक दल ने अत्यंत असंवेदनशील व्यवहार करते हुए बस को बीच रास्ते में रोक दिया और यात्रियों से बहस करने लगा। यह व्यवहार यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

  1. खराब टायर और गाड़ी में कंपन की समस्या:
    बस के आगे के दाहिने टायर की खराब स्थिति के कारण यात्रा के दौरान लगातार भयंकर वाइब्रेशन महसूस किया गया। यह न केवल यात्रियों को असुविधा पहुंचाने वाला था, बल्कि सड़क पर चलने वाली अन्य गाड़ियों के लिए भी संभावित खतरा बन सकता था। इस तरह की तकनीकी खामियां चालक दल और बस ऑपरेटर की मेंटेनेंस में लापरवाही को उजागर करती हैं, जो एक बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित कर सकती है।

Bus n. AR 01-W-1047

ज़रूरत है सख्त निरीक्षण, पारदर्शी पासिंग प्रणाली और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की, ताकि यात्री अधिकार और स्वच्छता दोनों सुरक्षित रह सकें।

SwachhBharat #HighwayPollution #RTONegligence #PrivateBusFraud #PassengerRights #DainikIndiaNews

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