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अटल विचारों की अमर गूंज में सजी ‘अटल स्मृति संध्या’, राष्ट्रनीति के युगपुरुष को काव्य भावांजलि

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अटल विचारों की अमर गूंज में सजी ‘अटल स्मृति संध्या’, राष्ट्रनीति के युगपुरुष को काव्य भावांजलि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ आयोजन; राष्ट्रीय सनातन महासंघ की सहभागिता, जितेन्द्र प्रताप सिंह समेत अनेक गणमान्यजन रहे उपस्थित

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दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न पं. अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर लखनऊ स्थित अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर, केजीएमयू में आयोजित ‘अटल स्मृति संध्या’ में उनके विराट व्यक्तित्व, राष्ट्रचिंतन और साहित्यिक अवदान को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धेय पं. अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर राष्ट्रीय सनातन महासंघ की सहभागिता भी रही, जिसने अटल जी के राष्ट्रसमर्पित जीवन और विचारधारा को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया।

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भारतीय राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व उस विरल परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा और लोककल्याण का दायित्व मानी गई। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनी राजनीतिक यात्रा का आधार बनाया और राष्ट्रवाद को जनसेवा से जोड़ते हुए राजनीति को व्यापक अर्थों में राष्ट्रनीति का स्वरूप प्रदान किया। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति संध्या केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम न रहकर उनके विचारों के पुनर्स्मरण का अवसर बन गई।

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अटल जी की पहचान एक प्रखर राजनेता के साथ-साथ संवेदनशील कवि, ओजस्वी वक्ता और दूरदर्शी राष्ट्रचिंतक के रूप में भी रही। उनकी कविताओं में मानवीय संवेदना और संघर्ष की अनुभूति दिखाई देती है, तो उनके सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित के प्रति अडिग प्रतिबद्धता। उनकी वाणी ने जहां संसद और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया, वहीं उनके साहित्य ने जनमानस के भीतर आशा, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम की चेतना को स्वर दिया।

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‘अटल स्मृति संध्या’ में उनके इसी बहुआयामी व्यक्तित्व को स्मरण करते हुए यह भाव उभरा कि अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन भारतीय लोकतंत्र की मर्यादा, वैचारिक दृढ़ता और सार्वजनिक जीवन में शुचिता की एक महत्वपूर्ण विरासत है। उनका मानना था कि राष्ट्र सर्वोपरि है और सार्वजनिक जीवन का अंतिम उद्देश्य समाज तथा देश का कल्याण होना चाहिए। उनके विचार आज भी लोकतांत्रिक भारत के सार्वजनिक विमर्श में प्रासंगिक दिखाई देते हैं।

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कार्यक्रम में हिंदी के मूर्धन्य विद्वान, प्रख्यात कवि एवं हास्य-व्यंग्यकार पद्मश्री अशोक चक्रधर सहित अनेक साहित्यिक एवं राजनीतिक विभूतियों की उपस्थिति रही। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी, दारा सिंह चौहान, राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा एवं बृजलाल, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह तथा दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, भाजपा अवध क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, भाजपा लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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इस अवसर पर राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह सहित संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट हस्तियों ने भी सहभागिता की। साहित्य, राजनीति और सामाजिक जीवन से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप प्रदान किया और अटल जी के व्यक्तित्व की उस व्यापक स्वीकार्यता को रेखांकित किया, जो राजनीतिक सीमाओं से कहीं आगे दिखाई देती है।

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अटल बिहारी वाजपेयी का सार्वजनिक जीवन भारतीय राजनीति के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसमें वैचारिक दृढ़ता के साथ संवाद, लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ असहमति और राष्ट्रहित के साथ मानवीय संवेदना का समन्वय दिखाई देता है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित यह स्मृति संध्या उसी विरासत को स्मरण करने का अवसर बनी—एक ऐसी विरासत, जिसमें शब्द केवल भाषण नहीं थे, बल्कि राष्ट्र के प्रति दायित्व की अभिव्यक्ति थे।

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अटल जी का देहावसान हुआ, किंतु उनके विचारों की यात्रा थमी नहीं। उनकी कविता, उनका चिंतन, उनकी राजनीतिक दृष्टि और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। ‘अटल स्मृति संध्या’ का मूल संदेश भी यही रहा कि युगपुरुष चले जाते हैं, किंतु उनके विचार राष्ट्र की चेतना में लंबे समय तक जीवित रहते हैं।

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