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जिसने कहा था—"दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे", उसी अमर क्रांतिनायक चन्द्रशेखर आजाद को राष्ट्र का नमन

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Dainik India News

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जिसने कहा था—"दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे", उसी अमर क्रांतिनायक चन्द्रशेखर आजाद को राष्ट्र का नमन

गोल मार्केट में समवैचारिक संगठनों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर दोहराया राष्ट्रधर्म का संकल्प; बोले जितेन्द्र प्रताप सिंह—आजाद का जीवन केवल इतिहास नहीं, भारत की अमर राष्ट्रीय चेतना है

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दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ, 23 जुलाई2026। इतिहास के कुछ व्यक्तित्व समय की सीमाओं में बंधकर नहीं रहते, बल्कि वे युगों तक राष्ट्र की चेतना बनकर धड़कते हैं। अमर क्रांतिनायक चन्द्रशेखर आजाद ऐसा ही एक तेजस्वी नाम है, जिसने पराधीन भारत की वेदना को अपने रक्त से सींचकर स्वाधीनता के वटवृक्ष को जीवन प्रदान किया। "दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे"—यह उद्घोष आज भी प्रत्येक भारतीय के स्वाभिमान, आत्मबल और राष्ट्रनिष्ठा का घोषवाक्य है।

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इसी अमर राष्ट्रऋषि, अद्वितीय क्रांतिधर्मा और आत्मबलिदान के अनुपम प्रतीक चन्द्रशेखर आजाद की स्मृति में गुरुवार को राजधानी के गोल मार्केट, महानगर स्थित उनकी प्रतिमा पर विभिन्न समवैचारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने श्रद्धा, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" तथा "अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद अमर रहें" के गगनभेदी उद्घोषों के बीच दीप प्रज्वलित किए गए, पुष्पांजलि अर्पित की गई और राष्ट्र की अखंडता एवं सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया गया।

श्रद्धांजलि समारोह में पनून कश्मीर समाज, राष्ट्रीय सनातन महासंघ, संस्कृत भारती, विश्व हिन्दू परिषद, महानगर विस्तार जनकल्याण समिति, अधिवक्ता संघ, सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण समिति, भारतीय जनता पार्टी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रत्येक क्षण यह संदेश दे रहा था कि क्रांतिकारियों का बलिदान केवल स्मरण का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रजीवन का शाश्वत पथप्रदर्शक है।

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इस अवसर पर राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष एवं संस्कृत भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संपर्क प्रमुख जितेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि "चन्द्रशेखर आजाद ने अपने अल्पायु जीवन में जिस अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और आत्मोत्सर्ग का परिचय दिया, वही स्वतंत्र भारत की आत्मा है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि जिस राष्ट्र का युवा अपने स्वाभिमान और संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वस्व अर्पित करने का संकल्प रखता है, उसे कोई भी शक्ति पराधीन नहीं रख सकती। आजाद ने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया, परंतु विदेशी सत्ता के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं किया। उनका जीवन भारत की अस्मिता, आत्मगौरव और अजेय राष्ट्रचेतना का अमिट घोष है।"

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल चन्द्रशेखर आजाद को पुष्प अर्पित करने की नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में धारण करने की है। जब तक भारत का युवा राष्ट्रधर्म, स्वाभिमान, चरित्र, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों को अपने जीवन का आधार नहीं बनाएगा, तब तक स्वतंत्रता का वास्तविक मर्म पूर्णतः आत्मसात नहीं हो सकेगा। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन कर राष्ट्र को परम वैभव के शिखर तक पहुंचाने का संकल्प ले।

कार्यक्रम में पनून कश्मीर समाज के अध्यक्ष रवीन्द्र काचरू, सेवानिवृत्त उत्तर प्रदेश पुलिस कल्याण समिति के मुकेश चौहान 'मुकेशानन्द', विश्व हिन्दू परिषद के प्रवीण राय, अधिवक्ता संजीव पाण्डेय, सुधांशु मिश्रा, विश्वनाथ जी, गिरीश जोशी, सुमनलता, दीप्ति वर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि चन्द्रशेखर आजाद का जीवन भारतीय युवाओं के लिए राष्ट्रसमर्पण, साहस और आत्मगौरव का सर्वोच्च आदर्श है।

संपादकीय दृष्टि

स्वतंत्रता केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन का नाम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। चन्द्रशेखर आजाद जैसे महापुरुष हमें स्मरण कराते हैं कि राष्ट्र का भविष्य केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र, त्याग, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना से सुरक्षित होता है। जब तक भारत की युवा पीढ़ी आजाद के जीवन-दर्शन को आत्मसात करती रहेगी, तब तक भारत की राष्ट्रीय चेतना अक्षुण्ण, अखंड और अजेय बनी रहेगी। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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