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कारगिल के अमर शहीदों को कृतज्ञ राष्ट्र का शत-शत नमन, युवाओं ने लिया मातृभूमि की रक्षा का महाव्रत

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Dainik India News

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कारगिल विजय दिवस पर गूंजा राष्ट्रगौरव, वीर शहीदों की स्मृति में उमड़ा देशभक्ति का जनसैलाब

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वारियर्स डिफेंस कॉलेज के सैकड़ों कैडेटों ने लखनऊ कैंट युद्ध स्मारक पर अर्पित की श्रद्धांजलि; जितेंद्र प्रताप सिंह बोले—भारतीय सैनिक राष्ट्र की अस्मिता, स्वाभिमान और संस्कृति का अमर प्रहरी है।

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दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर राजधानी लखनऊ ने उन अमर रणबांकुरों के प्रति अपनी श्रद्धा, कृतज्ञता और अटूट राष्ट्रनिष्ठा का ऐसा विराट दृश्य देखा, जिसने प्रत्येक भारतीय के अंतर्मन में देशभक्ति का ज्वार उत्पन्न कर दिया। वारियर्स डिफेंस कॉलेज, मोहनलालगंज के सैकड़ों कैडेटों ने लखनऊ कैंट स्थित युद्ध स्मारक (स्मृतिका पार्क) में अनुशासन, संकल्प और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भव्य श्रद्धांजलि रैली निकाली। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह, मेजर जनरल विक्रम कुमार तथा कारगिल युद्ध के वीर सेनानी एवं वारियर्स डिफेंस कॉलेज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कर्नल (सेवानिवृत्त) क्षितिज श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। वीर शहीदों की स्मृति में पुष्पचक्र एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए संपूर्ण वातावरण राष्ट्रभक्ति की दिव्य चेतना से आलोकित हो उठा।

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कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायी क्षण तब आया जब कारगिल युद्ध के प्रत्यक्ष योद्धा कर्नल (सेवानिवृत्त) क्षितिज श्रीवास्तव ने तोलोलिंग पर्वत और द्रास सेक्टर के भीषण युद्ध के अपने अविस्मरणीय संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि रणभूमि में विजय केवल हथियारों से नहीं, बल्कि अदम्य साहस, अनुशासन, मातृभूमि के प्रति समर्पण और अंतिम श्वास तक लड़ने के अटूट संकल्प से प्राप्त होती है। उनके ओजस्वी अनुभवों ने उपस्थित प्रत्येक कैडेट के मन में भारतीय सेना की वर्दी धारण कर राष्ट्ररक्षा का संकल्प और अधिक प्रज्वलित कर दिया।

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मेजर जनरल विक्रम कुमार ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सेना केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि राष्ट्र के आत्मसम्मान और संप्रभुता की सजीव अभिव्यक्ति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कठोर अनुशासन, सतत प्रशिक्षण, अटूट समर्पण और शत-प्रतिशत सहभागिता ही किसी भी युवा को उत्कृष्ट सैनिक एवं सशक्त राष्ट्रनिर्माता बना सकती है। उनका प्रेरक उद्बोधन उपस्थित विद्यार्थियों के लिए जीवनपर्यंत मार्गदर्शक संदेश बन गया।

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मुख्य अतिथि जितेंद्र प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि कारगिल के अमर वीरों का पराक्रम भारत के इतिहास का ऐसा स्वर्णिम अध्याय है, जिसे आने वाली असंख्य पीढ़ियाँ श्रद्धा और गर्व के साथ स्मरण करेंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करता, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता, संस्कृति, सभ्यता और स्वाभिमान का प्रहरी बनकर प्रत्येक भारतीय के सुरक्षित भविष्य का प्रहरी भी है। उन्होंने समस्त राष्ट्र की ओर से भारतीय सेना और कारगिल के अमर शहीदों के प्रति गहन कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि वीरों का सर्वोच्च सम्मान तभी होगा, जब देश का प्रत्येक युवा राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर अपने जीवन को अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति के लिए समर्पित करेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों एवं कैडेटों ने युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों सहित मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सभी वीर सैनिकों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी। सेना द्वारा निर्मित बंकरों एवं कारगिल युद्ध के ऐतिहासिक घटनाक्रम पर आधारित लाइट एंड साउंड शो ने उपस्थित जनसमूह को मानो सीधे रणभूमि के उन गौरवशाली क्षणों में पहुँचा दिया। जैसे-जैसे वीरता की गाथाएँ सजीव होती गईं, वैसे-वैसे पूरा परिसर "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "अमर रहे कारगिल के वीर शहीद" के गगनभेदी उद्घोषों से गुंजायमान होता गया। यह केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, सैन्य गौरव और भारत की अक्षुण्ण राष्ट्रीय चेतना का विराट उत्सव बन गया।

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