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लखनऊ अग्निकांड के बाद जागा प्रशासन, मऊ में फायर सेफ्टी मानकों की हुई सघन जांच

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लखनऊ अग्निकांड के बाद जागा प्रशासन, मऊ में फायर सेफ्टी मानकों की हुई सघन जांच

दैनिक इंडिया न्यूज़, मऊ।राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में 15 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासनिक तंत्र हरकत में आ गया है। इसी क्रम में मंगलवार को मऊ जनपद के घोसी क्षेत्र में उपजिलाधिकारी अशोक सिंह के नेतृत्व में पुलिस, अग्निशमन, विद्युत विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) तथा नगर पंचायत की संयुक्त टीम ने प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, मॉल, होटल, रेस्टोरेंट एवं कोचिंग संस्थानों का व्यापक निरीक्षण किया।

निरीक्षण दल में क्षेत्राधिकारी जितेंद्र सिंह, विद्युत विभाग के एसडीओ इंद्र बहादुर मौर्य, अवर अभियंता माजिद, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी संजय पांडेय, नगर पंचायत एवं पीडब्ल्यूडी के अधिकारी तथा कर्मचारी शामिल रहे। टीम ने वी-मार्ट, ए-टू मार्ट, वन इंडिया फैमिली मार्ट, एच लॉन, आशीष वस्त्रालय, नावेल्टी प्रतिष्ठान तथा ज्ञानस्थली कोचिंग सेंटर सहित अनेक संस्थानों का निरीक्षण किया।

अधिकारियों ने निर्धारित 22 सुरक्षा बिंदुओं के आधार पर व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। इस दौरान फायर एनओसी, अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता एवं वैधता, कर्मचारियों को दिए गए अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षण, प्रत्येक तल पर अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था, आपातकालीन निकास द्वार, एग्जिट साइन, प्रकाश व्यवस्था, सीढ़ियों की चौड़ाई, सुरक्षा कर्मियों की उपलब्धता, विद्युत वायरिंग एवं पैनल की स्थिति, फर्स्ट एड किट, एंबुलेंस पहुंच मार्ग, पार्किंग व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता, भवन की संरचनात्मक मजबूती तथा आकाशीय बिजली से सुरक्षा संबंधी इंतजामों का परीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान संचालकों को निर्देशित किया गया कि सभी अग्निशमन उपकरणों को क्रियाशील अवस्था में रखा जाए, निकास मार्गों को अवरोधमुक्त रखा जाए तथा सभी सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जन सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बड़ा सवाल: हादसे के बाद ही क्यों टूटती है प्रशासन की नींद?

लखनऊ की हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसा क्यों है कि प्रशासन और संबंधित विभाग किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही सक्रिय दिखाई देते हैं? क्या हादसा होने से पहले सभी संस्थानों में सुरक्षा मानक पूरी तरह दुरुस्त रहते हैं? यदि नहीं, तो नियमित निरीक्षण और प्रभावी निगरानी पहले क्यों नहीं की जाती?

जनता यह जानना चाहती है कि यदि ऐसे निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट समय-समय पर होते रहते, तो क्या कई निर्दोष जिंदगियों को बचाया नहीं जा सकता था? हर बड़ी दुर्घटना के बाद चलने वाले जांच अभियान और सख्ती के निर्देश यह संकेत देते हैं कि व्यवस्था में कहीं न कहीं नियमित निगरानी की कमी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फायर सेफ्टी केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का विषय है। यदि शासन-प्रशासन, स्थानीय निकाय और संबंधित विभाग समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें, तो ऐसी दर्दनाक घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। लखनऊ की घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए चेतावनी है कि सुरक्षा नियमों का पालन दुर्घटना के बाद नहीं, बल्कि दुर्घटना से पहले सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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