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महाराणा प्रताप केवल इतिहास नहीं, राष्ट्रचेतना के अमर अधिष्ठाता हैं : जितेन्द्र प्रताप सिंह

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महाराणा प्रताप केवल इतिहास नहीं, राष्ट्रचेतना के अमर अधिष्ठाता हैं : जितेन्द्र प्रताप सिंह

वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा के अप्रतिम प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती पर राष्ट्रभक्ति का हुआ भव्य उद्घोष

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राष्ट्रीय सनातन महासंघ ने हुसैनगंज चौराहे पर किया माल्यार्पण, युवाओं से महाराणा के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। मेवाड़ की पावन धरा पर जन्मे उस महायोद्धा की जयंती पर, जिसने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्र, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया, राजधानी लखनऊ में राष्ट्रभावना का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। विधानसभा मार्ग स्थित हुसैनगंज चौराहे पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण व श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा राष्ट्रजीवन में उनके योगदान को युगों-युगों तक प्रेरणास्रोत बताया।

कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जयवीर सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप किसी एक जाति, क्षेत्र अथवा कालखंड के नायक नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय अस्मिता, आत्मसम्मान और अडिग राष्ट्रनिष्ठा के शाश्वत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे व्यक्तित्व विरले ही जन्म लेते हैं, जो अपने जीवन से यह सिद्ध कर देते हैं कि भौतिक संसाधनों की कमी किसी राष्ट्रभक्त के संकल्प को पराजित नहीं कर सकती। महाराणा प्रताप ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने स्वाभिमान और स्वतंत्रता का सौदा नहीं किया तथा राष्ट्रधर्म की रक्षा के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात    जितेंद्र प्रताप सिंह अध्यक्ष सनातन महासंघ ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल तलवारों का संघर्ष नहीं था, बल्कि वह भारतीय स्वाभिमान और पराधीनता के मध्य चल रहा वैचारिक महासंग्राम था। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विकट क्यों न हों, यदि व्यक्ति के भीतर राष्ट्र के प्रति समर्पण और आत्मगौरव का भाव जीवित है, तो कोई भी शक्ति उसे पराजित नहीं कर सकती। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सम्मानपूर्वक संघर्ष करना, अपमानजनक समझौते से कहीं अधिक श्रेष्ठ है।

अनिल सिंह गहलोत क्षत्रीय संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि आज जब विश्व सांस्कृतिक और वैचारिक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है, तब महाराणा प्रताप के आदर्श पहले से अधिक प्रासंगिक हो उठे हैं। राष्ट्र के युवाओं को उनके त्याग, तप, अनुशासन, साहस और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने केवल शत्रुओं से युद्ध नहीं किया, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया। यही कारण है कि सदियों बाद भी उनका नाम करोड़ों भारतीयों के हृदय में श्रद्धा और गौरव के साथ उच्चारित किया जाता है।

अपने मीडिया संबोधन में जितेंद्र प्रताप सिंह अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन महासंघ लखनऊ ने विशेष रूप से कहा कि यदि भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करना है तो राष्ट्र को महाराणा प्रताप जैसे चरित्रवान, कर्तव्यनिष्ठ और स्वाभिमानी नागरिकों की आवश्यकता होगी। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे मोबाइल और मनोरंजन की सीमित दुनिया से बाहर निकलकर राष्ट्रनिर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ें तथा अपने जीवन में महाराणा प्रताप के आदर्शों को आत्मसात करें।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी महाराणा प्रताप के जीवन पर प्रकाश डाला तथा उन्हें भारतीय इतिहास का अद्वितीय योद्धा बताया। इस अवसर पर भारतीय क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष अनिल सिंह गहलोत, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी श्रीप्रकाश सिंह, राष्ट्रीय सनातन महासंघ के पदाधिकारी, विभिन्न समविचारी सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रबुद्धजन एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का वातावरण “भारत माता की जय”, “महाराणा प्रताप अमर रहें” और “वंदे मातरम्” के उद्घोषों से गूंजता रहा। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे राष्ट्रगौरव, वीरता, स्वाभिमान और त्याग की उस अमर परंपरा को आगे बढ़ाएंगे, जिसके सर्वोच्च प्रतीक महाराणा प्रताप आज भी भारत की आत्मा में जीवित हैं।

जितेन्द्र प्रताप सिंह अध्यक्ष राष्ट्रीय सनातन महासंघ,लखनऊ ने इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अंकित महाराणा प्रताप का जीवन केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भारत के लिए एक ऐसी प्रेरणा है, जो प्रत्येक भारतीय को यह संदेश देती है कि राष्ट्र सर्वोपरि है, स्वाभिमान अमूल्य है और धर्म तथा मातृभूमि की रक्षा हेतु किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता।

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