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उत्तर प्रदेश का बजट 2026–27: वित्तीय अनुशासन, संरचनात्मक रूपांतरण और विकसित भारत की संकल्पना का सुदृढ़ अधिष्ठान

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Dainik India News

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उत्तर प्रदेश का बजट 2026–27: वित्तीय अनुशासन, संरचनात्मक रूपांतरण और विकसित भारत की संकल्पना का सुदृढ़ अधिष्ठान


हरेंद्र सिंह,दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट को विधानमंडल में प्रस्तुत किए जाने के उपरांत इसे उत्तर प्रदेश के रूपांतरण की ऐतिहासिक यात्रा का सुस्पष्ट घोषणापत्र निरूपित किया। उन्होंने कहा कि विगत नौ वर्षों में प्रदेश ने अपने प्रति स्थापित धारणाओं को परिवर्तित करते हुए जड़ता, नीतिगत अवरोध और प्रशासनिक निष्क्रियता से उबरकर स्वयं को असीम संभावनाओं वाले प्रगतिशील राज्य के रूप में प्रतिष्ठित किया है। ₹9.12 लाख करोड़ से अधिक के इस विराट बजट के माध्यम से ‘सुरक्षित नारी, सक्षम युवा, समृद्ध किसान, सर्वजन रोजगार तथा प्रौद्योगिकी-आधारित निवेश’ की अवधारणा को संस्थागत रूप प्रदान किया गया है। यह केवल वार्षिक वित्तीय प्रावधान नहीं, बल्कि नववर्ष के नव-निर्माण की दूरगामी संरचना है।


मुख्यमंत्री ने बजट की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ₹43,565 करोड़ से अधिक की धनराशि नवीन योजनाओं हेतु प्रस्तावित है, जबकि ₹2 लाख करोड़ से अधिक का प्रावधान पूंजीगत व्यय के लिए किया गया है। पूंजीगत निवेश परिसंपत्तियों के सृजन, अधोसंरचना के विस्तार और अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण का मूलाधार होता है, और यहीं से रोजगार की वास्तविक सृष्टि प्रारंभ होती है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान शासन का यह दसवां बजट है—ऐसा अवसर राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व है। इन नौ वर्षों में एक भी नवीन कर आरोपित न करते हुए, कर-चोरी और राजस्व रिसाव पर अंकुश लगाकर प्रदेश को ‘राजस्व अधिशेष’ राज्य के रूप में प्रतिष्ठित करना वित्तीय प्रबंधन की अनुकरणीय उपलब्धि है।


उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश की ऋण-ग्रस्तता सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 30 प्रतिशत से अधिक थी, जिसे घटाकर 27 प्रतिशत तक लाया गया और वर्तमान वर्ष में इसे 23 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य निर्धारित है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित 30 प्रतिशत की सीमा के अंतर्गत रहते हुए एफआरबीएम मानकों का पालन करना प्रदेश की वित्तीय अनुशासनशीलता और प्रबंधकीय दक्षता का द्योतक है। यह संतुलन ही वह आधार है, जिस पर दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता का प्रासाद निर्मित होता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने कल्याणकारी योजनाओं और अधोसंरचनात्मक निवेश को समानांतर गति देते हुए विकास के नवीन प्रतिमान स्थापित किए हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था आज देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान रखती है। बेरोजगारी दर, जो पूर्वकाल में 17 से 19 प्रतिशत के मध्य विचरित होती थी, उसे घटाकर लगभग 2.24 प्रतिशत तक सीमित करना केवल सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है। एमएसएमई, स्टार्टअप और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित कर प्रदेश को निवेश-गंतव्य और रोजगार-उत्पादक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।


प्रशासनिक पारदर्शिता और तथ्याधारित नीति-निर्माण की दिशा में ‘स्टेट डेटा अथॉरिटी’ की स्थापना का निर्णय राज्य-शासन की परिपक्वता को दर्शाता है। रियल-टाइम डेटा और सतत निगरानी की व्यवस्था भविष्य की योजनाओं को वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगी। बजट में उभरती प्रौद्योगिकियों—विशेषतः कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मेडटेक और डीप-टेक—के लिए डेटा सेंटर क्लस्टर तथा एआई मिशन की घोषणा कर कौशलयुक्त युवाओं के लिए वैश्विक अवसरों के द्वार उद्घाटित किए गए हैं।
खेल अवसंरचना को उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर करते हुए विशिष्ट खेलों हेतु ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित करने का प्रावधान किया गया है। ‘खेलो इंडिया’ के अंतर्गत ओपन जिम, मिनी स्टेडियम और खेल मैदानों के निर्माण के साथ मेरठ में मेजर ध्यानचंद के नाम पर स्थापित हो रही स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी प्रदेश की खेल-प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने का माध्यम बनेगी।


पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश ने अभूतपूर्व प्रगति की है। जहाँ पूर्वकाल में सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं का अभाव था, वहीं वर्ष 2024–25 में 122 करोड़ पर्यटकों का आगमन इस परिवर्तन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। धार्मिक, ईको, हेरिटेज और एडवेंचर पर्यटन को सुदृढ़ करने हेतु एक लाख अतिरिक्त कक्षों की सृष्टि, 50 हजार होम-स्टे की स्थापना तथा महिला गाइड प्रशिक्षण हेतु लाइसेंस शुल्क की समाप्ति पर्यटन को व्यापक रोजगार-उत्पादक क्षेत्र में रूपांतरित करेगी।


स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश ने संरचनात्मक विस्तार की नई ऊँचाइयाँ प्राप्त की हैं। जहाँ कभी 36 मेडिकल कॉलेज थे, आज उनकी संख्या 81 तक पहुँच चुकी है, साथ ही दो एम्स और अनेक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल कार्यरत हैं। प्रत्येक जनपद में उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाओं का विस्तार तथा एसजीपीजीआई में क्वाटरनरी हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना हेतु ₹250 करोड़ का प्रावधान स्वास्थ्य अवसंरचना को वैश्विक मानकों तक ले जाने का संकेत है। ‘वन हेल्थ मिशन’ और ऑर्गन ट्रांसप्लांट कार्यक्रम राज्य को चिकित्सा नवाचार का अग्रदूत बनाएंगे।


उच्च शिक्षा और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में मेधावी छात्राओं को स्कूटी, स्मार्टफोन और टैबलेट वितरण, दिव्यांग छात्राओं हेतु मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल तथा विशेष शिक्षण केंद्रों की स्थापना जैसी पहलकदमियाँ सामाजिक न्याय की परिकल्पना को मूर्त रूप देती हैं। दिव्यांग बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर और समेकित विशेष विद्यालयों की स्थापना संवेदनशील शासन की परिपाटी का प्रमाण है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट ‘विकसित भारत 2047’ की राष्ट्रीय संकल्पना के अनुरूप विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में एक निर्णायक कदम है। प्रदेश ने ‘बीमारू’ और ‘बॉटलनेक’ की जड़ता को पराजित कर स्वयं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में स्थापित किया है। यह बजट वर्ष 2029–30 तक एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की आधारशिला सिद्ध होगा।


अंततः मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री एवं उनकी समस्त टीम को बधाई देते हुए कहा कि नेतृत्व में परिवर्तन से दृष्टि और दिशा का रूपांतरण संभव होता है। वही प्रणाली, वही संरचना—परंतु जब संकल्प, नीति और नेतृत्व सुदृढ़ हों, तो परिणाम इतिहास रचते हैं। ₹9.12 लाख करोड़ का यह बजट उत्तर प्रदेश के आत्मविश्वास, वित्तीय प्रौढ़ता और नवयुगीन आकांक्षाओं का गौरवपूर्ण उद्घोष है—एक ऐसा दस्तावेज, जो आने वाले वर्षों की विकास-गाथा का आधार बनने जा रहा है।

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