दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।राजनीति में समर्थकों की कमी नहीं होती, किंतु इतिहास केवल उन संबंधों को स्मरण रखता है जिनकी आधारशिला स्वार्थ नहीं, बल्कि श्रद्धा, संस्कार, आदर्श और आत्मीय समर्पण पर टिकी होती है। रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के लोकप्रिय सांसद राजनाथ सिंह का 10 जुलाई का जन्मदिवस इस वर्ष राजधानी में केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि जन-जन की भावनाओं का महोत्सव बनता दिखाई दे रहा है। कहीं सुंदरकाण्ड का अखण्ड पाठ हो रहा है, कहीं हनुमान चालीसा की स्वर-लहरियाँ गूँज रही हैं, तो कहीं अखण्ड रामायण के माध्यम से राष्ट्ररक्षा और लोकमंगल की मंगलकामनाएँ व्यक्त की जा रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो सम्पूर्ण लखनऊ ने उनके जन्मोत्सव को अपना निजी उत्सव बना लिया हो।

इन असंख्य शुभेच्छुओं के मध्य यदि किसी एक नाम का उल्लेख विशेष श्रद्धा के साथ किया जाए तो वह हैं जितेंद्र प्रताप सिंह। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आजीवन स्वयंसेवक, संस्कृत भारती (पूर्वी उत्तर प्रदेश) के क्षेत्र संपर्क प्रमुख तथा राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष के रूप में उनका व्यक्तित्व सेवा, संस्कार और राष्ट्रनिष्ठा का जीवंत उदाहरण है।
सनातन उनके लिए केवल कोई धार्मिक शब्द नहीं, बल्कि वह शाश्वत जीवनदृष्टि है जो समस्त सृष्टि के संतुलन, मानवता के उत्थान, प्रकृति के संरक्षण, सत्य, करुणा, कर्तव्य, आत्मसंयम, लोकमंगल और "वसुधैव कुटुम्बकम्" के दिव्य दर्शन को अपने भीतर समेटे हुए है। यही सनातन दर्शन उन्हें राष्ट्रहित में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्तित्व के प्रति कृतज्ञ बनाता है।
जितेंद्र प्रताप सिंह और राजनाथ सिंह का संबंध किसी राजनीतिक समीकरण का परिणाम नहीं है। यह उस समय से प्रारम्भ हुआ जब राजनाथ सिंह राष्ट्रीय राजनीति के आज के शिखर पर नहीं थे। वर्षों की आत्मीयता आज ऐसी श्रद्धा में परिणत हो चुकी है कि रक्षा मंत्री से संबंधित प्रत्येक प्रेरक क्षण, प्रत्येक ऐतिहासिक निर्णय, प्रत्येक छायाचित्र और प्रत्येक उपलब्धि उनके लिए केवल मोबाइल की गैलरी का संग्रह नहीं, बल्कि हृदय की अमिट स्मृतियों का अमूल्य संकलन है।

इन्हें निकट से जानने वाले कहते हैं कि यदि कोई राजनाथ सिंह के विषय में शिकायत लेकर उनके पास पहुँचे तो वह मुस्कराकर सब सुन सकते हैं, परंतु स्वयं राजनाथ सिंह के प्रति एक भी अवमाननापूर्ण शब्द उनके कान स्वीकार नहीं कर सकते। यह अंधभक्ति नहीं, बल्कि उस व्यक्तित्व के प्रति गहन श्रद्धा है जिसे उन्होंने राष्ट्रहित, सादगी, शुचिता और मर्यादित सार्वजनिक जीवन का आदर्श माना है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के जन्मदिवस पर जितेंद्र प्रताप सिंह ने भावविभोर होकर कहा—

"आप केवल भारत के रक्षा मंत्री नहीं, करोड़ों राष्ट्रभक्तों के आत्मविश्वास के प्रहरी हैं। ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, अखण्ड ऊर्जा और राष्ट्रसेवा की अविरल सामर्थ्य प्रदान करें। आपका प्रत्येक निर्णय भारत की सुरक्षा, संस्कृति और सभ्यता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाता रहे। आपके श्रीचरणों में कोटिशः प्रणाम तथा जन्मदिवस की अनंत मंगलकामनाएँ।"
आज जब सार्वजनिक जीवन में निष्ठा, शुचिता और आत्मीयता का संकट बार-बार चर्चा का विषय बनता है, तब राजनाथ सिंह के प्रति जितेंद्र प्रताप सिंह जैसा समर्पण यह प्रमाणित करता है कि आदर्श व्यक्तित्व केवल पद से नहीं, बल्कि चरित्र, कर्म और संस्कारों से जनमानस के हृदय में स्थान प्राप्त करते हैं।