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गोमती नगर विस्तार में जबरन धर्मांतरण का खुलासा: पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

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Dainik India News

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गोमती नगर विस्तार में जबरन धर्मांतरण का खुलासा: पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
अभियुक्तों को जीप में बैठाकर पुलिस ले जाती हुई

स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

पुलिस प्रशासन पर अराजक तत्वों की सुरक्षा का आरोप, हिंदू संगठनों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ ।लखनऊ के गोमती नगर विस्तार स्थित छोटा भरवारा कॉलोनी में जबरन धर्मांतरण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों और हिंदू संगठनों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें कहा गया है कि बीते 5-6 महीनों से धर्मांतरण का यह कार्यक्रम चल रहा था, लेकिन पुलिस ने लीपा-पोती करके अभियुक्तों को धीरे-धीरे छोड़ना शुरू कर दिया।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि धर्मांतरण अभियान के मास्टरमाइंड राजीव लाल और उनकी पत्नी हैं, जिनकी मिलीभगत से यह कार्य पुरजोर तरीके से चलाया जा रहा था। कॉलोनी के लोगों ने आरोप लगाया है कि ये दोनों लंबे समय से क्षेत्र में धर्मांतरण को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक और सामाजिक दबाव बना रहे थे। हिंदू परिवारों को घर बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिससे स्थानीय जनसंख्या संतुलन बदला जा सके।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस धर्मांतरण अभियान में 200 से 250 लोग सक्रिय रूप से शामिल थे। आरोप है कि हिंदू परिवारों पर सुनियोजित तरीके से दबाव बनाया जा रहा था और जब यह मामला खुलकर सामने आया, तो पुलिस ने संदिग्धों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल दिया। इतना ही नहीं, धर्मांतरण के लिए इकट्ठी की गई 200 से 250 महिलाओं की कोई सामूहिक तस्वीर तक नहीं ली गई, जिससे प्रशासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

सूचना मिलते ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राष्ट्रीय सनातन महासंघ, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता घटनास्थल पर पहुंचे और जोरदार विरोध जताया। लखनऊ हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में न्यायसंगत कार्रवाई करने के बजाय घटनास्थल पर पहुंची मीडिया और आम नागरिकों को वहां जाने से रोक दिया। इससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहा है और पुलिस की यह भूमिका हिंदू समाज के प्रति गहरी साजिश को दर्शाती है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि धर्मांतरण के मुख्य अभियुक्त ने कई बार लोगों को धमकी दी थी कि "मैं जब चाहूं तुम्हें किसी भी मुकदमे में फंसा सकता हूं, क्योंकि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के परिवार हमारे ही स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में कोई भी पुलिस अधिकारी हमारे खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं करेगा। सरकार चाहे किसी भी दल की हो, लेकिन अधिकारी हमारे इशारे पर काम करने को मजबूर हैं।" इस प्रकार की धमकियों ने स्थानीय निवासियों को और अधिक चिंतित कर दिया है।

कॉलोनी के निवासी बार-बार डबल इंजन की सरकार से न्याय की गुहार कर रहे हैं और इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि दोषियों और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

हिंदू संगठनों और अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि, हिंदू संगठनों ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा या गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल न हों। उन्होंने कहा कि प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करने के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष किया जाएगा, ताकि दोषियों को सख्त सजा मिल सके।

इस घटना के बाद से ही छोटा भरवारा कॉलोनी में तनाव बना हुआ है। हिंदू संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जबरन धर्मांतरण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और प्रशासन की निष्क्रियता इस प्रकार की घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन होगा।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और क्या पीड़ित परिवारों को न्याय मिल पाएगा?

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