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नव संवत्सर के शुभागमन पर राष्ट्र के नाम उद्बोधन: सनातन चेतना के पुनरुत्थान का दिव्य महापर्व

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Dainik India News

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नव संवत्सर के शुभागमन पर राष्ट्र के नाम उद्बोधन: सनातन चेतना के पुनरुत्थान का दिव्य महापर्व


दैनिक इंडिया न्यूज़ लखनऊ । राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने नवरात्रि के पावन प्रारंभ की पूर्वसंध्या पर समस्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए भारतीय नववर्ष (नव संवत्सर) के शुभागमन पर हृदयस्पर्शी, ओजस्वी एवं राष्ट्रचेतना से ओतप्रोत मंगलकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने इस अवसर पर मीडिया से संवाद करते हुए उद्घोषित किया कि नव संवत्सर केवल कालचक्र का साधारण परिवर्तन नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति की चिरंतन धारा, आध्यात्मिक चेतना के पुनरुत्थान तथा सनातन जीवन-दर्शन के पुनर्प्रतिष्ठापन का दिव्य घोष है।
उन्होंने विशद रूप से प्रतिपादित किया कि भारतीय नववर्ष, जिसे ‘विक्रम संवत’ के नाम से अभिहित किया जाता है, प्रकृति के नवोन्मेष, सृष्टि के पुनर्संयोजन तथा चेतना के अभिनव जागरण का सजीव प्रतीक है। जब सम्पूर्ण चराचर जगत नवपल्लवित हो उठता है, तरुवरों में नवांकुरों का उद्भव होता है, समीर में नवप्राणों का संचार होता है, तब सनातन परंपरा में इस कालखंड को नवजीवन के अभिनव उदय के रूप में श्रद्धापूर्वक वंदित किया जाता है। यही कारण है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला यह नव संवत्सर भारतीय मनीषा में परम पावन, शुभफलप्रद एवं मंगलमय माना गया है।
जितेंद्र प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में यह भी प्रतिपादित किया कि नवरात्रि का इसी कालखंड में प्रारंभ होना इस तथ्य का द्योतक है कि शक्ति, साधना और सृजन का त्रिवेणी-संगम ही भारतीय जीवन-पद्धति का मूलाधार है। आदिशक्ति की आराधना के साथ नववर्ष का अभिनंदन यह संदेश देता है कि आत्मशुद्धि, सदाचार, धर्मनिष्ठा, संयम एवं लोकमंगल की भावना के समन्वय से ही राष्ट्र सुदृढ़, समृद्ध एवं सुसंस्कृत बन सकता है।
उन्होंने आगे उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिवेश में, जब सांस्कृतिक मूल्यों का अवमूल्यन एवं नैतिक आदर्शों का ह्रास दृष्टिगोचर हो रहा है, तब भारतीय नववर्ष हमें अपनी मूल चेतना की ओर पुनरागमन करने, अपनी गौरवशाली परंपराओं का पुनर्स्मरण करने तथा राष्ट्रीय अस्मिता को सुदृढ़ करने का अनुपम अवसर प्रदान करता है। यह दिवस केवल उत्सवधर्मिता का प्रतीक नहीं, अपितु आत्ममंथन, संकल्प-साधना एवं नवचेतना के अभ्युदय का महोत्सव भी है।
अपने संदेश के उपसंहार में उन्होंने समस्त देशवासियों को नव संवत्सर एवं नवरात्रि की मंगलमयी शुभकामनाएं अर्पित करते हुए कामना की कि यह नववर्ष प्रत्येक जन के जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य, आध्यात्मिक उत्कर्ष एवं नैतिक उन्नयन का नवदीप्त प्रकाश संचारित करे तथा भारतवर्ष पुनः अपने प्राचीन वैभव, सांस्कृतिक गौरव एवं वैश्विक नेतृत्व की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने के पथ पर द्रुतगति से अग्रसर हो।

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