विधानसभा के सत्ता शिखर पर भ्रष्टाचार का साया?
फर्जी शपथपत्र, कूटरचित अभिलेख, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ हजरतगंज कोतवाली पहुंची तहरीर
दैनिक इंडिया न्यूज़,11 जून 2026 लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीर्ष प्रशासनिक पद पर आसीन प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गए हैं। विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी कर्मेश प्रताप सिंह ने हजरतगंज कोतवाली में विस्तृत तहरीर देकर प्रदीप दुबे के विरुद्ध भ्रष्टाचार, कूटरचना, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, गलत शपथपत्र प्रस्तुत करने, पद के दुरुपयोग तथा अन्य कथित अनियमितताओं के संबंध में मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है। शिकायत में प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत कार्रवाई की भी मांग उठाई गई है।
तहरीर सामने आने के बाद विधानसभा और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि संवैधानिक संस्थान की गरिमा से जुड़े पद पर रहते हुए नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार कर कई ऐसे कार्य किए गए, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ता ने कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग करते हुए दावा किया है कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं।
गौरतलब है कि बीती 5 जून को लखनऊ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में प्रदीप दुबे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हुई थी। उस सुनवाई के बाद से ही उनकी नियुक्ति और उससे जुड़े विभिन्न पहलू सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब हजरतगंज कोतवाली में दी गई तहरीर ने इस विवाद को नया आयाम दे दिया है।
कर्मेश प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट में लंबित मामला "क्वो वारंटो" याचिका का है, जिसमें प्रमुख सचिव के पद पर उनकी नियुक्ति की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। जबकि पुलिस को दी गई तहरीर कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और दस्तावेजी हेरफेर से संबंधित है। उनके अनुसार दोनों मामलों की प्रकृति अलग है, लेकिन दोनों ही प्रश्न विधानसभा प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े हुए हैं।
राज्य की सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्था के शीर्ष अधिकारी पर लगे इन गंभीर आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होती है तो यह मामला विधानसभा प्रशासन की कार्यप्रणाली, नियुक्तियों और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े अनेक तथ्यों को उजागर कर सकता है।
अब सबकी निगाहें पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तहरीर में लगाए गए आरोपों पर प्रारंभिक जांच शुरू होती है या नहीं, और क्या इस पूरे प्रकरण में किसी प्रकार की विधिक कार्रवाई आगे बढ़ती है।