ब्रेकिंग न्यूज़
विरासत से विकसित भारत तक: मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर रखा उत्तर प्रदेश के नव निर्माण का रोडमैप | आजादी का अमृत, नई पीढ़ी का संकल्प: राष्ट्रनिर्माण की अगली इबारत लिखने को तैयार युवा शक्ति | टिकरी बॉर्डर के पास विकास का दावा बेदम, लेखराम पार्क की सड़कें बनीं नागरिकों की दुश्वारी का पर्याय | वंदेमातरम् के स्वरों से गूंजा महानगर विस्तार, तिरंगे की आन-बान-शान में डूबा लखनऊ | 26 वर्ष से अधिक कारावास के बाद भी दारा सिंह की रिहाई अधर में, 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक सुनवाई | राहुल गांधी के बयान पर राजनाथ सिंह का सबसे तीखा वार—‘ऐसा आचरण स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे का संकेत’ | प्लास्टिक उद्योग के निवेश से लखनऊ को नई औद्योगिक पहचान की उम्मीद | जीरो टॉलरेंस के दावे के बीच लोक सेवा आयोग पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने मांगा न्यायिक जवाब | विरासत से विकसित भारत तक: मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर रखा उत्तर प्रदेश के नव निर्माण का रोडमैप | आजादी का अमृत, नई पीढ़ी का संकल्प: राष्ट्रनिर्माण की अगली इबारत लिखने को तैयार युवा शक्ति | टिकरी बॉर्डर के पास विकास का दावा बेदम, लेखराम पार्क की सड़कें बनीं नागरिकों की दुश्वारी का पर्याय | वंदेमातरम् के स्वरों से गूंजा महानगर विस्तार, तिरंगे की आन-बान-शान में डूबा लखनऊ | 26 वर्ष से अधिक कारावास के बाद भी दारा सिंह की रिहाई अधर में, 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक सुनवाई | राहुल गांधी के बयान पर राजनाथ सिंह का सबसे तीखा वार—‘ऐसा आचरण स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे का संकेत’ | प्लास्टिक उद्योग के निवेश से लखनऊ को नई औद्योगिक पहचान की उम्मीद | जीरो टॉलरेंस के दावे के बीच लोक सेवा आयोग पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने मांगा न्यायिक जवाब |
हाइलाइट न्यूज़
स्वर, ताल और साधना का अलौकिक संगम—यूपीएसएनए की प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता धमक के साथ शुरू The thyroid federation described the theme as 'It's not you. It's your thyroid' which focuses on thyroid disorders by taking the necessary steps to cure it before causing any complications. अयोध्या में अखिलेश यादव का जमकर विरोध, सपा प्रमुख ने टाली 'रामनगरी' की यात्रा सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलीं अभिनेत्री कंगना रनोट 🐍 ब्रेकिंग न्यूज़: युवक को डसा जहरीला सांप, खुद तड़प-तड़प कर मिनटों में मर गया! गांव वालों में दहशत और हैरानी गुरु-शरणागति से अद्वैत-साक्षात्कार तक: वेदांत का परम रहस्य और साधना का शिखर सम्मेलन में उमड़ी महिलाओं ने दिया जीत का भरोसा, बढ़ती महंगाई से महिलाओं में आक्रोश, होगा बड़ा आंदोलन-हनीफ खान डी आई जी रेंज देवी पाटन मंडल द्वारा पयागपुर थाना का किया गया औचक निरीक्षण स्वर, ताल और साधना का अलौकिक संगम—यूपीएसएनए की प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता धमक के साथ शुरू The thyroid federation described the theme as 'It's not you. It's your thyroid' which focuses on thyroid disorders by taking the necessary steps to cure it before causing any complications. अयोध्या में अखिलेश यादव का जमकर विरोध, सपा प्रमुख ने टाली 'रामनगरी' की यात्रा सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलीं अभिनेत्री कंगना रनोट 🐍 ब्रेकिंग न्यूज़: युवक को डसा जहरीला सांप, खुद तड़प-तड़प कर मिनटों में मर गया! गांव वालों में दहशत और हैरानी गुरु-शरणागति से अद्वैत-साक्षात्कार तक: वेदांत का परम रहस्य और साधना का शिखर सम्मेलन में उमड़ी महिलाओं ने दिया जीत का भरोसा, बढ़ती महंगाई से महिलाओं में आक्रोश, होगा बड़ा आंदोलन-हनीफ खान डी आई जी रेंज देवी पाटन मंडल द्वारा पयागपुर थाना का किया गया औचक निरीक्षण
लेख / शोध ब्रेकिंग हिन्दी

संगठन से आगे का संदेश: रामदत्त चक्रधर ने बताया राष्ट्र निर्माण का वह सूत्र जो बदल सकता है भारत का भविष्य

D

Dainik India News

68 views
संगठन से आगे का संदेश: रामदत्त चक्रधर ने बताया राष्ट्र निर्माण का वह सूत्र जो बदल सकता है भारत का भविष्य

जब रामदत्त चक्रधर ने पूछा— राष्ट्र महान कैसे बनेगा? सवाल में छिपा है भारत के भविष्य का दर्शन"

Article image

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन अवसर पर सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर का उद्बोधन केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम का संबोधन नहीं था, बल्कि भारत के भविष्य को लेकर प्रस्तुत एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि का उद्घोष था। उनके विचारों में संगठन की सीमाओं से परे जाकर उस राष्ट्रदर्शन की झलक दिखाई दी, जो व्यक्ति निर्माण को राष्ट्र निर्माण का आधार मानता है और चरित्र, समरसता तथा आत्मबोध को राष्ट्रीय शक्ति का वास्तविक स्रोत बताता है।

आज जब विश्व का राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब यह प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है कि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति क्या होती है? क्या वह केवल आर्थिक विकास, आधुनिक तकनीक और विशाल अवसंरचनाओं से निर्मित होती है अथवा उसके पीछे कोई गहरा सांस्कृतिक और नैतिक आधार भी होता है? रामदत्त चक्रधर के उद्बोधन का मूल स्वर इसी प्रश्न का उत्तर खोजता हुआ प्रतीत हुआ।

उन्होंने वर्ष 2026 को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का महत्त्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए स्मरण कराया कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, गुरु तेगबहादुर के बलिदान की 350वीं वर्षगाँठ, वंदेमातरम् के 150 वर्ष तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का संगम भारतीय समाज को अपने राष्ट्रीय चरित्र का पुनर्मूल्यांकन करने का अवसर प्रदान करेगा। यह केवल उत्सवों का वर्ष नहीं होगा, बल्कि आत्ममंथन और आत्मजागरण का भी कालखंड सिद्ध हो सकता है।

रामदत्त चक्रधर ने जिस आत्मबोध की चर्चा की, वह वस्तुतः भारतीय समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आधुनिक जीवनशैली ने व्यक्ति को सुविधाएँ तो दी हैं, किंतु उसे समाज और राष्ट्र से दूर भी किया है। परिवारों का विघटन, सामाजिक दूरी, सांस्कृतिक विस्मृति और बढ़ती आत्मकेन्द्रिकता हमारे सामने गंभीर चुनौतियों के रूप में उपस्थित हैं। ऐसे समय में शाखा की अवधारणा केवल एक संगठनात्मक गतिविधि नहीं रह जाती, बल्कि वह व्यक्ति को अपने कर्तव्य, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराने वाली जीवन-पद्धति के रूप में सामने आती है।

उनका यह कथन विशेष रूप से विचारणीय है कि राष्ट्र भवनों, उद्योगों और संसाधनों से नहीं, बल्कि चरित्रवान नागरिकों से महान बनता है। इतिहास इस सत्य का साक्षी है कि जिन समाजों ने अपने नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाए रखा, वही दीर्घकाल तक विश्व का नेतृत्व कर सके। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, स्वामी विवेकानन्द और रवीन्द्रनाथ ठाकुर जैसे महापुरुषों ने भी राष्ट्र निर्माण का मूल आधार व्यक्ति के चरित्र और समाज की चेतना को ही माना था।

अपने संबोधन में चक्रधर ने विभाजन की त्रासदी, चीन युद्ध और कोरोना महामारी जैसे कठिन कालखंडों में स्वयंसेवकों द्वारा किए गए सेवा कार्यों का उल्लेख किया। यह स्मरण इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रभक्ति का वास्तविक अर्थ संकट के समय समाज के साथ खड़े होने में ही निहित है। सेवा, समर्पण और संगठन का यह भाव ही किसी भी राष्ट्र को भीतर से मजबूत बनाता है।

सामाजिक समरसता, परिवार व्यवस्था का संरक्षण, छुआछूत और जातिगत भेदभाव का उन्मूलन तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर उनकी स्पष्ट चिंता यह संकेत देती है कि राष्ट्र निर्माण केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का व्यापक अभियान है। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति दूसरे के सुख-दुःख को अपना समझने लगे, तब राष्ट्रीय एकात्मता का वास्तविक स्वरूप सामने आता है।

भारतीय सभ्यता के मूल स्वरूप का गंभीर और निष्पक्ष अध्ययन यह प्रमाणित करता है कि यहाँ मनुष्य का मूल्यांकन उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके गुण, कर्म, तप, ज्ञान और लोकमंगलकारी योगदान से होता था। महर्षि विश्वामित्र ने क्षत्रिय कुल में जन्म लेकर अपने पुरुषार्थ और तपबल से ब्रह्मर्षि का सर्वोच्च पद प्राप्त किया। महर्षि वेदव्यास मछुआरा समुदाय से संबंधित सत्यवती के पुत्र थे, किन्तु उन्होंने वेदों का संहिताकरण कर भारतीय ज्ञान परंपरा को अमरत्व प्रदान किया। महात्मा विदुर दासीपुत्र कहे गए, लेकिन उनकी नीति, धर्मबुद्धि और न्यायप्रियता के समक्ष साम्राज्यों का वैभव भी नतमस्तक था। देवर्षि नारद की माता का उल्लेख अनेक ग्रंथों में एक सेविका के रूप में मिलता है, किन्तु वे त्रिलोक के पूज्य ऋषि बने। महर्षि वशिष्ठ, अगस्त्य, अत्रि, भृगु, गौतम, भारद्वाज, कण्व, याज्ञवल्क्य तथा महर्षि वाल्मीकि जैसे महामनीषियों ने यह सिद्ध किया कि ज्ञान और साधना के समक्ष जन्म का कोई बंधन नहीं टिकता। विशेष रूप से महर्षि वाल्मीकि का जीवन इस सनातन सत्य का उद्घोष है कि मनुष्य अपने कर्म, साधना और आत्मपरिवर्तन से महान बनता है। वस्तुतः भारतीय वर्ण व्यवस्था का मूल स्वरूप सामाजिक दायित्वों के सुव्यवस्थित विभाजन का था, न कि मनुष्यों के सम्मान और अधिकारों के विभाजन का। यही कारण है कि सनातन चिंतन का शाश्वत संदेश रहा है— “जन्मना जायते शूद्रः, संस्काराद् द्विज उच्यते”। अर्थात् मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके संस्कार, ज्ञान, चरित्र और कर्तव्यनिष्ठा से होती है। रामदत्त चक्रधर के सामाजिक समरसता संबंधी विचार इसी प्राचीन भारतीय दृष्टि के आधुनिक प्रतिरूप के रूप में देखे जा सकते हैं।

लखनऊ में सम्पन्न यह वर्ग वस्तुतः प्रशिक्षण का समापन नहीं, बल्कि एक विचारयात्रा का विस्तार था। रामदत्त चक्रधर का संदेश स्पष्ट है कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक उपलब्धियों से सुरक्षित नहीं होगा। उसके लिए चरित्रवान नागरिक, संगठित समाज, मजबूत परिवार, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति समर्पित चेतना आवश्यक है। यदि यह भाव समाज में व्यापक रूप से विकसित होता है, तो भारत का वैभवोदय केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि निकट भविष्य की वास्तविकता बन सकता है। वास्तव में यही वह राष्ट्रदृष्टि है, जो संगठन को उद्देश्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्जागरण का साधन मानती है; और यही वह विचार है, जो आने वाले भारत को केवल समृद्ध ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से जागृत, नैतिक रूप से सुदृढ़ और विश्व के लिए मार्गदर्शक राष्ट्र बनाने की क्षमता रखता है।

टैग्स:

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहले टिप्पणी करें!