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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखण्ड महोत्सव का शुभारम्भ किया

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखण्ड महोत्सव का शुभारम्भ किया

हरिंद्र सिंह/डीडी इंडिया न्यूज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा है कि पर्यावरण, लोक भाषाओं, बोलियों, लोकगाथाओं, लोक परम्पराओं के संरक्षण और सुरक्षा का प्रयास हम सभी देशवासियों का उत्तरदायित्व है। उन्होंने रक्षा सेवाओं में उत्तराखण्ड के युवाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड से निकली नदियों का पावन जल पेयजल और सिंचाई के रूप में प्यास बुझाने और अन्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए पर्यावरण और नदियों के संरक्षण का कार्य वृहद् स्तर पर किये जाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री जी आज यहां पं0 गोविन्द बल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन, गोमती तट, लखनऊ में आयोजित उत्तराखण्ड महोत्सव के शुभारम्भ समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पदम् पुरस्कारों से सम्मानित प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ0 अनिल प्रकाश जोशी तथा सामाजिक कार्यों में विशेष योगदान के लिए ब्रज प्रान्त प्रचारक डॉ0 हरीश रौतेला को ‘उत्तराखण्ड गौरव सम्मान’ से विभूषित किया। डॉ0 हरीश रौतेला का सम्मान उनके प्रतिनिधि श्री प्रमोद रौतेला ने ग्रहण किया। मुख्यमंत्री जी ने उत्तराखण्ड महापरिषद के पूर्व अध्यक्ष स्व0 मोहन सिंह बिष्ट के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि स्व0 बिष्ट जी ने उत्तराखण्ड महापरिषद को नई ऊंचाइयां दी।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तराखण्ड ने देश की प्रगति, विकास व समृद्धि में सराहनीय योगदान किया है। उत्तराखण्ड की भूमि देवभूमि है, जहां पर सभी को गौरव की अनुभूति होती है। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ जैसे पावन स्थल तथा देवालय उत्तराखण्ड में हैं, जो पूरे देश को एक सूत्र में बांधते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड से निकली नदियां मानव सृष्टि और विकास का आधार हैं। उत्तर प्रदेश के तीन पूर्व मुख्यमंत्री स्व0 पं0 गोविन्द बल्लभ पंत, स्व0 श्री हेमवती नन्दन बहुगुणा तथा स्व0 श्री नारायण दत्त तिवारी उत्तराखण्ड के थे। इनके अलावा, पूर्व रक्षा मंत्री श्री के0सी0 पंत तथा चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ जनरल विपिन रावत तथा सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल भी उत्तराखण्ड से सम्बन्ध रखते हैं।

मुख्यमंत्री जी ने ंने उत्तराखण्ड महोत्सव के लिए आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं देेते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव सामाजिक व सांस्कृतिक एकता को उजागर करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड महापरिषद ने साहित्यिक, सामाजिक, सांस्कृतिक क्षेत्रों सहित पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य किया है, जिसे और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड की अच्छाइयांे को प्रचारित-प्रसारित किये जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज जब कोरोना से विश्व के कई देश त्रस्त और पस्त हैं, तब उत्तराखण्ड महापरिषद द्वारा उत्तराखण्ड महोत्सव का पूरी भव्यता के साथ आयोजन किया जा रहा है। यह कोरोना के प्रति किये गये संघर्ष की सफलता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि 09 नवम्बर, 2000 को उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ था। तब से लेकर अब तक 21 वर्षाें की यात्रा में इस राज्य ने प्रगति और विकास के नये आयाम तय किये हैं।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वृहद् कार्य योजना बनायी जानी चाहिए। इस कार्य योजना के संचालन तथा क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश सरकार भरपूर सहयोग करेगी। उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्तमान सरकार द्वारा व्यापक अभियान चलाया गया है। वर्ष 2017 से लेकर अब तक 100 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है, जिसमें फलदार, इमारती, औषधीय पौधे शामिल हैं। इसी प्रकार जल संरक्षण तथा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किये जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों के साथ-साथ अन्तर्विभगीय समन्वय के माध्यम से वृहद् अभियान चलाना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड महापरिषद द्वारा दिए गये सुझावों तथा प्रस्तावों पर उत्तर प्रदेश सरकार विचार कर हर सम्भव सहयोग प्रदान करेगी।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पदम् पुरस्कार प्राप्त प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ0 अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का देश के विकास में बड़ा योगदान है। हवा, मिट्टी, जंगल, पानी के संरक्षण के लिए उत्तराखण्ड निरन्तर कार्य कर रहा है। हरित क्रांति और श्वेत क्रांति में भी उत्तराखण्ड की भूमिका रही है। उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी उत्तराखण्ड से सम्बन्धित रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के कर-कमलों से सम्मानित होकर वे गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मुख्यमंत्री जी निरन्तर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जी0डी0पी0 की अवधारणा पश्चिमी देशों से आयी है। इसी प्रकार हम सकल पर्यावरण उत्पाद की अवधारणा को साकार कर सकते हैं।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्यमंत्री जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने डॉ0 करुणा पाण्डेय की पुस्तक ‘कुमांऊनी गीतों से भीगते संस्कार’ का विमोचन किया तथा नृत्य नाटिका ‘उषा परिणय’ का अवलोकन किया। उत्तराखण्ड महापरिषद के अध्यक्ष श्री हरीश चन्द्र पंत ने अतिथियों का स्वागत तथा महासचिव श्री भरत सिंह बिष्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर नगर विकास मंत्री श्री आशुतोष टण्डन, विधायी एवं न्याय मंत्री श्री बृजेश पाठक, जल शक्ति मंत्री डॉ0 महेन्द्र सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, उत्तराखण्ड महापरिषद के पदाधिकारीगण, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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