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लोकतांत्रिक परंपराओं का महाकुंभ: लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

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Dainik India News

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लोकतांत्रिक परंपराओं का महाकुंभ: लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

दैनिक इंडिया न्यूज़,नई दिल्ली/लखनऊ।भारतीय संसदीय लोकतंत्र को नई दिशा देने वाला 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) 19 जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश विधानसभा, लखनऊ में आरंभ होने जा रहा है। यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि देश की विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को पुनर्परिभाषित करने वाला राष्ट्रीय मंथन सिद्ध होने जा रहा है।


सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। उद्घाटन संबोधन में वे संवैधानिक मूल्यों, विधायी मर्यादाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए संसद और विधानसभाओं को तकनीक-सक्षम, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।


स्वागत सत्र में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों का अभिनंदन करेंगे, जबकि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के संबोधन सम्मेलन को वैचारिक गंभीरता प्रदान करेंगे।


तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देश की विधायी प्रणाली के समक्ष उपस्थित समकालीन चुनौतियों पर गहन विमर्श किया जाएगा। विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग पर विशेष चर्चा होगी। इसके साथ ही विधायकों के क्षमता निर्माण, संस्थागत दक्षता और लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। विधायिका की जनता के प्रति जवाबदेही इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय रहेगा।
21 जनवरी 2026 को सम्मेलन का समापन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के वैदिक्टरी संबोधन के साथ होगा। समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह तथा विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना उपस्थित रहेंगे और अपने विचार व्यक्त करेंगे।


उल्लेखनीय है कि इस राष्ट्रीय सम्मेलन से पूर्व 19 जनवरी 2026 को ही भारत की विधायी संस्थाओं के सचिवों का 62वां सम्मेलन भी लखनऊ में आयोजित किया जाएगा, जिसमें संसदीय प्रशासन, प्रक्रियात्मक सुधार और संस्थागत समन्वय से जुड़े विषयों पर मंथन होगा।


लखनऊ में आयोजित होने जा रहा यह सम्मेलन भारत की लोकतांत्रिक चेतना का सशक्त प्रतीक बनकर उभरेगा, जहाँ से उठने वाले विचार आने वाले वर्षों में देश की संसदीय संस्कृति और विधायी दिशा को आकार देंगे।

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