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समस्त संत समाज को गुप्त नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं-जितेन्द्र प्रताप सिंह

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Dainik India News

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समस्त संत समाज को गुप्त नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं-जितेन्द्र प्रताप सिंह

साधकों के लिए विशेष महत्व

दैनिक इंडिया न्यूज़ 6 जुलाई 2024 । राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी भारतवासियों को गुप्त नवरात्रि की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा, "गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए एक विशेष अवसर है जब वे देवी दुर्गा के गुप्त स्वरूपों की पूजा कर सकते हैं और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में बढ़ सकते हैं। यह समय साधकों के लिए आत्म-नियंत्रण, आत्म-अनुशासन और आत्म-संयम की दिशा में कार्य करने का होता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान की गई साधना से साधकों को अद्वितीय सिद्धियां प्राप्त होती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।"

उन्होंने सभी साधकों से आग्रह किया कि वे इस गुप्त नवरात्रि के समय को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ व्यतीत करें और देवी दुर्गा के गुप्त स्वरूपों की पूजा-अर्चना करें। यह समय साधकों के लिए आत्मिक और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर है, जिसका लाभ उठाकर वे अपनी साधना को और अधिक सशक्त बना सकते हैं।

गुप्त नवरात्रि 6 जुलाई 2024 से आरंभ हो रही है, और इसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह पर्व चार बार मनाया जाता है: चैत्र, आषाढ़, आश्विन, और माघ। इनमें चैत्र और आश्विन की नवरात्रि सर्वविदित हैं, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से साधकों के लिए अति प्रिय है क्योंकि यह साधना और तंत्र-मंत्र के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है, जिनमें काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं। यह समय साधकों के लिए आध्यात्मिक साधना, तांत्रिक क्रियाएं और विशेष पूजा-अर्चना के लिए अत्यधिक उपयुक्त होता है। माना जाता है कि इस दौरान की गई साधना से साधकों को अद्वितीय शक्तियां प्राप्त होती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

इस बार गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन रवि पुष्य योग भी बन रहा है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बना देता है। रवि पुष्य योग को शुभ और सिद्धिदायक माना जाता है। इस योग में की गई पूजा और साधना से साधकों को विशेष फल की प्राप्ति होती है।

वैदिक साक्ष्य और पुराणों में उल्लेख

गुप्त नवरात्रि का उल्लेख विभिन्न वेद, पुराण और वेदांत ग्रंथों में मिलता है। देवी भागवत पुराण में गुप्त नवरात्रि का महत्व विशेष रूप से वर्णित है। इसमें कहा गया है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान की गई साधना साधकों को अद्वितीय सिद्धियां प्रदान करती हैं।

शक्ति संप्रदाय के अनुयायियों के लिए गुप्त नवरात्रि का समय अत्यधिक महत्वपूर्ण है। 'मार्कंडेय पुराण' में भी गुप्त नवरात्रि का उल्लेख मिलता है, जहां कहा गया है कि इस समय में देवी के गुप्त स्वरूपों की पूजा की जाती है, जो साधकों को आत्मिक और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में अग्रसर करती है।

'देवी महात्म्य' में भी गुप्त नवरात्रि के महत्व का वर्णन मिलता है, जहां कहा गया है कि इस दौरान की गई साधना साधकों को अत्यधिक लाभ पहुंचाती है। वैदिक साहित्य में भी गुप्त नवरात्रि के समय की गई साधना की महत्ता को वर्णित किया गया है।

गुप्त नवरात्रि का यह विशेष समय साधकों को अपने भीतर की दिव्य शक्तियों को जागृत करने और अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर प्रदान करता है। देवी दुर्गा की कृपा से सभी साधक अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त करें, यही हमारी कामना है।

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