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आश्वासनों की फाइलों में कैद दिव्यांग शिक्षकों की पीड़ा! लखनऊ के जीपीओ पर फूटा आक्रोश, आखिर कब जागेगा बेसिक शिक्षा विभाग?

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आश्वासनों की फाइलों में कैद दिव्यांग शिक्षकों की पीड़ा! लखनऊ के जीपीओ पर फूटा आक्रोश, आखिर कब जागेगा बेसिक शिक्षा विभाग?

असाध्य रोगों से जूझ रहे दिव्यांग और दिव्यांग दंपति शिक्षक स्थानांतरण के लिए भटकने को विवश; बोले—मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

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उदय राज ,दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।राजधानी लखनऊ में दिव्यांग शिक्षकों की स्थानांतरण संबंधी समस्याओं को लेकर असंतोष एक बार फिर मुखर हो उठा। सोमवार को जीपीओ प्रांगण में दिव्यांग महागठबंधन उत्तर प्रदेश के बैनर तले प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे दिव्यांग शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन कर बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग असाध्य रोगों से पीड़ित दिव्यांग शिक्षकों और दिव्यांग दंपति शिक्षकों का गैर अंतर्जनपदीय स्थानांतरण सुनिश्चित कराना रही।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि संबंधित स्थानांतरण व्यवस्था का प्रावधान होने के बावजूद पात्र शिक्षकों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि इस विषय को लेकर पहले भी विरोध दर्ज कराया गया था और उस समय आश्वासन मिला था, लेकिन इसके बाद भी स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इसी कथित निष्क्रियता से क्षुब्ध शिक्षकों ने एक बार फिर राजधानी में धरना देकर अपनी मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

आंदोलनकारियों ने कहा कि असाध्य रोगों से जूझ रहे दिव्यांग शिक्षकों के लिए स्थानांतरण केवल सेवा संबंधी औपचारिकता नहीं, बल्कि उपचार, पारिवारिक देखभाल और दैनिक जीवन की कठिनाइयों से जुड़ा संवेदनशील प्रश्न है। दिव्यांग दंपति शिक्षकों के सामने भी पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन और कार्यस्थल से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में उनकी परिस्थितियों के अनुरूप स्थानांतरण पर विचार किया जाना आवश्यक है।

प्रदर्शनकारियों ने विभागीय स्तर पर कथित पक्षपात और प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए। उनका कहना था कि जब पात्रता के बावजूद मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तो प्रभावित शिक्षकों के सामने अपनी समस्या के समाधान के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने के अतिरिक्त विकल्प सीमित रह जाते हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभाग का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।

धरने के दौरान शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि वे अपनी मांगों से संबंधित विज्ञप्ति लेकर पहुंचे, लेकिन उसे स्वीकार करने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी या प्रतिनिधि सामने नहीं आया। इससे उनकी निराशा और बढ़ गई। उनका सवाल था कि जब पूर्व में आश्वासन दिए जाने के बाद भी समाधान नहीं निकला और वर्तमान में भी उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं मिला, तो वे अपनी समस्याएं आखिर किसके समक्ष रखें?

दिव्यांग महागठबंधन उत्तर प्रदेश के बैनर तले एकत्र शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने शासन और बेसिक शिक्षा विभाग से प्रकरण पर संवेदनशीलतापूर्वक विचार करने, पात्र शिक्षकों की स्थिति का परीक्षण करने और नियमानुसार स्थानांतरण प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की।

अब प्रश्न यह है कि क्या संबंधित विभाग इन शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए ठोस पहल करेगा, अथवा स्थानांतरण की प्रतीक्षा और आश्वासनों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा? फिलहाल प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं।

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