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'बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ' अभियान के पावन मंच पर हुआ संत समागम

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Dainik India News

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'बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ' अभियान के पावन मंच पर हुआ संत समागम

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को प्राप्त हुआ धर्माचार्यों का दिव्य आशीर्वाद, राष्ट्रकल्याण एवं धर्मसंरक्षण का लिया गया संकल्प

दैनिक इंडिया न्यूज़ नई दिल्ली।भारतीय सनातन संस्कृति, राष्ट्रधर्म, नारी-सशक्तिकरण एवं लोकमंगल की दिव्य चेतना से अनुप्राणित 'बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ' अभियान के अंतर्गत आयोजित भव्य समारोह आध्यात्मिक गरिमा, वैदिक परंपरा और राष्ट्रोत्थान के संकल्प का अनुपम संगम सिद्ध हुआ। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूज्य संत-महात्माओं एवं धर्माचार्यों के सान्निध्य में आध्यात्मिक विमर्श किया तथा भारतीय संस्कृति, गौसंरक्षण, मातृशक्ति के सम्मान और राष्ट्रनिर्माण में संत परंपरा की अनिवार्य भूमिका पर गंभीर विचार-विमर्श किया।

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कार्यक्रम में परम् पूज्य गौसेवक एवं गौरक्षक श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर निजस्वरूपानंद दाती जी महाराज, श्रीमद् जगद्गुरु प्रपन्नाचार्य महाराज, राष्ट्रीय संत विवेक मुनि महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी शैलेसानंद महाराज, महामंडलेश्वर हरिओम गिरि जी महाराज, महंत भोला गिरी जी महाराज, महंत सूरज गिरी जी महाराज, करोल बाग के सांसद योगेंद्र चंदोलिया सहित अनेक पूज्य संतों, धर्माचार्यों एवं विशिष्ट जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को आध्यात्मिक वैभव से आलोकित कर दिया। वैदिक ऋचाओं, मंगलाचरण एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रचेतना का सजीव प्रतीक बन गया।

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समारोह के दौरान श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी अवधेश प्रपन्नाचार्य महाराज का मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा अंगवस्त्र अर्पित कर विधिवत् अभिनंदन एवं सम्मान किया गया। यह सम्मान केवल किसी संत का अभिनंदन नहीं, बल्कि सनातन आध्यात्मिक परंपरा, वैदिक संस्कृति और धर्मपीठों के प्रति शासन की श्रद्धा एवं सम्मान का प्रतीक बनकर उभरा। संत समाज ने भी मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन को धर्मनिष्ठ, लोकहितकारी एवं राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित बताते हुए शुभाशीष प्रदान किया।

आध्यात्मिक संवाद के क्रम में श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी अवधेश प्रपन्नाचार्य महाराज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को आशीर्वचन प्रदान करते हुए मंगलकामना व्यक्त की कि उनके नेतृत्वकाल में आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सहित समस्त सनातन पर्व आध्यात्मिक गरिमा, सांस्कृतिक भव्यता और सामाजिक समरसता के साथ संपन्न हों। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि उनके नेतृत्व में ऐसे निर्णय लिए जाएँ जो धर्मसंरक्षण, राष्ट्ररक्षा, प्रदेश की समृद्धि, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के वाहक सिद्ध हों। पूज्य आचार्य ने कहा कि जब शासन धर्म, संस्कृति और लोककल्याण के आदर्शों से प्रेरित होकर कार्य करता है, तब राष्ट्र की सुरक्षा, समाज की स्थिरता और जनकल्याण स्वतः सुदृढ़ होते हैं।

संतों ने अपने उद्बोधन में कहा कि "यतो धर्मस्ततो जयः"—जहाँ धर्म है, वहीं विजय है। राष्ट्र की अखंडता, सामाजिक समरसता, गौसंरक्षण, मातृशक्ति के सम्मान तथा बेटियों की शिक्षा को भारतीय संस्कृति का मूलाधार बताते हुए उन्होंने समाज से इन आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। संत समाज ने स्पष्ट किया कि आध्यात्मिक जागरण ही सशक्त राष्ट्र निर्माण का प्रथम सोपान है।

कार्यक्रम का समापन समस्त संत-महात्माओं द्वारा राष्ट्र की अखंडता, विश्वशांति, गौसंवर्धन, नारी गरिमा, सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक मंगलकामना के साथ हुआ।

उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और लोकमंगल के प्रति सामूहिक संकल्प का दिव्य उत्सव बताया, जिसने उपस्थित जनसमुदाय को आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रसेवा के भाव से अनुप्राणित कर दिया।

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