सुलतानपुर में रुपये के लेनदेन से जुड़ा विवाद न्यायालय पहुंचा; अधिवक्ता, तत्कालीन कोतवाल और पुलिस अधिकारियों पर शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप, सीजेएम ने तलब की विस्तृत रिपोर्ट

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।सुलतानपुर में रुपये के लेनदेन से शुरू हुआ एक विवाद अब पुलिस की कार्रवाई और न्यायालयीन जांच के घेरे में पहुंच गया है। कोतवाली नगर क्षेत्र के निवासी संतराम शुक्ला ने अधिवक्ता अब्बास अहमद, तत्कालीन थाना प्रभारी राम आशीष उपाध्याय सहित पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। शिकायत में करीब एक करोड़ रुपये के चेक पर कथित रूप से जबरन हस्ताक्षर कराने से लेकर लखनऊ से पकड़कर थाने लाने, हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां डालकर प्रताड़ित करने तक के आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों से विस्तृत आख्या तलब की है।
शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र के अनुसार, मुकदमे की पैरवी और आवश्यक कागजात तैयार कराने के नाम पर अधिवक्ता अब्बास अहमद को पहले करीब 30 हजार रुपये नकद दिए गए। इसके बाद भी कथित रूप से कई बार 10 से 20 हजार रुपये की रकम दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि अपेक्षित कार्यवाही नहीं होने पर जब उसने रकम वापस मांगी तो विवाद बढ़ गया और मामला दूसरे मोड़ पर पहुंच गया।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 20 अक्तूबर 2021 को शिकायतकर्ता की पुत्री प्रियंशी शुक्ला के बैंक खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 1.50 लाख रुपये अब्बास अहमद के खाते में स्थानांतरित किए गए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, बाद में रकम वापस मांगने पर उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की गई। इसी घटनाक्रम के बाद विवाद ने पुलिस और न्यायालय का रास्ता पकड़ा।
लखनऊ से पकड़कर लाने का आरोप
संतराम शुक्ला ने अदालत में आरोप लगाया कि 28 जून 2023 को पुलिस और एसओजी की टीम ने उसे लखनऊ के गोमतीनगर स्थित सुलभ आवास कॉलोनी से पकड़कर कोतवाली नगर लाया। शिकायत के मुताबिक उसे लगभग तीन दिन तक थाने में बैठाए रखा गया और इस दौरान हाथ में हथकड़ी तथा पैरों में बेड़ियां डालकर प्रताड़ित किया गया। ये आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र का हिस्सा हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
मामले में सबसे गंभीर आरोप एक करोड़ रुपये के चेक से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसके पास मौजूद एक करोड़ रुपये के चेक पर कथित तौर पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए। आरोप है कि बाद में चेक की रकम दूसरे खाते में लगाने का प्रयास किया गया और चेक अनादरित होने के बाद उसके आधार पर परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) के तहत कार्रवाई कराई गई। इस आरोप की वास्तविकता अब न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों और पुलिस की आख्या के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
सीजेएम ने तलब की विस्तृत आख्या
मामले में 25 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(4)(क) के तहत तत्कालीन थाना प्रभारी राम आशीष उपाध्याय और क्षेत्राधिकारी नगर से कथित घटना के संबंध में विस्तृत आख्या तलब की है। अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष को निर्देश दिया है कि धारा 175(4)(ख) के तहत प्राप्त आख्या/प्रत्यावेदन के आधार पर अपनी सम्यक आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
वादी संतराम शुक्ला की ओर से अधिवक्ता बेलाल अहमद ने न्यायालय में पक्ष रखा। अब न्यायालय के समक्ष पुलिस की रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेख इस पूरे घटनाक्रम की अगली दिशा तय करेंगे। फिलहाल मामला आरोपों के स्तर पर है और संबंधित अधिवक्ता तथा पुलिस अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध सामग्री में दर्ज नहीं है। इसलिए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालयीन प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही मानी जा सकेगी।