ब्यूटीशियन प्रशिक्षण केंद्र का दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ; पवन सिंह चौहान ने प्रशिक्षार्थियों को बांटे प्रशिक्षण बैग, जितेन्द्र प्रताप सिंह ने संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्रा से जोड़ा

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ/नई दिल्ली।किसी युवा के हाथ में हुनर आ जाए तो उसके सामने अवसरों के द्वार स्वयं खुलने लगते हैं। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए समर्थ भारत के तत्वावधान में ब्यूटीशियन प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, अति विशिष्ट अतिथि संस्कृतभारती के क्षेत्र संपर्क प्रमुख (पूर्वी उत्तर प्रदेश) जितेन्द्र प्रताप सिंह, विशिष्ट अतिथि शंकर तथा मुख्य वक्ता रजनी सिंह ने दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण केंद्र की औपचारिक शुरुआत की। कार्यक्रम में प्रशिक्षण को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए प्रशिक्षार्थियों को मनोयोग से सीखने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पवन सिंह चौहान ने प्रशिक्षार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि परिश्रम, अनुशासन और सीखने की ललक व्यक्ति को सामान्य परिस्थितियों से उठाकर असाधारण उपलब्धियों तक पहुंचा सकती है। उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी जमीनी स्तर से कार्य प्रारंभ किया और निरंतर परिश्रम के बल पर आगे बढ़े। आज प्रशिक्षार्थियों के बीच उपस्थित होकर उन्हें सहयोग करने का अवसर मिलना उनके लिए संतोष का विषय है। उनका संदेश स्पष्ट था कि संसाधनों की कमी कभी लक्ष्य की राह में स्थायी अवरोध नहीं बन सकती, यदि संकल्प दृढ़ हो।

इसी क्रम में जितेन्द्र प्रताप सिंह ने प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण के प्रति गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने पवन सिंह चौहान की जीवन-यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि सीतापुर में सामान्य पारिवारिक परिवेश से निकले एक व्यक्ति ने छोटे-छोटे उद्योग-व्यवसाय से अपनी यात्रा आरंभ की और निरंतर संघर्ष, परिश्रम तथा दूरदृष्टि के माध्यम से आज विश्वविद्यालय के अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य जैसे दायित्वों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं, बल्कि निरंतर प्रयासों की परिणति होती है। पवन सिंह चौहान की जीवन यात्रा को उन्होंने प्रशिक्षार्थियों के लिए यह संदेश बताया कि शुरुआत कितनी भी छोटी हो, लक्ष्य बड़ा हो तो मंजिल तक पहुंचने का मार्ग अवश्य बनता है।

मुख्य वक्ता रजनी सिंह ने प्रशिक्षार्थियों को मन लगाकर अध्ययन और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए सामान्यतः बड़ी धनराशि खर्च करनी पड़ती है, उन्हें समर्थ भारत के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध कराया जाना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने समर्थ भारत के इस प्रयास को कौशल-विकास की दिशा में उपयोगी पहल बताते हुए प्रशिक्षार्थियों से इसका अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान पवन सिंह चौहान ने प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण बैग भी वितरित किए। बैग प्राप्त करते हुए प्रशिक्षार्थियों के उत्साह में यह विश्वास स्पष्ट दिखाई दिया कि उनके हाथों में आया यह संसाधन केवल प्रशिक्षण सामग्री रखने का माध्यम नहीं, बल्कि उनके निर्धारित लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का साधन है। सम्मान के इस भाव ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया तथा उन्हें अपने हुनर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में समर्थ भारत से जुड़े स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। प्रशिक्षण केंद्र को व्यवस्थित रूप देने से लेकर प्रशिक्षार्थियों के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित करने तक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रदेश संयोजक डॉ. विवेक, मनोज मिश्रा सहित अन्य सहयोगियों की उपस्थिति और सहभागिता ने आयोजन को सार्थक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम में मौजूद प्रत्येक कार्यकर्ता ने कौशल-आधारित शिक्षा को आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनाने की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया।
समर्थ भारत का यह प्रयास केवल एक प्रशिक्षण केंद्र के शुभारंभ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से उन युवाओं के लिए अवसर सृजित करने का संदेश भी सामने आया, जो आर्थिक कारणों से महंगे व्यावसायिक प्रशिक्षण से वंचित रह जाते हैं। निःशुल्क प्रशिक्षण, आवश्यक संसाधन और मार्गदर्शन का समन्वय उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ा सकता है। यही कारण रहा कि कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रशिक्षण को प्रमाणपत्र तक सीमित न रखकर उसे वास्तविक कौशल और आजीविका के साधन में परिवर्तित करने पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम का समापन प्रशिक्षार्थियों में नए उत्साह और आत्मविश्वास के साथ हुआ। आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि समाज, संस्थाएं और सक्षम नेतृत्व मिलकर युवाओं को अवसर उपलब्ध कराएं तो हुनर को रोजगार और प्रशिक्षण को आत्मनिर्भरता में बदलने की संभावनाएं कहीं अधिक व्यापक हो सकती हैं। समर्थ भारत की इस पहल ने इसी संभावना को एक ठोस दिशा देने का प्रयास किया है।