जिला बदर अपराधियों पर रखें कड़ी नजर, पुलिस-अभियोजन के बेहतर समन्वय से मजबूत पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश

दैनिक इंडिया न्यूज़ , मऊ।जनपद में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा अपराधियों को त्वरित एवं प्रभावी दंड दिलाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी आनंद वर्धन की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में कानून व्यवस्था एवं अभियोजन शाखा की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जघन्य अपराधों में विवेचना से लेकर न्यायालय में पैरवी तक किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मजबूत साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर प्रभावी पैरवी सुनिश्चित कर अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाई जाए।
समीक्षा के दौरान अभियोजन शाखा की जून माह की प्रगति प्रस्तुत की गई। सत्र न्यायालय में आईपीसी के 22 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 6 मामलों में दोषसिद्धि हुई, जबकि 16 में अभियुक्त बरी हुए। पॉक्सो एक्ट के तीन मामलों में दो में दोषसिद्धि हुई। अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 268 मामलों का निस्तारण किया गया, जिनमें अधिकांश मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई। जून माह में सत्र एवं अधीनस्थ न्यायालयों को मिलाकर कुल 296 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 210 मामलों में सजा सुनाई गई।
जिलाधिकारी ने गंभीर अपराधों में आरोपियों के बरी होने और जमानत मिलने की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस एवं अभियोजन विभाग को बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विवेचना की गुणवत्ता, समय पर चार्जशीट दाखिल करना और न्यायालय में सशक्त पैरवी ही दोषसिद्धि का आधार है।
एससी/एसटी एक्ट के मामलों में जून माह के दौरान एक भी मुकदमे का निस्तारण न होने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसे मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर मजबूत साक्ष्यों के साथ प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही महिला उत्पीड़न, गैंगस्टर एक्ट और एससी/एसटी एक्ट के मामलों में चार्जशीट दाखिल करने में हो रही देरी पर भी संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी।
बैठक में जिलाधिकारी ने अवैध एवं जहरीली शराब के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश देते हुए पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार छापेमारी करने को कहा। उन्होंने गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर किए गए अपराधियों की सतत निगरानी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे तत्वों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए ताकि वे दोबारा आपराधिक गतिविधियों में शामिल न हो सकें।
बैठक में पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर, अपर जिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, संयुक्त निदेशक अभियोजन, सभी उपजिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।