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जितेंद्र प्रताप सिंह का आह्वान: “जिस समाज को अपने पूर्वजों का स्मरण नहीं, उसका भविष्य भी सुरक्षित नहीं”

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जितेंद्र प्रताप सिंह का आह्वान: “जिस समाज को अपने पूर्वजों का स्मरण नहीं, उसका भविष्य भी सुरक्षित नहीं”

स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दरबारी लाल अस्थाना जयंती समारोह में संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और संस्कारों का अद्भुत समागम; ‘वंदे मातरम् नृत्योत्सव’ ने किया भावविभोर

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दैनिक इंडिया न्यूज़ ,लखनऊ, 25 जुलाई। राष्ट्रनिर्माण का वास्तविक आधार केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, सभ्यता, पूर्वजों के आदर्शों और राष्ट्रनायकों के प्रति अटूट श्रद्धा है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुँचाने वाला एक अनुपम सांस्कृतिक आयोजन शनिवार को महानगर स्थित दयानंद कन्या इंटर कॉलेज परिसर में उस समय साकार हुआ, जब डॉ. दरबारी लाल अस्थाना ट्रस्ट द्वारा महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर समाजचिंतक एवं राष्ट्रभक्त डॉ. दरबारी लाल अस्थाना की जयंती पर आयोजित स्मृति समारोह-2026 में देशभक्ति, भारतीय संस्कृति और सनातन संस्कारों का विराट संगम देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि संस्कृत भारती न्यास अवध प्रांत के अध्यक्ष जितेंद्र प्रताप सिंह ने अपने प्रेरक उद्बोधन से उपस्थित जनसमूह, विशेषकर छात्राओं के हृदय में सांस्कृतिक चेतना की ऐसी ज्योति प्रज्वलित की, जिसने पूरे आयोजन को एक नए वैचारिक आयाम प्रदान कर दिया।

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अपने ओजस्वी संबोधन में जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि “जो समाज अपने पूर्वजों को भूल जाता है, वह अपनी पहचान और भविष्य—दोनों से विमुख हो जाता है।” उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी पारिवारिक परंपरा, वंशपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत का भी अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालिका को कम-से-कम अपने परदादा-परदादी के नाम अवश्य ज्ञात होने चाहिए, क्योंकि यही स्मृति राष्ट्र और समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखती है। उनके इस उद्बोधन को सभागार में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति ने दीर्घकाल तक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।

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इस अवसर पर वरिष्ठ नृत्य निर्देशिका रत्ना अस्थाना के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत “वंदे मातरम् नृत्योत्सव” ने भारतीय संस्कृति, मातृभूमि के प्रति समर्पण और राष्ट्रगौरव की ऐसी भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रस्तुत की कि पूरा सभागार भावविभोर हो उठा। देशभक्ति के विविध गीतों पर आधारित नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना का सशक्त संवाहक भी है। कलाकारों की मनोहारी अभिव्यक्तियाँ, अनुशासित प्रस्तुति और सांस्कृतिक सौंदर्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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समारोह का एक विशेष आकर्षण दयानंद कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. दिव्या श्रीवास्तव को प्रदान किया गया “स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दरबारी लाल अस्थाना स्मृति सम्मान-2026” रहा। शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रनिष्ठा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किए जाने पर उपस्थित जनसमूह ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन समस्त शिक्षकों के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक था, जो राष्ट्र के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।

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समारोह में स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दरबारी लाल अस्थाना के सुपुत्र एवं वरिष्ठ रंगकर्मी पुनीत अस्थाना ने अपने पिता के प्रेरक जीवनवृत्त का उल्लेख करते हुए बताया कि उनका जन्म 24 जुलाई 1905 को आगरा में हुआ था। वे केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि प्रखर वक्ता, समाज सुधारक और संगठनकर्ता भी थे। स्वतंत्रता संग्राम में उनके असाधारण योगदान के सम्मानस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें 15 अगस्त 1972 को राष्ट्र की ओर से ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया था। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक जागरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रेरणास्रोत बना रहा।

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कार्यक्रम के अगले चरण में मंच पर भारतीय लोकसंस्कृति का अनुपम वैभव साकार हुआ। उत्तराखंड के लोकप्रिय लोकगीत “रणसिंह बाजो, तुतरी बाजी” पर रीता मनराल एवं श्वेता मनराल ने पारंपरिक वेशभूषा में ऐसा मनोहारी लोकनृत्य प्रस्तुत किया कि सभागार तालियों की अनुगूँज से गूँज उठा। वहीं “वंदे मातरम्” की केंद्रीय थीम पर बाल कलाकारों—वीरा मौर्य, स्वस्तिका त्रिपाठी, रक्षा शर्मा, सानवी सिंह, अक्षिता सिंह, अवंतिका श्रीवास्तव, अग्रिमा चौरसिया एवं कृतिका सिंह—ने नृत्य और साहसिक स्टंट संयोजनों के माध्यम से स्वस्थ, सशक्त और राष्ट्रनिष्ठ भारत का प्रभावशाली संदेश दिया। स्वस्तिका मौर्य द्वारा प्रस्तुत “डॉ. दरबारी लाल अस्थाना” थीम पर भावनृत्य ने दर्शकों की आँखें नम कर दीं।

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देशभक्ति का उत्साह तब चरम पर पहुँच गया, जब विद्यालय के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ छात्र-छात्राओं ने “सबसे ऊँचा विजय पताका” और “ओ देश मेरे, तेरी शान पे सदके” जैसे प्रेरणादायी गीतों पर सामूहिक प्रस्तुति दी। उनकी स्वर-लहरियों और नृत्याभिव्यक्तियों ने पूरे वातावरण को राष्ट्रप्रेम की ऊर्जा से भर दिया। वहीं आयुषी सैनी, मनीषा सिंह एवं कशिश शर्मा द्वारा प्रस्तुत भावनृत्य ने कार्यक्रम को भावनात्मक ऊँचाई प्रदान की।

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कार्यक्रम का प्रभावी संचालन आराध्या तिवारी ने किया। इस अवसर पर रत्ना डांस अकादमी की संस्थापक एवं कोरियोग्राफर रत्ना अस्थाना तथा दयानंद कन्या इंटर कॉलेज की नृत्य निर्देशिका अनामिका चटर्जी का विशेष अभिनंदन किया गया। मुख्य अतिथि जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी प्रतिभागियों को पारितोषिक प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि भारत का भविष्य उन्हीं युवाओं के हाथों सुरक्षित है, जिनके मन में संस्कृति, राष्ट्र और संस्कार के प्रति समर्पण जीवित है।

समारोह में लक्ष्मण गौड़, विवेक पाण्डेय, संदीप बिसारिया, योगेश श्रीवास्तव, जयशंकर प्रसाद शुक्ल, दबीर सिद्दीकी, मधुर मोहन तिवारी, अनवर बेग, सुधा शर्मा, लक्ष्मी मौर्य, सविता श्रीवास्तव सहित अनेक शिक्षाविद्, साहित्यकार, समाजसेवी एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। संपूर्ण आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और शिक्षा एक ही मंच पर संगम करती हैं, तब केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों का चरित्र निर्माण होता है।

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