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संस्कृत-शोभायात्रा से दिल्ली में गूंजेगा संस्कृत का स्वर

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Dainik India News

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संस्कृत-शोभायात्रा से दिल्ली में गूंजेगा संस्कृत का स्वर

23 अगस्त को राजीव चौक तक निकलेगी संस्कृत-वाहन शोभायात्रा, संस्कृत को जनभाषा और भारतीय ज्ञान-परम्परा से जोड़ने का संदेश

दैनिक इंडिया न्यूज़, नई दिल्ली।राजधानी दिल्ली में संस्कृत के प्रति जन-जागरूकता और भारतीय ज्ञान-परम्परा के प्रति सामाजिक जुड़ाव को नई गति देने के उद्देश्य से संस्कृतभारती दिल्ली प्रान्त संस्कृत सप्ताह के अवसर पर 23 अगस्त को संस्कृत-शोभायात्रा आयोजित करेगा। संस्कृत-वाहनों के साथ निकलने वाली यह यात्रा प्रणव, केंद्रीय कार्यालय से राजीव चौक तक पहुंचेगी और वहां सामूहिक उद्घोष के साथ पूरे सर्कल का भ्रमण करेगी। आयोजन का उद्देश्य संस्कृत को केवल प्राचीन ग्रंथों और शास्त्रीय अध्ययन की भाषा के रूप में देखने की धारणा से आगे बढ़ाकर उसे जनजीवन, संवाद और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ना है।

संस्कृतभारती वर्ष 1981 से संस्कृत भाषा, साहित्य और भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण, विकास तथा प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय है। संस्था संस्कृत को सामान्य जन के बीच व्यवहार और संवाद की भाषा बनाने पर विशेष बल देती है। संस्कृत-सम्भाषण शिविर, पत्राचार पाठ्यक्रम, गीता-शिक्षण केन्द्र, बालकेन्द्र और संवादशाला जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों से लेकर युवाओं, शिक्षकों, गृहिणियों और वरिष्ठ नागरिकों तक विभिन्न वर्गों को संस्कृत सीखने-बोलने का अवसर दिया जाता है। यही अभियान अब सार्वजनिक जीवन में संस्कृत की उपस्थिति को व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

दिल्ली में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए संस्था की गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं। वर्ष 2025 में दिल्ली में 1008 संस्कृत-सम्भाषण शिविरों का व्यापक अभियान चलाया गया था। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा विभिन्न सामाजिक-सामुदायिक संस्थानों में आयोजित इन शिविरों का लक्ष्य संस्कृत को सरल एवं सहज पद्धति से बोलने का प्रशिक्षण देना था। इस अभियान ने संस्कृत को शैक्षणिक विषय से आगे जन-संवाद और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने की दिशा में एक व्यापक आधार तैयार किया।

इसी क्रम में प्रस्तावित संस्कृत-शोभायात्रा को जनसंपर्क और जन-जागरण का माध्यम बनाया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 23 अगस्त 2026 को अपराह्न तीन बजे प्रणव, केंद्रीय कार्यालय, नई दिल्ली से संस्कृत-वाहन शोभायात्रा प्रारम्भ होगी। वाहन राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर छह तक जाएंगे। इसके बाद सहभागी गेट नंबर छह से सामूहिक उद्घोष के साथ राजीव चौक के पूरे सर्कल का भ्रमण करेंगे और पुनः वाहनों के माध्यम से प्रणव स्थित संस्कृतभारती कार्यालय लौटेंगे।

आयोजन में संस्कृतप्रेमियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े नागरिकों की सहभागिता अपेक्षित है। सार्वजनिक स्थल पर होने वाली यह यात्रा संस्कृत के गौरव, उसकी समृद्ध साहित्यिक परम्परा और भारतीय ज्ञान-विज्ञान की परम्परा में उसके योगदान को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास करेगी। आयोजकों का मानना है कि संस्कृत की जीवंतता केवल उसके अतीत में नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी के साथ उसके संवाद में भी निहित है।

शोभायात्रा का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष युवाओं और विद्यार्थियों को संस्कृत से जोड़ना है। भारतीय दर्शन, साहित्य, योग, आयुर्वेद, व्याकरण, गणित, नाट्य तथा अनेक ज्ञान-विधाओं की विशाल परम्परा संस्कृत साहित्य में सुरक्षित है। ऐसे में संस्कृत का अध्ययन नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान-परम्परा के मूल स्रोतों से जोड़ने का माध्यम बन सकता है। यही कारण है कि संस्कृतभारती के कार्यक्रमों में भाषा-अध्ययन के साथ सांस्कृतिक और ज्ञानपरक जुड़ाव को भी महत्व दिया जाता है।

संस्कृतभारती दिल्ली प्रान्त ने संस्कृतप्रेमियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, युवाओं और दिल्लीवासियों से शोभायात्रा में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनने का आह्वान किया है। आयोजन के माध्यम से “मातृभूमिः भारतम्, मातृभाषा संस्कृतम्” के भाव को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

संस्कृत सप्ताह के अवसर पर आयोजित यह शोभायात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान-परम्पराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने की आवश्यकता पर निरंतर बल दिया जा रहा है। दिल्ली की सड़कों पर संस्कृत के सामूहिक उद्घोष के साथ निकलने वाली यह यात्रा इसी व्यापक प्रयास का सार्वजनिक स्वरूप होगी—जयतु संस्कृतम्, जयतु भारतम्।

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