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केजीएमयू ने रचा चिकित्सा इतिहास: बिना ओपन हार्ट सर्जरी जटिल कोरोनरी अवरोध का सफल उपचार

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केजीएमयू ने रचा चिकित्सा इतिहास: बिना ओपन हार्ट सर्जरी जटिल कोरोनरी अवरोध का सफल उपचार

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डॉ. गौरव चौधरी एवं टीम को मिली सर्वत्र सराहना

'रेजर' अत्याधुनिक तकनीक से दो मरीजों को मिला नया जीवन, चिकित्सा जगत ने बताया हृदय रोग उपचार की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के लारी कार्डियोलॉजी विभाग ने अत्याधुनिक 'रेजर (RAZER)' हाइब्रिड तकनीक का सफल उपयोग करते हुए ऐसे दो मरीजों का उपचार किया है, जिनकी हृदय धमनियों में वर्षों से जमा कैल्शियम के कारण उत्पन्न अत्यंत जटिल अवरोध को बिना ओपन हार्ट सर्जरी के दूर किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल प्रदेश, बल्कि देश में हृदय रोग चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में लंबे समय तक कैल्शियम के जमाव से उत्पन्न कठोर अवरोध (क्रॉनिक टोटल ऑक्लूज़न) सामान्य एंजियोप्लास्टी के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे अधिकांश मामलों में अब तक ओपन हार्ट बाईपास सर्जरी ही प्रमुख विकल्प मानी जाती रही है। किंतु लारी कार्डियोलॉजी विभाग ने आधुनिक तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए इस जटिल स्थिति का सफल समाधान न्यूनतम हस्तक्षेप (मिनिमली इनवेसिव) विधि से कर दिखाया।

लारी कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव चौधरी ने बताया कि 'रेजर' तकनीक वास्तव में रोटाब्लेशन तथा लेजर एथरेक्टॉमी का अभिनव समन्वित स्वरूप है। इस प्रक्रिया में पहले शीतल अल्ट्रावॉयलेट लेजर किरणों की सहायता से कठोर कैल्शियमयुक्त अवरोध को नियंत्रित किया जाता है, तत्पश्चात हीरा-जड़ित सूक्ष्म उपकरण के माध्यम से कैल्शियम को अत्यंत महीन कणों में परिवर्तित कर सुरक्षित रूप से रक्त प्रवाह के साथ बाहर निकलने योग्य बनाया जाता है। इसके उपरांत स्टेंट प्रत्यारोपित कर धमनियों में रक्त संचार पुनः सामान्य कर दिया जाता है।

विशेष बात यह है कि जहां निजी सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों में इस प्रकार की प्रक्रिया पर लगभग आठ लाख रुपये तक का व्यय आता है, वहीं केजीएमयू में यही उपचार लगभग एक लाख रुपये की लागत पर उपलब्ध कराया गया। इससे आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले मरीजों के लिए भी अत्याधुनिक उपचार सुलभ होने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्ग प्रशस्त हुआ है।

इस उल्लेखनीय उपलब्धि में विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि सेठी, डॉ. शरद सिंह, डॉ. अखिल शर्मा, डॉ. आयुष शुक्ला तथा डॉ. उमेश त्रिपाठी सहित संपूर्ण चिकित्सकीय दल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस अभिनव उपलब्धि पर सामाजिक एवं सांस्कृतिक जगत से भी व्यापक प्रशंसा व्यक्त की जा रही है। राष्ट्रीय सनातन महासंघ एवं संस्कृतभारती न्यास अवध प्रांत के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह ने डॉ. गौरव चौधरी एवं उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि ऐसे चिकित्सक केवल रोगों का उपचार नहीं करते, बल्कि असंख्य परिवारों को नया जीवन, नई आशा और नवविश्वास प्रदान करते हैं।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि डॉ. गौरव चौधरी जैसे चिकित्सकों पर सम्पूर्ण समाज को गर्व है। उनकी वैज्ञानिक दक्षता, मानवीय संवेदनशीलता और चिकित्सा के प्रति समर्पण असंख्य लोगों के लिए जीवनरक्षक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि डॉ. चौधरी एवं उनकी टीम स्वस्थ, दीर्घायु और निरंतर मानवता की सेवा में समर्पित रहें, ताकि उनकी विशिष्ट चिकित्सा तकनीक से अधिकाधिक रोगियों को जीवनदान प्राप्त हो सके।

जितेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा संगठनों की ओर से संपूर्ण चिकित्सकीय दल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान की ऐसी उपलब्धियां केवल तकनीकी सफलता नहीं होतीं, बल्कि एक संवेदनशील, स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण की आधारशिला होती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केजीएमयू की यह उपलब्धि भविष्य में देशभर के चिकित्सकों और चिकित्सा संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की अत्याधुनिक तकनीकों का विस्तार सरकारी चिकित्सा संस्थानों में निरंतर होता रहा, तो गंभीर हृदय रोगों के उपचार में भारत वैश्विक स्तर पर नई पहचान स्थापित कर सकता है। केजीएमयू की यह सफलता न केवल चिकित्सा विज्ञान की विजय है, बल्कि उन हजारों मरीजों के लिए आशा का नया द्वार भी है, जिनके लिए कभी ओपन हार्ट सर्जरी ही अंतिम विकल्प मानी जाती थी।

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