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जघन्य अपराधों में अपराधियों को हर हाल में दिलाएं सजा, चार्जशीट में देरी बर्दाश्त नहीं: डीएम आनंद वर्धन

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जघन्य अपराधों में अपराधियों को हर हाल में दिलाएं सजा, चार्जशीट में देरी बर्दाश्त नहीं: डीएम आनंद वर्धन

एससी/एसटी एक्ट के मामलों के निस्तारण पर जताई नाराजगी, जिला बदर अपराधियों की कड़ी निगरानी और अवैध शराब पर विशेष अभियान के निर्देश

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दैनिक इंडिया न्यूज़ | मऊ।

जनपद में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा अपराधियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में कानून व्यवस्था एवं अभियोजन शाखा की मासिक समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जघन्य अपराधों में दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चार्जशीट समय से दाखिल की जाए, साक्ष्य मजबूत हों और न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर अपराधियों को कानून के कठोर दायरे में लाया जाए।

समीक्षा के दौरान संयुक्त निदेशक अभियोजन ने जून माह की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि सत्र न्यायालय में आईपीसी के 22 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 6 मामलों में दोषसिद्धि हुई जबकि 16 में अभियुक्त बरी हुए। पॉक्सो एक्ट के तीन मामलों में दो में सजा हुई तथा एक में अभियुक्त रिहा हुआ। अधीनस्थ न्यायालयों में आईपीसी एवं अन्य अधिनियमों सहित कुल 268 मामलों का निस्तारण हुआ। इस प्रकार जून माह में सत्र एवं अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 296 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 210 मामलों में दोषसिद्धि, 37 में रिहाई तथा 22 मामलों में सुलह हुई।

जिलाधिकारी ने गंभीर अपराधों में बढ़ती रिहाई और जमानत के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विवेचना और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक गंभीर मामले में मजबूत साक्ष्यों के साथ प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए, ताकि दोषियों को सजा मिले और जमानत निरस्त कराने के लिए भी ठोस प्रयास किए जा सकें।

एससी/एसटी एक्ट के मामलों में जून माह के दौरान एक भी वाद का निस्तारण न होने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए तथा सशक्त साक्ष्यों के साथ प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए।

बैठक में महिला उत्पीड़न, गैंगस्टर एक्ट, पॉक्सो एक्ट, गुंडा एक्ट तथा अन्य गंभीर अपराधों की समीक्षा भी की गई। महिला उत्पीड़न, एससी/एसटी एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के मामलों में चार्जशीट दाखिल करने में हो रही देरी पर जिलाधिकारी ने संबंधित क्षेत्राधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।

कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जहरीली एवं अवैध शराब के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस एवं आबकारी विभाग की संयुक्त टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार छापेमारी करने तथा अवैध कारोबार में लिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने गैंगस्टर एक्ट के मामलों में पुलिस पक्ष को तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश दिए। साथ ही गुंडा एक्ट के तहत जिला बदर किए गए अपराधियों की निरंतर निगरानी रखने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों की गतिविधियों पर सतत नजर रखी जाए, ताकि वे दोबारा किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल न हो सकें।

बैठक में पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर, अपर जिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, संयुक्त निदेशक अभियोजन, सभी उपजिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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