
दैनिक इंडिया न्यूज़ 12 जुलाई 2026 लखनऊ।जलवायु परिवर्तन, बढ़ते वैश्विक तापमान, भूजल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों के बीच राजधानी लखनऊ के पद्मश्री डॉ. एस.सी. राय पार्क, महानगर विस्तार में आयोजित "एक वृक्ष माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम पर्यावरणीय जनजागरण का प्रभावी मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्कृत भारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संपर्क प्रमुख जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय केवल वृक्षारोपण का नहीं, बल्कि "वृक्षपालक" बनने का है।

उन्होंने कहा कि किसी भी वृक्षारोपण अभियान की सफलता लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि वर्षों बाद जीवित और विकसित वृक्षों की संख्या से आँकी जानी चाहिए। यदि प्रत्येक नागरिक अपने द्वारा लगाए गए पौधे के संरक्षण का उत्तरदायित्व स्वीकार कर ले, तो भारत पर्यावरणीय पुनरुत्थान का वैश्विक उदाहरण बन सकता है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा, "आज हम केवल पौधे लगाने के लिए एकत्रित नहीं हुए हैं, बल्कि पृथ्वी के भविष्य, आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन और अपनी मातृभूमि के संरक्षण का संकल्प लेने के लिए एकत्र हुए हैं। 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान जन्मदात्री माँ और प्रकृति माँ—दोनों के प्रति हमारी कृतज्ञता, श्रद्धा और उत्तरदायित्व का जीवंत प्रतीक है।"

उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों तथा सामाजिक संगठनों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित दीर्घकालिक राष्ट्रीय वृक्ष संरक्षण नीति तैयार करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि प्रतिवर्ष बड़े पैमाने पर पौधरोपण होता है, किंतु संरक्षण के अभाव में बड़ी संख्या में पौधे जीवित नहीं रह पाते। इसलिए वृक्षारोपण के साथ संरक्षण को समान प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि मानसून की अनुकूल परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त समय का निर्धारण किया जाए, जिससे पौधों के जीवित रहने की संभावना बढ़े और अभियान का उद्देश्य अधिक प्रभावी ढंग से पूरा हो सके।

"पौधा लगाना एक दिन का कार्य है, किंतु उसे वृक्ष बनाना पाँच वर्षों की तपस्या है," इस संदेश के साथ उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति, परिवार, विद्यालय, महाविद्यालय, औद्योगिक प्रतिष्ठान, धार्मिक संस्था तथा स्वयंसेवी संगठन से कम-से-कम पाँच वर्षों तक अपने लगाए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का उत्तरदायित्व निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बढ़ती हीट वेव, अनियमित वर्षा, अतिवृष्टि, सूखा, वायु प्रदूषण और गिरता भूजल स्तर केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य से जुड़े प्रश्न हैं। इनके समाधान का सबसे सहज और टिकाऊ मार्ग व्यापक वृक्षारोपण के साथ-साथ उसका सतत संरक्षण है।

महानगर थानाध्यक्ष अखिलेश मिश्र ने दिया सक्रिय सहभागिता का संदेश
कार्यक्रम में महानगर थानाध्यक्ष अखिलेश मिश्र ने सक्रिय सहभागिता करते हुए वृक्षारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण के सामूहिक संकल्प का समर्थन किया। उन्होंने नागरिकों से अधिकाधिक वृक्ष लगाने और उनके संरक्षण में सहभागिता का आग्रह किया। उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण सामाजिक उत्तरदायित्व है, जिसमें शासन, प्रशासन और नागरिक समाज सभी की समान भूमिका है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश भाजपा की प्रदेश मंत्री महामेघा नागर, वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अपूर्वा सिंह, महानगर विस्तार जनकल्याण समिति के कोषाध्यक्ष ब्रज प्रभात सिंह, कार्यकारिणी सदस्य नूतन सिंह, विवेकानंद वार्ड की सभासद नूपुर शांखधर, समाजसेवी सुनील शांखधर, उत्तर प्रदेश पुलिस से मुकेश चौहान 'मुकेशानंद', मिडलैंड चिकित्सालय एवं अनुसंधान संस्थान के विशेष कार्याधिकारी ओ.पी. सूर्यवंशी तथा वारियर्स डिफेंस कॉलेज के टी.डी. सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान चंदन, सहजन, नीम तथा विभिन्न पुष्पीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। अंत में सभी प्रतिभागियों ने "वृक्षपालक" बनने तथा प्रत्येक पौधे के संरक्षण एवं संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम का मूल संदेश स्पष्ट था—"हर रोपा गया पौधा तभी सफल है, जब वह एक सुदृढ़ वृक्ष बनकर आने वाली पीढ़ियों को जीवन दे।"