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लखनऊ में संस्कृत के जनजागरण की नई पहल, महापौर का खुला समर्थन

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Dainik India News

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लखनऊ में संस्कृत के जनजागरण की नई पहल, महापौर का खुला समर्थन

संस्कृतभारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र सम्पर्क प्रमुख जितेन्द्र प्रताप सिंह ने महापौर सुषमा खर्कवाल से की भेंट; वैश्विक संस्कृत सप्ताह में LED स्क्रीन और सार्वजनिक स्थलों पर संस्कृत संदेशों के प्रसारण की तैयारी

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।राजधानी लखनऊ की सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध करने और संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयासों में महापौर सुषमा खर्कवाल की भूमिका निरंतर उल्लेखनीय रही है। संस्कृत के प्रचार-प्रसार और उसके सामाजिक प्रतिष्ठापन से जुड़े संस्कृतभारती के विभिन्न कार्यक्रमों को लखनऊ में महापौर का खुला, सक्रिय और सकारात्मक समर्थन मिलता रहा है। संस्कृत भाषा के उन्नयन के लिए उनके सहयोग और आत्मीय सहभागिता को रेखांकित करते हुए संस्कृतभारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सम्पर्क प्रमुख जितेन्द्र प्रताप सिंह ने शनिवार को महापौर से उनके कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने महापौर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृतभारती के प्रत्येक कार्य में उनका सहयोग संस्था के लिए उत्साहवर्धक रहा है और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वैश्विक संस्कृत सप्ताह के अवसर पर राजधानी में संस्कृत के व्यापक जनजागरण की पहल को लेकर हुई इस भेंट में महापौर ने पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी नगर निगम की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया।

भेंट के दौरान जितेन्द्र प्रताप सिंह ने लखनऊ में स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और नगरीय विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी नगर की पहचान केवल उसकी आधारभूत सुविधाओं से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक संस्कारों से भी निर्मित होती है। संस्कृत इसी सांस्कृतिक चेतना की महत्वपूर्ण संवाहक है और इसे सार्वजनिक जीवन से जोड़ने के प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने महापौर को अवगत कराया कि संस्कृतभारती की ओर से 25 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक वैश्विक संस्कृत सप्ताह व्यापक स्तर पर मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य संस्कृत को केवल प्राचीन ग्रंथों और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय उसे जनसामान्य के बीच सहज एवं व्यवहारोपयोगी भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना है।

इसी क्रम में संस्कृतभारती ने नगर निगम से अनुरोध किया कि पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी लखनऊ के प्रमुख चौराहों, मार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर लगे विज्ञापन पटलों तथा LED डिस्प्ले के माध्यम से संस्कृत भाषा से संबंधित प्रेरक संदेशों का प्रसारण कराया जाए। सार्वजनिक स्थलों पर संस्कृत की यह दृश्य उपस्थिति आम नागरिकों, विशेषकर युवा पीढ़ी में भाषा के प्रति जिज्ञासा और गौरवबोध उत्पन्न करने में सहायक हो सकती है।

महापौर सुषमा खर्कवाल ने इस पहल का स्वागत करते हुए पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी नगर निगम की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। नगर निगम के सहयोग से संस्कृत को सार्वजनिक संचार के माध्यमों से जोड़ने की यह पहल राजधानी में भाषा के व्यापक जनप्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकती है।

इस अवसर पर जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा, “संस्कृत भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा की महत्वपूर्ण आधारभूत भाषा है। इसका साहित्य ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, संस्कृति और जीवन-मूल्यों का विपुल भंडार है। संस्कृत का संरक्षण और संवर्धन केवल एक भाषा का संरक्षण नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने का प्रयास है।”

उन्होंने कहा कि संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार, स्थानीय निकायों, सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थानों की सहभागिता आवश्यक है। सार्वजनिक जीवन में संस्कृत की सहज उपस्थिति नई पीढ़ी को इस भाषा की ओर आकर्षित करने के साथ भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति उसके जुड़ाव को भी मजबूत कर सकती है।

भेंट के अंत में जितेन्द्र प्रताप सिंह ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार के प्रति महापौर के निरंतर सहयोग और सकारात्मक भूमिका के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि वैश्विक संस्कृत सप्ताह के दौरान लखनऊ में होने वाला यह जनजागरण अभियान संस्कृत को सार्वजनिक विमर्श से जोड़ने के साथ राजधानी की सांस्कृतिक चेतना को भी नई ऊर्जा देगा।

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