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लोकतंत्र के शिल्पकार एक मंच पर : विधायी संस्थाओं की गुणवत्ता और कार्यकुशलता पर केंद्रित AIPOC का दूसरा दिन

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Dainik India News

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लोकतंत्र के शिल्पकार एक मंच पर : विधायी संस्थाओं की गुणवत्ता और कार्यकुशलता पर केंद्रित AIPOC का दूसरा दिन

दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का दूसरा दिन भारतीय लोकतंत्र की विधायी परंपराओं को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी तथा नागरिकोन्मुख बनाने की दिशा में गहन वैचारिक मंथन का साक्षी बना। सम्मेलन के इस चरण में विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में गुणवत्ता के उच्चतम मानक स्थापित करने, आधुनिक प्रौद्योगिकी के समुचित उपयोग तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को अधिक उत्तरदायी और प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर गंभीर और दूरदर्शी संवाद हुआ, जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था के भविष्य को लेकर नई आशा का संचार किया।


सम्मेलन के पूर्ण सत्रों में तीन प्रमुख आयामों पर विस्तार से विचार किया गया—विधायी प्रक्रियाओं को पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का रचनात्मक उपयोग; विधायकों की क्षमता-वृद्धि के माध्यम से विधायी संस्थाओं की कार्यकुशलता और लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करना; तथा जनता के प्रति विधायिकाओं की नैतिक और संवैधानिक जवाबदेही सुनिश्चित करना। इन विचार-विमर्शों में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति ने विमर्श को दिशा और गंभीरता प्रदान की, जबकि चर्चाओं का संतुलित और प्रभावी संचालन राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश द्वारा किया गया।


अपने संबोधन में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना द्वारा देशभर की श्रेष्ठ विधायी परंपराओं को प्रदेश की विधानसभा की कार्यप्रणाली में समाहित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विधायकों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पेशेवर अनुभवों को पहचानकर उनके रचनात्मक उपयोग की पहल को लोकतांत्रिक सशक्तिकरण का अनुकरणीय उदाहरण बताया। उनके शब्दों में यह प्रयास न केवल विधायिका की कार्यक्षमता को बढ़ाने वाला है, बल्कि जनविश्वास को सुदृढ़ करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।


पूर्ववर्ती अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलनों के अनुभवों को स्मरण करते हुए ओम बिरला ने इस बात पर बल दिया कि उत्कृष्टता, नवाचार और तकनीकी समावेशन जैसे मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा समय की आवश्यकता है। उन्होंने वर्ष 2019 में देहरादून में आयोजित सम्मेलन का उल्लेख करते हुए बताया कि विधायी संस्थाओं की प्रक्रियाओं और कार्यप्रणालियों में सुधार के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसी क्रम में गठित समिति देशभर की विधायी प्रक्रियाओं और परंपराओं के मानकीकरण पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रभावशीलता को नई ऊंचाई मिल सके।


राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने अपने विचार रखते हुए विधान मंडलों की कार्यकुशलता बढ़ाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग तभी सार्थक होगा, जब उसे विश्वसनीयता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के स्पष्ट मानकों के साथ अपनाया जाए। साथ ही उन्होंने संसद और राज्य विधान मंडलों के बीच अधिक समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विधायी संस्थाओं के संस्थागत ज्ञान और अनुभव का प्रभावी उपयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बना सके।


सम्मेलन का तीसरा और अंतिम दिन 21 जनवरी, 2026 को आयोजित होगा, जिसमें लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला समापन संबोधन देंगे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति भी रहेगी, जो सम्मेलन को संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन भारतीय लोकतंत्र की विधायी आत्मा को अधिक सशक्त, उत्तरदायी और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

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