
दैनिक इंडिया न्यूज़,लखनऊ।जितेन्द्र प्रताप सिंह ने मातृशक्ति को नमन करते हुए नवदुर्गा के दिव्य स्वरूपों का स्मरण कर विशेष वैदिक पूजन-अर्चन संपन्न किया तथा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना से जोड़ते हुए अपनी धर्मपत्नी के साथ चंदन का पौधा रोपित किया। यह आयोजन केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन जीवन-दर्शन की उस शाश्वत परंपरा का उद्घोष बना, जिसमें प्रकृति को मातृस्वरूप मानकर उसकी आराधना की जाती है।

उन्होंने कहा कि चंदन भारतीय संस्कृति में केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि पवित्रता, शीतलता, आध्यात्मिक ऊर्जा और औषधीय गुणों का जीवंत प्रतीक है। वैदिक अनुष्ठानों, देवपूजन, आयुर्वेद तथा ध्यान-साधना में चंदन का विशेष महत्व रहा है। इसकी सुगंध मानसिक संतुलन, आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
राष्ट्रीय सनातन महासंघ द्वारा किया गया यह चंदन रोपण अभियान सनातन महाविद्यान की वैचारिक धारा को समाज में प्रसारित करने के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी सशक्त संदेश बनकर उभरा।