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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ की विचारधारा को बताया राष्ट्र की धरोहर, मोहन भागवत बोले – भारत की संस्कृति ही हमारी शक्ति

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Dainik India News

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ की विचारधारा को बताया राष्ट्र की धरोहर, मोहन भागवत बोले – भारत की संस्कृति ही हमारी शक्ति

दैनिक इंडिया न्यूज़ नागपुर! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में पुणे में माधव नेत्रालय के उद्घाटन समारोह में पहुंचे, जहां उन्होंने भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हो रहे विकास को रेखांकित किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय का दौरा किया और वहां राष्ट्रभक्ति व सांस्कृतिक मूल्यों पर एक प्रभावशाली संबोधन दिया। उनके इस वक्तव्य ने विपक्षी दलों को असहज कर दिया और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में संघ की राष्ट्र निर्माण में भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और परंपराओं का संरक्षक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघ ने समाज में समरसता और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने और एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए राष्ट्रवादी सोच आवश्यक है। "संघ की विचारधारा भारत की आत्मा है, जो हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखती है और हमें अपने गौरवशाली अतीत का स्मरण कराती है।" इस विचारधारा को सुनते ही विपक्षी दलों में बेचैनी फैल गई, क्योंकि यह उनके वैचारिक विरोधाभासों को उजागर करता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विकास के मुद्दों पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि ऐतिहासिक स्तर पर है और इसका श्रेय उन करोड़ों मेहनतकश नागरिकों को जाता है, जो अपने प्रयासों से देश को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और बुनियादी ढांचे के विकास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कुछ लोग विकास के मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन भारत अब जागरूक हो चुका है और राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक की भूमिका अहम है। उन्होंने संघ कार्यालय में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा, "हमारा लक्ष्य केवल सत्ता नहीं, बल्कि भारत को एक आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनाना है। राष्ट्रवाद ही हमारी पहचान है, और हमें इसी पथ पर आगे बढ़ते रहना है।"

प्रधानमंत्री के इस राष्ट्रवादी संबोधन के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "संघ का उद्देश्य हमेशा से राष्ट्रहित रहा है। हमारी संस्कृति ही हमारी शक्ति है और हमें इसे सहेजकर आगे बढ़ना है। भारत का उत्थान केवल आर्थिक और तकनीकी विकास से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्थान से भी संभव है।"

मोहन भागवत ने प्रधानमंत्री मोदी के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को आत्मनिर्भर और शक्तिशाली बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को साथ आना होगा। उन्होंने कहा, "संघ केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचारधारा है, जो हर भारतीय के हृदय में बसती है। जब भारत अपनी संस्कृति को अपनाकर आगे बढ़ेगा, तभी विश्व में उसकी प्रतिष्ठा और बढ़ेगी।"

प्रधानमंत्री मोदी और मोहन भागवत के राष्ट्रवादी संदेश ने न केवल जनता को प्रेरित किया, बल्कि विपक्ष को भी जवाब देने पर मजबूर कर दिया है। यह स्पष्ट हो गया है कि 2027 के आगामी चुनावों में राष्ट्रवाद, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण ही मुख्य मुद्दे बनने जा रहे हैं।

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