दैनिक इंडिया न्यूज़ , लखनऊ मधुबन, मऊ।
मिशन शक्ति फेज–5 के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण की अभिनव परिकल्पना को साकार रूप देते हुए मधुबन क्षेत्र में एक प्रेरणास्पद पहल देखने को मिली, जहाँ सीओ सर्किल के अंतर्गत आने वाले तीनों थानों पर स्कूली छात्राओं को एक दिन के लिए सांकेतिक क्षेत्राधिकारी (सीओ) एवं प्रभारी निरीक्षक का दायित्व सौंपा गया। इस अद्वितीय प्रयोग ने न केवल छात्राओं में प्रशासनिक चेतना का संचार किया, अपितु समाज में नारी-सशक्तिकरण की दृढ़ता को भी प्रत्यक्ष रूप से अभिव्यक्त किया।
जूनियर हाई स्कूल मधुबन की मेधावी छात्रा नीलम ने क्षेत्राधिकारी अंजनी कुमार पाण्डेय से कार्यभार ग्रहण कर अत्यंत सजगता एवं प्रौढ़ विवेक का परिचय देते हुए फरियादियों की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना। जनसुनवाई के दौरान जिला पंचायत सदस्य सुभाष यदुवंशी द्वारा प्रस्तुत भूमि-विवाद के प्रकरण में नीलम ने अद्भुत सूझबूझ का प्रदर्शन करते हुए उसे राजस्व विषयक मामला निरूपित किया तथा स्पष्ट किया कि ऐसे प्रकरणों में पुलिस का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप अपेक्षित नहीं है।
वहीं, प्रभारी निरीक्षक मधुबन राजीव कुमार सिंह से कार्यभार ग्रहण कर छात्रा आराधना ने महिला अपराध, 1090 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तथा नाबालिगों के विरुद्ध हो रहे अपराधों के संदर्भ में गहन जानकारी प्रस्तुत करते हुए प्रभावी जनसुनवाई की। इसी क्रम में थाना हलधरपुर में छात्रा आकांक्षा यादव ने एक दिन की सांकेतिक थाना अध्यक्ष के रूप में दायित्व निभाते हुए एंटी भू-माफिया कार्रवाई, अवैध खनन तथा महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर शिकायतें सुनकर उनके त्वरित निस्तारण हेतु निर्देश प्रदान किए।
इस अवसर पर क्षेत्राधिकारी अंजनी कुमार पाण्डेय ने कहा कि मिशन शक्ति फेज–5 शासन की एक दूरदर्शी एवं महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक एवं सशक्त बनाना है। पुलिस विभाग इस दिशा में सतत प्रयासरत है तथा विभिन्न अभियानों के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु जन-जागरूकता का विस्तार कर रहा है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार सिंह ने जूनियर हाई स्कूल की छात्राओं नेहा, प्रियंका एवं नीलम को ऑल इंडिया श्रेष्ठा परीक्षा में उत्कृष्ट अंक अर्जित करने पर सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
यह आयोजन केवल एक प्रतीकात्मक पहल नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के उस उदीयमान स्वर का परिचायक है, जहाँ नारी अब केवल सहभागिता ही नहीं, अपितु नेतृत्व और निर्णय क्षमता की धुरी बनकर उभर रही है।