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“न्याय के आगे झुका सत्ता का अहंकार — आखिरकार ललित किशोर तिवारी ने ली पार्षद पद की शपथ

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“न्याय के आगे झुका सत्ता का अहंकार — आखिरकार ललित किशोर तिवारी ने ली पार्षद पद की शपथ

“हाईकोर्ट के कठोर आदेश के बाद नगर निगम में हुआ शपथ ग्रहण, गूंजे नारे — ‘ललित तिवारी सब पर भारी’”

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दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ ।राजधानी लखनऊ में बीते कई महीनों से चल रहा संवैधानिक और राजनीतिक संघर्ष आखिरकार उस निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जहां न्यायपालिका के कठोर हस्तक्षेप के आगे सत्ता का अहंकार झुकता दिखाई दिया। लंबे विवाद, न्यायिक फटकार और मेयर के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार सीज किए जाने के बाद अंततः नगर निगम प्रशासन द्वारा फैजुल्लागंज वार्ड-73 से निर्वाचित घोषित पार्षद ललित किशोर तिवारी को विधिवत पार्षद पद की शपथ दिला दी गई।

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नगर निगम मुख्यालय में हुए शपथ ग्रहण के दौरान वातावरण पूरी तरह उत्साह, जोश और राजनीतिक संदेशों से परिपूर्ण दिखाई दिया। जैसे ही ललित किशोर तिवारी ने शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण की, उनके समर्थकों, अधिवक्ताओं और क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई। पूरे परिसर में “ललित तिवारी सब पर भारी” के नारे गूंजते रहे, जिसने पूरे घटनाक्रम को और अधिक रोमांचक एवं प्रतीकात्मक बना दिया।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जब सामान्य नागरिक अथवा जनप्रतिनिधि के लिए सभी प्रशासनिक मार्ग बंद हो जाते हैं, तब न्यायपालिका ही अंतिम आशा बनकर खड़ी होती है। न्यायालय की यही संवैधानिक शक्ति है कि सरकारों और सत्ता प्रतिष्ठानों को भी अंततः न्यायिक आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। राजनीतिक और विधिक हलकों में इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की सर्वोच्चता के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

समर्थकों और अधिवक्ताओं का कहना है कि यह कार्य बहुत पहले ही संपन्न हो जाना चाहिए था, किंतु मेयर पक्ष की हठधर्मिता, राजनीतिक अहंकार और अनावश्यक टकराव की मानसिकता के कारण मामला लगातार उलझता चला गया। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करते हुए मेयर सुषमा खर्कवाल के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार सीज करने जैसे कठोर आदेश पारित करने पड़े।

सूत्रों की मानें तो व्यक्तिगत अहंकार और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की इस लड़ाई का सबसे अधिक नुकसान फैजुल्लागंज वार्ड-73 की जनता को उठाना पड़ा। महीनों तक वार्ड प्रभावी प्रतिनिधित्व से वंचित रहा, जिससे क्षेत्रीय विकास कार्य प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शपथ ग्रहण करा दिया गया होता, तो वार्ड में विकास की कई योजनाएं धरातल पर उतर चुकी होतीं और क्षेत्र चौमुखी प्रगति की ओर अग्रसर होता।

ललित किशोर तिवारी, जो वर्तमान में अवध बार एसोसिएशन के महासचिव भी हैं, शपथ ग्रहण के बाद समर्थकों से घिरे दिखाई दिए। अधिवक्ता समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ और संघर्षशील छवि पहले से ही चर्चा का विषय रही है। यही कारण है कि इस पूरे आंदोलन को केवल एक राजनीतिक संघर्ष नहीं, बल्कि “न्यायिक सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई” के रूप में देखा जा रहा है।

शपथ ग्रहण के बाद फैजुल्लागंज वार्ड-73 में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं, आतिशबाजी की और एक-दूसरे को बधाइयां दीं। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि अब उन्हें उम्मीद है कि लंबे समय से रुके विकास कार्यों को गति मिलेगी तथा वार्ड को उसका वैधानिक और सक्रिय प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में स्थानीय निकाय राजनीति के लिए एक बड़ा संदेश छोड़ गया है — लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को अधिकारों से वंचित रखने का प्रयास अंततः न्यायपालिका की चौखट पर जाकर समाप्त होता है, जहां सत्ता नहीं, बल्कि संविधान सर्वोच्च होता है।

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