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प्लास्टीविजन 2027 की दस्तक: उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक उद्योग के लिए निवेश और नवाचार का नया द्वार

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Dainik India News

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प्लास्टीविजन 2027 की दस्तक: उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक उद्योग के लिए निवेश और नवाचार का नया द्वार

मंत्री राकेश सचान ने किया रोडशो का उद्घाटन; जनवरी 2027 में मुंबई में होने वाली विश्व की दूसरी सबसे बड़ी प्लास्टिक प्रदर्शनी के लिए उद्योग जगत को आमंत्रण, प्लास्टिक पार्कों में निवेश के लिए उद्यमियों को दिया भरोसा

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दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्लास्टिक उद्योग के भविष्य, अत्याधुनिक तकनीक और निवेश की संभावनाओं को लेकर आयोजित प्लास्टीविजन रोडशो में उद्योग जगत और सरकार के बीच सहयोग की नई संभावनाएं उभरकर सामने आईं। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्रदेश में प्लास्टिक उद्योग के विस्तार के लिए सरकार की योजनाओं और निवेश की संभावनाओं का उल्लेख किया। जनवरी 2027 में मुंबई में प्रस्तावित प्लास्टीविजन 2027 को उद्योग की नई तकनीकों, नवाचार और वैश्विक कारोबारी संभावनाओं से जुड़ने का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को इसमें सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राकेश सचान, विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र प्रताप सिंह, सम्पर्क प्रमुख, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र, संस्कृतभारती तथा संस्था के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर आयोजन से जुड़े प्रबंधन सदस्यों ने भी सहभागिता की। अतिथियों का स्वागत अखिल भारतीय प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद मेहता ने किया। उद्घाटन के साथ ही चर्चा का केंद्र उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं से आगे बढ़कर उसके भविष्य की दिशा पर केंद्रित हो गया।

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प्लास्टीविजन के चेयरमैन जयेश खिमजी रामबिहा ने संस्था की गतिविधियों और आगामी आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 21 से 25 जनवरी 2027 तक मुंबई में प्लास्टीविजन का आयोजन प्रस्तावित है। उन्होंने इसे प्लास्टिक उत्पाद विनिर्माताओं के लिए विश्व की दूसरी सबसे बड़ी प्रदर्शनी बताते हुए कहा कि यहां नई तकनीकों और वैश्विक स्तर पर हो रहे नवाचारों से परिचित होने का अवसर मिलेगा। उनका कहना था कि ऐसी तकनीकों को भारतीय उद्योग के धरातल तक पहुंचाना विकसित भारत के संकल्प को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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कार्यक्रम में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को भी उद्योग की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। जयेश खिमजी रामबिहा ने उपस्थित सहभागियों को प्लास्टिक उत्पादों के कचरे को खुले में न फैलाने तथा उसके समुचित प्रबंधन के प्रति जागरूक रहने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के उपयोग के साथ उसके अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उद्योग और समाज दोनों की है। यह संकल्प स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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मुख्य अतिथि राकेश सचान ने प्लास्टीविजन की पहल की सराहना करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की एमएसएमई प्लास्टिक पार्क विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी साझा की। उन्होंने पूर्वांचल, मध्यांचल और पश्चिमांचल में औद्योगिक निवेश के लिए भूमि उपलब्ध कराने, रियायती दरों तथा निवेशकों के सामने आने वाली बाधाओं को कम करने की सरकार की नीति का उल्लेख किया। उन्होंने देशभर से आए औद्योगिक प्रतिनिधियों और उद्यमियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए प्रदेश को सुरक्षित और अनुकूल औद्योगिक निवेश गंतव्य के रूप में विकसित करने की सरकार की प्रतिबद्धता रेखांकित की।

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मंत्री ने प्लास्टिक की उपयोगिता और आधुनिक मानव जीवन में उसकी आवश्यकता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने संकेत दिया कि प्लास्टिक उद्योग को केवल उत्पादन और व्यापार के दृष्टिकोण से देखने के बजाय तकनीकी नवाचार, रोजगार, निवेश, निर्यात और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के व्यापक परिप्रेक्ष्य में आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है। यही दृष्टिकोण प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति दे सकता है।

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विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र प्रताप सिंह, सम्पर्क प्रमुख, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र, संस्कृतभारती ने लखनऊ में इस महत्वपूर्ण औद्योगिक गोष्ठी के आयोजन के लिए आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका निर्णायक है और औद्योगिक विकास, तकनीकी नवाचार तथा निवेश को बढ़ावा देने वाले ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है। उन्होंने प्लास्टिक उद्योग को बदलती वैश्विक तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने तथा प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को राष्ट्रीय विकास के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

गोष्ठी को प्लास्टिक उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख निर्माताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक विनिर्माण क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों, नवाचार और उत्पादन की बदलती आवश्यकताओं की जानकारी साझा करते हुए भारतीय उद्योग को इन परिवर्तनों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। चर्चा में इस बात पर बल रहा कि तकनीक, निवेश और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित किए बिना उद्योग का दीर्घकालिक विस्तार संभव नहीं है।

कार्यक्रम के समापन पर डा. आशुतोष के. गोर ने अतिथियों, उद्योग प्रतिनिधियों और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्य अतिथि राकेश सचान, विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र प्रताप सिंह तथा लखनऊ में आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले विमल शुक्ल सहित सभी सहभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही उन्होंने उद्योग जगत से जनवरी 2027 में मुंबई में आयोजित होने वाली प्लास्टीविजन 2027 में व्यापक सहभागिता का आह्वान किया।

लखनऊ का यह रोडशो इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा कि इसमें प्लास्टिक उद्योग के विकास को केवल कारोबारी विस्तार तक सीमित न रखते हुए निवेश, तकनीकी नवाचार, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने की आवश्यकता पर एक साथ विमर्श हुआ। अब निगाहें मुंबई में होने वाली प्लास्टीविजन 2027 पर हैं, जहां वैश्विक स्तर की तकनीकों और उद्योग की नई संभावनाओं के बीच भारतीय विनिर्माण क्षेत्र अपनी अगली दिशा तलाशेगा।

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