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सामरिक शक्ति के दो ध्रुव आमने-सामने, राष्ट्रीय सुरक्षा विमर्श के केंद्र में ऐतिहासिक निर्णय

रणनीतिक परंपरा के दो शिखरों का संगम : वर्तमान सीडीएस जनरल अनिल चौहान एवं नवघोषित सीडीएस लेफ्टिनेंट जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि के मध्य राष्ट्रीय सनातन महासंघ अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह

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Dainik India News

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सामरिक शक्ति के दो ध्रुव आमने-सामने, राष्ट्रीय सुरक्षा विमर्श के केंद्र में ऐतिहासिक निर्णय

दैनिक इंडिया न्यूज़, लखनऊ।भारतीय सामरिक परिदृश्य के दो अत्यंत प्रभावशाली सैन्य नेतृत्वकर्ताओं—Anil Chauhan एवं नवघोषित चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ N. S. Raja Subramani—के मध्य राष्ट्रीय सनातन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष Jitendra Pratap Singh की उपस्थिति गौरवान्वित करने वाली है। इस निर्णय से सामरिक, रणनीतिक एवं वैचारिक गलियारों में व्यापक हलचल उत्पन्न कर दी है। इस संवाद को केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना, सामरिक सिद्धांतों तथा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के समन्वित विमर्श के रूप में देखा जा रहा है।

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यह महत्वपूर्ण नियुक्ति ऐसे समय सम्पन्न हुई है जब भारत बहुआयामी भू-राजनीतिक चुनौतियों, सीमाई तनाव, आंतरिक सुरक्षा संबंधी जटिलताओं तथा क्षेत्रीय सामरिक प्रतिस्पर्धा के संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। ऐसे निर्णायक कालखंड में निवर्तमान एवं नवागंतुक सैन्य नेतृत्व का एक साथ उपस्थित होना राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र की निरंतरता एवं रणनीतिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत, संयुक्त सैन्य कमान, रक्षा आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भर सैन्य उत्पादन, सामरिक प्रतिरोधक क्षमता तथा भविष्य की युद्ध संरचना जैसे विषयों पर गंभीर मंथन हुआ।

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राष्ट्रीय सनातन महासंघ के अध्यक्ष Jitendra Pratap Singh ने कहा कि भारत की सामरिक शक्ति केवल आयुधों और सैन्य संसाधनों से संचालित नहीं होती, बल्कि उसकी सनातन चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रनिष्ठ संस्कार भी उसकी वास्तविक रक्षा शक्ति के आधार हैं। उन्होंने भारतीय सशस्त्र सेनाओं की अदम्य युद्धक क्षमता, अनुशासन, पराक्रम एवं राष्ट्रनिष्ठा को “राष्ट्र की अभेद सुरक्षा कवच” की संज्ञा देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में सामरिक क्षमता के साथ वैचारिक दृढ़ता भी अनिवार्य है।

सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संवाद भविष्य में सैन्य कूटनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा नीति एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मध्य नए रणनीतिक समन्वय का संकेत बन सकता है। विशेष रूप से सैन्य नेतृत्व एवं सामाजिक संगठनों के मध्य बढ़ता संवाद “समग्र राष्ट्रीय शक्ति” की अवधारणा को और सुदृढ़ करने वाला माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि Anil Chauhan ने अपने कार्यकाल में संयुक्त सैन्य संरचना, थिएटर कमान अवधारणा तथा आधुनिक युद्धक सिद्धांतों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जबकि N. S. Raja Subramani को रणनीतिक संचालन, सैन्य नियोजन एवं सामरिक नेतृत्व का अत्यंत प्रखर अधिकारी माना जाता है। ऐसे में दोनों सैन्य मनीषियों की नियुक्तियां राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामरिक विमर्श की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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